कश्‍मीर पर फिर चीन की चालबाजी, भारत ने दिया करारा जवाब, अमेरिका भी आया साथ

देश
आईएएनएस
Updated Aug 06, 2020 | 17:55 IST

Kashmir India vs China: चीन कश्‍मीर पर अपनी पैंतराबाजी से बाज नहीं आ रहा है। उसने इस बार फिर इस मुद्दे पर संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा की असफल कोशिश की, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

कश्‍मीर पर फिर चीन की चालबाजी को भारत का करारा जवाब, LAC पर अमेरिका भी आया साथ
कश्‍मीर पर फिर चीन की चालबाजी को भारत का करारा जवाब, LAC पर अमेरिका भी आया साथ  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में कश्‍मीर मुद्दे को उठाने की चीन की कोशिश एक बार फिर फेल हो गई है
  • भारत ने कश्‍मीर को पूरी तरह अपना आंतरिक मामला करार देते हुए चीन को करारा जवाब दिया है
  • अमेरिका ने भी भारत का साथ दिया है और LAc पर आक्रामकता के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है

वाशिंगटन/नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू एवं कश्मीर पर एक चर्चा शुरू कराने की बीजिंग की असफल कोशिश के बाद नई दिल्ली ने भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश के खिलाफ चीन को गुरुवार को चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में सरकार ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने एक ऐसे विषय को उठाने की मांग की है, जो पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।

सरकार ने कहा, पहले की तरह ही इस बार भी चीन के इस प्रयास को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से बहुत कम समर्थन मिला। हम भारत के आंतरिक मामलों में चीन के हस्तक्षेप को खारिज करते हैं। साथ ही चीन से अपील करते हैं कि वह इस तरह के निष्फल प्रयासों के बाद समुचित निष्कर्ष निकाले।

अमेरिका का समर्थन

सरकार को बुधवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति से समर्थन को लेकर एक का पत्र मिला है, जिसमें लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की ओर से दिखाई जा रही आक्रामकता के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया है।

प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष और डेमोक्रेट रैंकिंग सदस्य एलियॉट एंगल एवं रैंकिंग रिपब्लिकन सदस्य माइकल टी मैक्कॉल ने संयुक्त रूप से यह पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका-भारत संबंधों के लिए मजबूत द्विदलीय समर्थन प्रदर्शित करना चाहते हैं।

'चीन आक्रामकता के लिए जिम्‍मेदार'

उन्होंने कहा, दोनों दलों के सदस्य भारत एवं अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों के 21वीं सदी पर मजबूत प्रभाव को समझते हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल फरवरी में कहा था कि हमारे संबंध अब केवल साझेदारी नहीं हैं, बल्कि ये पहले से कहीं अधिक मजबूत एवं करीबी हैं। ये मजबूत संबंध ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हैं, जब भारत चीन के साथ लगती सीमा पर उसके (चीन के) आक्रामक रुख का सामना कर रहा है। चीन का यह व्यवहार हिंद प्रशांत में चीन सरकार के अवैध कदमों और उसकी आक्रामकता का हिस्सा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिका अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के भारत के प्रयासों के समर्थन में अडिग रहेगा।

अमेरिकी हाउस कमेटी ने अपने पत्र में जम्मू-कश्मीर में चल रही गंभीर सुरक्षा और आतंकवाद जैसी चिंताओं को भी स्वीकार किया और कहा कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धताओं को बनाए रखते हुए भारत सरकार के साथ इन चिंताओं को दूर करने के लिए काम करना चाहते हैं।
 

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