हरियाणा में BJP ने मैनेज कर लिया किसान आंदोलन ! इस चुनाव से समझें बदलती राजनीति

देश
प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Jun 23, 2022 | 18:20 IST

Haryana Municipal Election Results 2022: भाजपा ने राज्य के 46 म्युनिसिपल  में से 22 पर खुद जीत हासिल कर ली है, जबकि उसके सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) को 3 सीटें मिली है। इस तरह गठबंधन का 25 कॉरपोरेशन का कब्जा हो गया है।

haryana municipal election 2022 explained
फाइल फोटो: किसान आंदोलन के दौरान भाजपा और जजपा नेता 
मुख्य बातें
  • किसान आंदोलन के दौरान ऐलानाबाद और बरोदा उप चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।
  • कांग्रेस के विधायक वाले क्षेत्रों में भी भाजपा-जजपा गठबंधन का अच्छा प्रदर्शन
  • आम आदमी पार्टी का खाता खुला लेकिन उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं

Haryana Municipal Election Results 2022:हरियाणा में क्या किसान आंदोलन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मैनेज कर लिया है, राज्य के म्युनिसिपल चुनाव (Municipal Election) के परिणामों के बाद, क्या यही सबसे बड़ा संदेश है ? यह सवाल इसलिए है क्योंकि भाजपा ने राज्य के 46 म्युनिसिपल  में से 22 पर खुद जीत हासिल कर ली है, जबकि उसके सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) को 3 सीटें मिली है। इस तरह गठबंधन का 25 कॉरपोरेशन का कब्जा हो गया है। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि किसान आंदोलन (Farmer Protest) के दौरान ऐलानाबाद और बरोदा उप चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। और जहां तक किसान आंदोलन के असर की बात है तो उसका सबसे ज्यादा  विरोध पंजाब और हरियाणा में ही हुआ था। और हालात ऐसे बन गए थे कि भाजपा-जजपा गठबंधन में भी दरारें दिखने लगी थी। यही नहीं हरियाणा (Haryana) में तो कई जगहों पर भाजपा नेताओं पर सीधे हमले भी हो रहे थे और उनको गांवों में घुसने भी नहीं दिया जा रहा था।

किस पार्टी को कितनी सीटें

राज्य चुनाव आयोग के अनुसार भारतीय जनता पार्टी  ने 22 सीटें, जननायक जनता पार्टी ने तीन, आम आदमी पार्टी (AAP)  ने एक, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने एक जबकि 19 निर्दलीय उम्मीदवारों ने सीटें जीती हैं। इसमें से  नगर परिषद की 18 में से 10 सीटें भाजपा को मिली हैं। जबकि जजपा. इनेलो को एक और निर्दलीय को छह सीटों पर जीत हासिल हुई है। इसी तरह  28 नगरपालिका अध्यक्ष पदों में से, भाजपा ने 12, जजपा ने दो, आप ने एक और निर्दलीय ने 13 पदों पर जीत हासिल की है।

भाजपा और जजपा गठबंधन के नेता इस जीत को अग्निपथ स्कीम के विरोध प्रदर्शन के असर के रूप में भी देख रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि केंद्र की अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध का नगरपालिका चुनावों के परिणाम पर कोई प्रभाव पड़ा है।

मनोहर लाल खट्टर ने कहा- सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को प्राथमिकता देगा हरियाणा, मिलेगा अच्छा पारिश्रमिक

कांग्रेस (Congress) के लिए बड़ा झटका !

जिस तरह राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग हुई और पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन चुनाव हारे। उससे साफ है कि पार्टी के लिए राज्य में सामान्य हालात नहीं हैं। इस मामले में कुलदीप सेंगर खुलकर राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ बोल रहे हैं। उसका असर म्युनिसिपल चुनाव में भी दिखा है। भले ही कांग्रेस ने पार्टी के आधार पर चुनाव नहीं लड़ा है। लेकिन कैथल और नरवाना में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के समर्थन में खड़े उम्मीदवार की हार बड़ा झटका है। और इसके लेकर जजपा नेता और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेस पर निशाना भी साधा है। उन्होंने दावा किया है कि कैथल और नरवाना में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के समर्थन में खड़े उम्मीदवार की हार और भूपेंद्र हुड्डा के मजबूत क्षेत्र मेहम, झज्जर, बहादुरगढ़ और गोहाना में गठबंधन के उम्मीदवार की जीत हुई है। इसके अलावा भाजपा-जजपा के 12 उम्मीदवार ऐसे जगहों से जीतें हैं, जहां से कांग्रेस के विधायक हैं।

हालांकि कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा (Bhupinder Hooda) ने कहा है कि भाजपा अब शहरी क्षेत्र में भी समर्थन खो चुकी है।  प्रत्येक सीट के लिए चार से पांच स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ रहे थे। इन निर्दलीय उम्मीदवारों ने नगर निगम और नगर परिषद की 46 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में साफ है कि भाजपा जनता का समर्थन खो चुकी है। 

आम आदमी पार्टी के लिए अभी राह मुश्किल 

पंजाब में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी का सबसे ज्यादा जोर हरियाणा में अपने संगठन को मजबूत करने पर रहा है। इसलिए पिछले कुछ महीने से उसने कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को पार्टी में शामिल किया था। ऐसे में उसे उम्मीद थी कि वह म्युनिसिपल इलेक्शन में अच्छा प्रदर्शन करेगी। लेकिन इन चुनावों में केवल उसका खाता ही खुल पाया। और कैथल में उसी जीत हासिल हुई। लेकिन परिणामों से साफ है कि अभी पार्टी को राज्य में 2024 के विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति दर्ज कराने में कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। 

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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