कोरोना काल में कटाई: दोहरी सावधानी है जरूरी

कोरोना काल में किसानों की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए एक रोड मैप बनाया जाना चाहिए ताकि खेतों में खड़ी फसल और कट चुकी फसल को किसी तरह का नुकसान नहीं हो।

Harvesting in the Corona period
कटाई और भंडारण के दौरान किसान की सेहत पर असर ना हों, ये सबसे महत्वपूर्ण हैं।   |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • कटाई और भंडारण के दौरान किसान की सेहत का ख्याल रखना जरूरी
  • ICAR ने देश भर के किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की
  • कोरोना के कोई भी लक्षण दिखें तो तुरंत मेडिकल मदद लें

आलोक रंजन

कोरोना काल में किसान कई इलाकों में फसलों की कटाई में जुटे हैं। वैसे तो सरकार ने लॉकडाउन से कटाई को अलग रखा है। गेहूं की कटाई का समय भी शुरु हो गया हैं। कुछ हिस्सों में अभी भी सरसों, राई की कटाई चल रही हैं। कटाई और सरकारी खरीदी पर असर ना हों, ये सबसे अहम हैं । हालांकि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों का पलायन भी कई जगह कटाई पर असर डाल सकता हैं । आमतौर पर गेहूं, चना, सरसों सहित अन्य रबी फसलों की कटाई का समय मार्च और अप्रैल में होता है।

कटाई और भंडारण के दौरान जरूरी हैं ये बातें

कटाई और भंडारण के दौरान किसान की सेहत पर असर ना हों, ये सबसे महत्वपूर्ण है। खासतौर पर किसान के श्वसन तंत्र पर प्रभाव ना पड़े, ये चुनौती है। कटाई और भंडारण के समय अनाजों की धूल (ग्रेन डस्ट) और प्लांट का कचरा किसान के फेफड़े को खतरे में डालता है। साथ ही कोरोना भी श्वसन तंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं। ऐसे में क्या गांवों में खतरा हो सकता है ?

सेहत का ध्यान रखना जरूरी

देश के जाने-माने डॉक्टर के. के अग्रवाल का कहना है, खतरा है भी और नहीं भी। खतरा इसलिए कि मजदूरों का अपने गांवों की ओर पलायन हो रहा है, लेकिन गांवों में खुलापन भी है। खुलापन बचाव करेगा। साथ ही गांव में साफ-सफाई करें। आपस में दूरी बनाएं रखें। खासतौर पर भंडारण, ढुलाई के वक्त ये जरूर करें। लेकिन कटाई के दौरान फंगस और कचरा फेफड़े पर असर डालता है तो मुंह ढंक कर काम करें। कोरोना काल में दोगुनी सावधानी जरूरी हैं।

पूरे अप्रैल में सावधानी जरूरी

डॉक्टर अग्रवाल का ये भी कहना है कि कोरोना के कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत मेडिकल मदद लें। ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता, महिला आरोग्य समितियां और गांव कल्याण समितियों की सहायता से नजदीकी अस्पताल तक पहुंचा जा सकता है। सर्दी, खांसी, बुखार के लक्षण को नज़रअंदाज न करें। यानी पूरे अप्रैल सावधानी रखनी हैं। वैसे कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में 21 दिन के लॉक डाउन लागू किए जाने का यूं तो सभी स्वागत कर रहे हैं, मगर खेतों में खड़ी फसल की अगर समय से कटाई और भंडारण नहीं हो सका तो किसान का जीवन मुश्किल भरा हो जाएगा। 

किसानों के लिए रोडमैप जरूरी

कोरोना काल में  किसानों की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए एक रोडमैप बनाया जाना चाहिए ताकि खेतों में खड़ी फसल और कट चुकी फसल को किसी तरह का नुकसान नहीं हो। कई जगह लॉकडाउन के चलते सीमाएं सील है तो किसान की पहुंच मंडी तक हो पाएं, ये प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा। वहीं किसानों से फसल खरीदी की व्यवस्था भी की जा रही है। यूपी में खरीदी की तैयारी अप्रैल के दूसरे सप्ताह से है। फौरी राहत तौर पर केंद्र सरकार ने 80 लाख किसानों के खाते में दो हजार रुपए डाल दिए हैं। कोरोना महामारी अगर लंबे समय तक खींची तो देश में अनाज का स्टॉक बना रहना चाहिए। जरुरी ये है कि कटाई और भंडारण के समय किसान का स्वास्थ दुरुस्त और फसल सुरक्षित रहें। आने वाले दिनों में अन्नदाता और अनाज भंडार की हिफाज़त देश हित में हैं ।

ICAR ने जारी की  एडवाइजरी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ( ICAR) ने देश भर के किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में सभी किसानों से गेहूं की कटाई का काम 20 अप्रैल तक टालने की अपील की गई है। एडवाइजरी में कहा गया है कि इस बार गेहूं को पूरी तरह पकने में 10 अप्रैल से ज्‍यादा का समय लग सकता है, क्योंकि इस बार तापमान में नमी की मात्रा औसत से अध‍िक है। परिषद का कहना है कि इसके चलते वैसे भी गेहूं की कटाई का काम देरी से शुरू होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और खेती किसानी पर  जागरूकता मुहिम चला रहे हैं। दूरदर्शन किसान से भी जुड़े रहे हैं।)

डिस्क्लेमर: इस प्रस्तुत लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।

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