हरिद्वार कुंभ का पहला शाही स्‍नान आज, कोविड-19 गाइडलाइंस का रखें ध्यान

हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन किया गया है, जिसमें कोविड महामारी को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए कई नियम तय किए गए हैं। उन्‍हें सख्‍ती से इनका पालन करने की सलाह दी गई है।

हरिद्वार कुंभ का पहला शाही स्‍नान आज, कोविड-19 गाइडलाइंस का रखें ध्यान
हरिद्वार कुंभ का पहला शाही स्‍नान आज, कोविड-19 गाइडलाइंस का रखें ध्यान  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • हरिद्वार कुंभ मेले का पहला शाही स्‍नान आज हो रहा है
  • कोरोना महामारी के बीच यहां कई नियम तय किए गए हैं
  • श्रद्धालुओं के लिए कोविड-19 का टेस्‍ट कराना जरूरी है

हरिद्वार : कोरोना महामारी के बीच उत्‍तराखंड के हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन किया गया है। इसमें पहला शाही स्‍नान आज (गुरुवार, 11 मार्च) को महाशिवरात्रि के मौके पर हो रहा है। इस दौरान लोगों को कोविड-19 से जुड़े नियमों का पालन सख्‍ती से करने के लिए कहा गया है। इसका उल्‍लंघन करने वालों पर सख्‍त कार्रवई की जाएगी। श्रद्धालुओं को मेले में पहुंचने से पहले कोरोना टेस्‍ट कराना होगा।

कोविड टेस्‍ट जरूरी

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए इस बार कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई नियम तय किए गए हैं। इच्‍छुक श्रद्धालुओं को कोरोना जांच से संबंधित अपनी RT-PCR रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। इस क्रम में श्रद्धालु यह भी सुनिश्चित कर लें कि यह रिपोर्ट 72 घंटे से पुरानी न हो। इसी रिपोर्ट के आधार पर श्रद्धालुओं को मेला परिसर में जाने के लिए ई-पास जारी किया जाएगा।

यहां ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों और शीर्ष अधिकारियों का कोरोना टेस्‍ट कराना भी जरूरी किया गया है। इस बार कुंभ में चार शाही स्‍नान पड़ रहे हैं। पहला शाही स्‍नान जहां 11 मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर हो रहा है, वहीं दूसरा शाही स्‍नान 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या के अवसर पर होना है, जबकि तीसरा शाही स्‍नान 14 अप्रैल को बैसाखी के अवसर पर और चौथा शाही स्‍नान 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर होगा।

ऐसी है धार्मिक मान्‍यता

यहां उल्‍लेखनीय है कि देश में हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक को कुंभ नगरी के तौर पर जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जो अमृत निकला, उसे लेकर देवताओं और असुरों में झगड़ा होने लगा। इसी दौरान देवता उसे लेकर भागे, जिनके पीछे दैत्य भी भागे। दैत्‍यों से बचने के लिए देवता 12 वर्षों तक भागते रहे और इस दौरान 12 स्थानों पर अमृत कलश रखा गया।

मान्‍यताओं के अनुसार, जिन स्‍थानों पर अमृत कलश रखा गया, वहां कलश से अमृत की कुछ बूंदें छलकर गिर गईं। आगे चलकर ये पवित्र स्थान बन गए। ऐसी धार्मिक मान्‍यता है कि इनमें से आठ स्थान देवलोक में हैं, जबकि चार स्थान भू-लोक यानी धरती पर हैं। धरती पर मौजूद ये चारों स्‍थान हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक भारत में ही हैं और इन्‍हें कुंभ नगरी कहा जाता है।
 

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