Monkeypox: मंकीपॉक्स को लेकर सतर्क हुई सरकार, NCDC और ICMR को दिए स्थिति पर नजर रखने के निर्देश

Monkeypox: कुछ देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आने के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC )और आईसीएमआर को स्थिति पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया है।

Monkeypox
कुछ देशों में आ रहे मंकीपॉक्स के मामले 
मुख्य बातें
  • मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है
  • यह पहली बार 1958 में शोध के लिए रखे गए बंदरों में पाया गया था
  • यह रोग घावों, शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और दूषित सामग्री जैसे बिस्तर के माध्यम से फैलता है

Monkeypox: सरकार ने एनसीडीसी और आईसीएमआर को विदेश में मंकीपॉक्स की स्थिति पर कड़ी नजर रखने और प्रभावित देशों के संदिग्ध बीमार यात्रियों के नमूने आगे की जांच के लिए एनआईवी पुणे भेजने का निर्देश दिया है। न्यूज एजेंसी ANI को सीनियर अधिकारी ने बताया कि नमूने (एनआईवी पुणे को) केवल ऐसे मामलों में भेजें जहां लोग कुछ विशिष्ट लक्षण प्रदर्शित करते हैं। बीमार यात्रियों के सैंपल नहीं। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हवाईअड्डे और बंदरगाह के स्वास्थ्य अधिकारियों को भी सतर्क रहने का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया है कि मंकीपॉक्स प्रभावित देशों की यात्रा के इतिहास वाले किसी भी बीमार यात्री को अलग कर दिया जाए और नमूने जांच के लिए पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की बीएसएल4 सुविधा को भेजे जाएं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने गुरुवार को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और आईसीएमआर को भारत की स्थिति पर कड़ी नजर रखने और निगरानी करने का निर्देश दिया।

यूके, यूएसए, पुर्तगाल, स्पेन और कुछ अन्य यूरोपीय देशों से मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं। मनुष्यों में मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक के समान लेकिन हल्के होते हैं। WHO के अनुसार, मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, चकत्ते और सूजी हुई लिम्फ नोड्स के साथ मनुष्यों में प्रकट होता है और इससे कई प्रकार की चिकित्सा जटिलताएं हो सकती हैं। मंकीपॉक्स आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक चलने वाले लक्षणों के साथ एक स्व-सीमित बीमारी है। यह भी गंभीर हो सकता है, डब्ल्यूएचओ का कहना है कि हाल के दिनों में मृत्यु दर का अनुपात लगभग 3-6 प्रतिशत रहा है।

मंकीपॉक्स क्या है?

मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है। यह पहली बार 1958 में शोध के लिए रखे गए बंदरों में पाया गया था। मंकीपॉक्स से संक्रमण का पहला मामला 1970 में दर्ज किया गया था। यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में पहुंच जाता है।

बीमारी के लक्षण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, दाने और गांठ के जरिये उभरता है और इससे कई प्रकार की चिकित्सा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। रोग के लक्षण आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक दिखते हैं, जो अपने आप दूर होते चले जाते हैं। मामले गंभीर भी हो सकते हैं। हाल के समय में, मृत्यु दर का अनुपात लगभग 3-6 प्रतिशत रहा है, लेकिन यह 10 प्रतिशत तक हो सकता है। संक्रमण के वर्तमान प्रसार के दौरान मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है।

संक्रमण का प्रसार कैसे होता है?

मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। ऐसा माना जाता है कि यह चूहों, चूहियों और गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है। यह रोग घावों, शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और दूषित सामग्री जैसे बिस्तर के माध्यम से फैलता है। यह वायरस चेचक की तुलना में कम संक्रामक है और कम गंभीर बीमारी का कारण बनता है।

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