Shramik Special Train: कोरोना काल में हर तरफ से घिरे थे मजदूर, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में गई थी 97 की जान

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 19, 2020, 06:27 PM IST

केंद्र सरकार ने बताया है कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चलाई गई श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों में यात्रा के दौरान 97 लोगों की मौत हुई।

Shramik Special Train: कोरोना काल में हर तरफ से घिरे थे मजदूर, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में गई थी 97 की जान

नई दिल्ली: लॉकडाउन में वापस अपने-अपने गृह राज्यों की ओर लौटन के दौरान मारे गए प्रवासियों की संख्या नहीं रखने के लिए विरोध का सामना करने के बाद सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 97 लोगों की मौत हुई। मजदूरों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेनें चलाई गई थीं। 

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन द्वारा शुक्रवार को पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'राज्य पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर कोविद-19 संकट के दौरान श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करते समय 09.09.2020 तक 97 लोगों की मौत हो चुकी है।'

संसद के ऊपरी सदन में आंकड़ों को साझा करते हुए मंत्री ने कहा कि मौत के 97 मामलों में से राज्य पुलिस ने 87 मामलों में पोस्टमार्टम के लिए शव भेजे। 51 मामलों की ऑटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार, दिल का दौरा/हृदय रोग/मस्तिष्क रक्तस्राव/पूर्व-मौजूदा पुरानी बीमारी/पुरानी फेफड़ों की बीमारी/पुरानी जिगर की बीमारी आदि मौतों का कारण है।

मंत्री ने कहा कि राज्य पुलिस अप्राकृतिक मौतों के मामलों में सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज करती है और आगे की कानूनी प्रक्रिया का पालन करती है।

सरकार को नहीं पता, रास्ते में कितने लोग मरे

इससे पहले केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा को बताया था कि मार्च के दौरान देशव्यापी तालाबंदी के बाद अपने मूल स्थानों पर लौटने वाले या मारे जाने या घायल होने की संख्या पर कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इस पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया ने मौतें देखीं लेकिन केवल मोदी सरकार अनजान थी। 

1 मई से चलीं स्पेशल ट्रेनें

लॉकडाउन अवधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने घर लौट आए। कुछ लोग कई दिनों तक चले और अपने-अपने गांवों तक पहुंचने के लिए पैदल ही एक लंबी और थकाऊ यात्रा की। प्रवासी मजदूरों की कठिनाई को कम करने के लिए भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन अवधि के दौरान 1 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाना शुरू किया। रेल मंत्रालय के अनुसार, 1 मई से 31 अगस्त के बीच कुल 4,621 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें संचालित की गईं, जिसमें 6,319,000 यात्री अपने गृह राज्यों में गए।

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