Opinion India Ka: महाराष्ट्र  में उद्धव ठाकरे का Game Over हो गया ?

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 22, 2022, 12:05 AM IST

बागी एकनाथ शिंदे से उद्धव ठाकरे ने 20 मिनट फोन पर की बात, सूत्रों के मुताबिक शिंदे ने उद्धव से BJP के साथ आने को कहा, उद्धव बोले- मुंबई आकर कीजिए बात...

Opinion India Ka: महाराष्ट्र  में उद्धव ठाकरे का Game Over हो गया ?

महाराष्ट्र (Maharashtra) का सियासी तापमान बढ़ गया है, भाजपा 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है लेकिन उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार संकट में पड़ती दिख रही है। देशभर में महाराष्ट्र को  सियासी हलचल है। बता दें कि शिवसेना के 22 बागी विधायकों की लिस्ट भी सोशल मीडिया पर तैरने लगी। 

महाराष्ट्र संकट लगातार गहराता जा रहा है। उद्धव सरकार का क्या होगा, वो रहेगी या जाएगी, पहले महाराष्ट्र संकट को दस बड़ी ब्रेकिंग से समझिए-

  1. उद्धव-एकनाथ शिंदे में फोन पर बात-सूत्र
  2. शिंदे की शर्त- बीजेपी से हाथ मिलाइये
  3. उद्धव ने कहा- मुंबई आइये, बात कीजिए
  4. पवार मुंबई पहुंचे, कुछ देर में उद्धव से मीटिंग
  5. NCP कोटे के मंत्री-MLA के साथ पवार की मीटिंग
  6. फडणवीस दिल्ली में, अहमदाबाद जा सकते हैं
  7. उद्धव सीएम आवास में, MVA की मीटिंग जारी
  8. शिवसेना के बागी विधायकों से फोन लिए गए
  9. एकनाथ शिंदे गुजरात BJP के संपर्क में-सूत्र
  10. बागी विधायकों के अहमदाबाद शिफ्टिंग का प्लान

बालासाहेब के हाथों राजनीति का राजतिलक...बालासाहेब की छत्रछाया में सियासी सफर की शुरुआत... बालासाहेब की ब्रिगेड का सच्चा सिपाही....शिवसेना के हिंदुत्व की पहचान के ध्वजवाहक...उद्धव के बाद शिवसेना में दूसरे सबसे ताकतवर शिवसैनिक...स्वभाव से मृदुभाषी लेकिन राजनीतिक अंदाज आक्रामक...सियासी जोड़तोड़ के माहिर खिलाड़ी...एकनाथ शिंदे

उसी शिवसैनिक एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में तांडव मचा दिया है

....कभी बालासाहेब के सिद्धांतों से सरोकार रखते हुए शिवसेना का झंडा थामने वाले एकनाथ शिंदे ने आज शिवसेना की पहचान से पीछा छुड़ा लिया है...उन्होंने ट्विटर पर अपने बायो से शिवसेना हटा दिया। एक वक्त था जब एकनाथ शिंदे बालासाहेब ठाकरे के प्रभाव से अछूते नहीं थे...हालांकि वो 70-80 के दशक में ठाणे में वर्चस्व रखने वाले शिवसेना नेता आनंद दिघे के संपर्क में आए और बालासाहेब से जुड़ने का मौका मिला...

एकनाथ शिंदे ने 18 साल की उम्र में ही शिवसेना का दामन थाम लिया

1980 के दशक में उन्होंने बालासाहेब को सरकार मानते हुए 18 साल की उम्र में ही शिवसेना का दामन थाम लिया...एकनाथ शिंदे को किसान नगर का शाखा प्रमुख नियुक्त किया गया...साल 1997 में एकनाथ शिंदे को शिवसेना ने ठाणे नगर निगम चुनाव में पार्षद का टिकट दिया और उन्होंने भारी बहुमत से जीत हासिल की।

साल 2004 में वो पहली बार ठाणे सीट से विधानसभा पहुंचे

इसके बाद साल 2004 में वो पहली बार ठाणे सीट से विधानसभा पहुंचे...साल 2014 के चुनावों के बाद एकनाथ शिंदे को शिवसेना के विधायक दल के नेता और बाद में महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर चुना गया...अचानक एकनाथ शिंदे, शिवसेना से दूर क्यों होने लगे...क्यों उनके और मातोश्री के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और नौबत यहां तक आ गई कि महाराष्ट्र की सियासत में उनके एक दांव ने भूचाल ला दिया और उद्धव के सिंहासन को हिला दिया...

 क्यों बागी हुए एकनाथ शिंदे ?

  • -2019 के बाद से ही उद्धव और शिंदे के बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं
  • -2019 में वो शिवसेना की तरफ से सीएम की दौड़ में सबसे आगे थे लेकिन उद्धव का नाम सामने आने के बाद वो बैकफुट पर आ गए।
  • -एकनाथ शिंदे के PWD विभाग में सीएम उद्धव का दखल था...कोई भी फाइल बिना उद्धव की मंजूरी के पास नहीं होती थी।
  • शिंदे अपने समर्थक विधायकों के लिए खुद फंड, जरूरत पूरी करवाते थे...सरकार में रहते हुए भी विधायकों के लिए ये संभव नहीं था।
  • -अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी शिंदे की नहीं सुनी जाती थी।
  • -मुंबई के डेवलेपमेंट से जुड़े PWD विभाग के कई प्रोजेक्ट उद्धव की वजह से ठंडे बस्ते में पड़े थे
  • -शिंदे  पार्टी में साइडलाइन होने से नाराज चल रहे थे।

इसके अलावा शिंदे वो नेता हैं जिनका बीजेपी की तरफ झुकाव रहा है...देवेंद्र फडणवीस से उनकी करीबी जगजाहिर है...यही नहीं वो हिंदुत्व पर शिवसेना के समझौते से भी सहमत नहीं थे...वक्त गुजरते-गुजरते शिंदे की नाराजगी अपने नेताओं से इतना बढ़ गई कि उन्होंने महाविकास अघाड़ी गठबंधन के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया...शिवसेना को बीच मंझदार में डूबने के लिए अकेला छोड़ दिया।

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