त्योहारी मौसम में 2 सप्ताह पहले आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर :  ICMR  

Third Wave of Coorna : गणितीय मॉडल पर आधारित भारतीय चिकित्सा एवं अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी मौसम महामारी के प्रभाव को 47 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

 Festivals season can bring in third wave early by 2 weeks :  ICMR
देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जताई गई।   |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • आईसीएमआर के नई अध्ययन में कोरोना महामारी की तीसरी लहर पर जताई गई आशंका
  • अध्ययन में कहा गया है कि त्योहारी सीजन एवं छुट्टियां की वजह से तीसरी लहर जल्दी आ सकती है
  • जनसंख्या के घनत्व और पर्यटन स्थलों पर उमड़ रही भीड़ का अध्ययन में दिया गया हवाला

नई दिल्ली : देश में कोरोना की तीसरी लहर के बारे में बड़ा अंदेशा जताया गया है। गणितीय मॉडल पर आधारित भारतीय चिकित्सा एवं अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी सीजन एवं छुट्टियों के दौरान देश में कोविड-19  की तीसरी लहर (Third wave of Covid-19) अपने तय समय से दो सप्ताह से पहले से आ सकती है। यही नहीं त्योहारी समय महामारी के प्रभाव को 47 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। डॉ. बलराम भार्गव, डॉ. समीर पांडा सहित आईसीएमआर के शीर्ष वैज्ञानिकों के गणितीय मॉडल को आधार बनाकर किए गए अध्ययन में यह बात कही गई है।    

जनसंख्या के घनत्व का दिया हवाला

आने वाले त्योहारी सीजन और छुट्टियों को देखते हुए इस अध्ययन में दो संभावित स्थितियों की ओर इशारा किया गया है। भारत के जनसंख्या घनत्व को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि यहां अमेरिका की तुलना में संक्रमण का प्रभाव ज्यादा है, दूसरा देश में छुट्टियों का समय महामारी की चरम स्थिति को 103 प्रतिशत तक ले जा सकता है। यह समय महामारी की चरम स्थिति को चार सप्ताह तक कायम रख सकता है।  

पर्यटन स्थलों पर बढ़ रही भीड़

इल अध्ययन में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश, असम जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ने से यहां संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। इसके अलावा छोटे राज्य जहां का जनसंख्या घनत्व कम है, वहां पर महामारी फैलने की तीव्रता राष्ट्रीय स्तर की तुलना में कम रही है। यही नहीं इन राज्यों में दूसरी लहर का प्रभाव भी कम देखा गया। अध्ययन के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के मनाली, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और पूर्वोत्तर के असम में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि पाई गई है। 

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