J-K: अनुच्छेद 370 बहाल करने की मांग तेज, दलों ने मिलकर बनाया पीपुल्स अलायंस, अब्दुल्ला के आवास पर हुई बैठक

Gupkar Declaration: जम्मू-कश्मीर के राजनेताओं ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग तेज कर दी है। इस संबंध में एक गठबंधन बनाया गया है जिसका नाम पीपुल्स अलायंस रखा है।

kashmir
कश्मीरी नेताओं ने की बैठक 

मुख्य बातें

  • कश्मीर में राजनीतिक दलों ने अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए गठबंधन को औपचारिक रूप दिया
  • 'पीपल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन' बनाया गया
  • अनुच्छेद 370 के लिए छह राजनीतिक दलों ने बैठक की

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दल एक हो रहे हैं। इस संबंध में गुरुवार को श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के आवास पर ऑल पार्टी मीटिंग हुई। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी यहां मौजूद थीं। बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'हमने गुपकर घोषणा के लिए इस गठबंधन को पीपुल्स अलायंस का नाम दिया है। हमारी लड़ाई एक संवैधानिक लड़ाई है, हम चाहते हैं कि भारत सरकार राज्य के लोगों को उन अधिकारों को लौटाए जो उनके पास 5 अगस्त 2019 से पहले थे।'

फारूक अब्दुल्ला के आवास पर छह दलों की बैठक हुई। बताया गया कि इसमें गुपकर घोषणा पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस संबंध में बुधवार को फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती से उनके आवास पर मुलाकात भी की थी। अब्दुल्ला ने कहा कि गठबंधन जम्मू-कश्मीर के मुद्दे के समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों से वार्ता भी करेगा। आने वाले समय में हम आपको भविष्य की योजनाओं से अवगत कराएंगे।

इससे पहले 22 अगस्त, 2020 को जम्मू और कश्मीर के छह राजनीतिक दलों ने अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के खिलाफ सामूहिक रूप से लड़ने के लिए गुपकर घोषणा नामक एक वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए थे। उन छह राजनीतिक दलों में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, आईएनसी, जम्मू-कश्मीर के लोगों का सम्मेलन, सीपीआई (एम) और अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस शामिल हैं। 

ये है गुपकर घोषणा

भाजपा को छोड़कर कश्मीर के सभी बड़े राजनीतिक दलों की पिछले वर्ष चार अगस्त को फारूक अब्दुल्ला के आवास पर बैठक हुई थी। यह बैठक पूर्ववर्ती राज्य में अनिश्चितता और तनाव के बीच हुई थी, क्योंकि केंद्र ने अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों को वहां तैनात किया था और अमरनाथ के श्रद्धालुओं सहित सभी पर्यटकों को जल्द से जल्द घाटी छोड़ने के लिए कहा गया था। स्थिति को लेकर चिंता जाहिर करते हुए राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी किया था जिसे 'गुपकार घोषणा' के नाम से जाना जाता है।

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