एक साल तक कृषि कानूनों को निलंबित करने और समाधान के लिए कमेठी बनाने को तैयार सरकार

देश
लव रघुवंशी
Updated Jan 20, 2021 | 20:19 IST

तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले लगभग 50 दिन से जारी गतिरोध को दूर करने के प्रयासों के तहत बुधवार को सरकार और कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 10वें दौर की वार्ता हुई।

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किसान आंदोलन 

मुख्य बातें

  • आंदोलन कर रहे किसान संघों के साथ सरकार की अगली बैठक 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे होगी
  • सरकार ने एक निश्चित समय के लिए तीनों कृषि कानूनों को निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है
  • सरकार के प्रस्ताव पर किसान गुरुवार को चर्चा करेंगे

नई दिल्ली: तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों और सरकार के बीच आज 10वें दौर की बातचीत हुई। अगले दौर की बातचीत 22 जनवरी को होगी। बैठक में सरकार ने कानूनों को कुछ समय के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है। जब तक बीच का रास्ता नहीं निकल जाता, तब तक कानूनों का निलंबन जारी रहेगा। इसके अलावा सरकार ने कमेठी बनाने का भी प्रस्ताव दिया है। कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से कहा, 'एक कमेठी का गठन किया जाए, जिसमें किसान और सरकार के प्रतिनिधि हों। कमेठी कानूनों पर क्लॉज वाइज चर्चा करे। सुप्रीम कोर्ट ने 2 महीने के लिए कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है, अगर जरूरत पड़ती है तो सरकार उनके कार्यान्वयन के लिए एक साल तक इंतजार कर सकती है।' कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से कहा कि सरकार किसानों के मन में किसी भी तरह की शंका को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देने को तैयार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर दोनों पक्षों को बैठक समाप्त होने से पहले आम सहमति तक पहुंचना चाहिए। 

वार्ता के बाद एक किसान नेता ने कहा, 'सरकार ने कहा है कि वह डेढ़ साल के लिए कानूनों को निलंबित करने के लिए तैयार है। जवाब में किसानों ने कहा कि कानूनों को निलंबित करने का कोई मतलब नहीं है और यह स्पष्ट किया है कि हम कानूनों को निरस्त करना चाहते हैं।' किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि उन्होंने हमें कानूनों के कार्यान्वयन को निलंबित करने के बारे में बताया। हमने उनसे कहा कि वे कानून को निरस्त करें। कल हम मिलेंगे। यह पहली बार है कि सरकार बैकफुट पर है। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, 'सरकार ने कहा कि वह एक या डेढ़ साल के लिए कानूनों के कार्यान्वयन को लागू नहीं करने के लिए अदालत में एक हलफनामा दायर करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा है कि एमएसपी और कानूनों पर एक समिति बनाई जाएगी और वे समिति की सिफारिशों को लागू करेंगे। हम कल एक बैठक करेंगे और प्रस्ताव पर निर्णय लेंगे।' 

हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तीनों कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा। वहीं किसान इससे कम में तैयार नहीं हो रहे हैं। सरकार कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार है, लेकिन कानूनों को निरस्त करने की कोई गुंजाइश नहीं है। 

पहले 19 को होनी थी बैठक

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश ने लगभग 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विज्ञान भवन में वार्ता कर रहे हैं। दसवें दौर की वार्ता 19 जनवरी को होनी थी लेकिन यह स्थगित कर दी गई थी। केंद्र सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नौ दौर की वार्ता में मुद्दे को सुलझाने की कोशिश बेनतीजा रही थी। सरकार ने पिछली वार्ता में किसान संगठनों से अनौपचारिक समूह बनाकर अपनी मांगों के बारे में सरकार को एक मसौदा प्रस्तुत करने को कहा था। हालांकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे।

उल्लेखनीय है कि सरकार और किसान संगठनों के मध्य चल रही वार्ता के बीच उच्चतम न्यायालय ने 11 जनवरी को गतिरोध समाप्त करने के मकसद से चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए। इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया है।

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