रक्षा, कारोबार और वे मुद्दे जिन पर भारत चाहेगा बिडेन का साथ

देश
ललित राय
Updated Nov 08, 2020 | 06:11 IST

जो बाइडेन अब अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति होंगे। ऐसे में सवाल यह है कि उनके कार्यकाल में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और कारोबारी संबंध किस दिशा में जाएंगे।

रक्षा, कारोबार और वे मुद्दे जिन पर भारत चाहेगा बिडेन का साथ
जो बिडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बने 

मुख्य बातें

  • बाइडेन के आने से भारत- अमेरिकी कारोबारी रिश्ते को मिलेगी गति
  • भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में खास असर पड़ने की उम्मीद कम
  • चीन और पाकिस्तान के प्रति बाइडेन सरकार का रुख रह सकता है नरम

वाशिंगटन। अमेरिका ने डेमोक्रेट्स उम्मीदवार जो बाइडेन को अपना राष्ट्रपति चुन लिया। डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार व्हाइट हाउस पर काबिज नहीं हो सके। बाइडेन के चुने जाने के बाद हर किसी के जेहन में सवाल कौंध रहा होगा कि भारत के साथ अब अमेरिका के रिश्ते कैसे होंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह से भारत को तवज्जो दी क्या उस भूमिका में बाइडेन रहेंगे या बदलाव करेंगे। खासतौर से रक्षा और कारोबार के क्षेत्र में क्या बाइडेन ट्रंप से ज्यादा मददगार भारत के लिए साबित होंगे या उनकी नीति कमोबेश वैसे ही रहेगी। इस विषय पर जानकार कहते हैं कि आमतौर पर डेमोक्रेट्स हों या रिपब्लिकन वो अमेरिका फर्स्ट को पहले देखते हैं। 

कारोबार कैसे पड़ेगा असर
बाइडेन के आने से  दोनों देशों के आर्थिक संबंध और बेहतर हो सकते हैं। कारोबार में इजाफा होने की उम्मीद है, बिजनेस में इजाफा होना दोनों देशों के लिए मुफीद होगा। कोरोना काल में कुछ मामलों में अमेरिका की भारत पर निर्भरता बढ़ी है, इसके साथ ही अमेरिका से आयात में भी इजाफा हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि रतीयों को ज्यादा ग्रीन कार्ड मिल पाएगा यानी ज्यादा भारतीय अमेरिका में बस पाएंगे। यह एक ऐसा मुद्दा रहा है जिस पर ट्रंप की निगाह टेढ़ी रही है। जीएसपी से जिस तरह से भारत को निकाल दिया गया वो स्टेट्स भारत फिर से हासिल कर सकता है। IT सेक्टर की कंपनियों को जो बाइडेन के आने का फायदा होगा।

रक्षा मामले कैसे हो सकते हैं प्रभावित
बाइडेन के आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान और चीन के प्रति उनका रुख क्या होता है, आतंकवाद के प्रति अमेरिकी नीति में किसी तरह की नरमी नहीं होती। लेकिन जब भारत, पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाता है तो डेमोक्रेट्स उतनी गंभीरता नहीं देते हैं। यही बात चीन के साथ है। डेमोक्रेट्स पार्टी को लगता है कि रिपब्लिकन चीन के बारे में अतिवादी सोच रखते हैं और यह भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी का रुख चीन के प्रति थोड़ा नरम रहा है। ध्यान देने वाली बात  यह है कि भारत-पाकिस्तान संबंध की बात करें तो इसपर बहुत बदलाव नहीं होगा क्योंकि भारत ने साफ कर दिया है कि वो अपनी हितों की रक्षा जरूर करेगा। भारत-अमेरिका रक्षा संबंध की बात करें तो बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। संयुक्त युद्धाभ्यास और सैन्य समझौते पहले की तरह होते रहेंगे। अमेरिका के साथ जहां तक हथियारों की खरीद की बात है तो उस पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। 

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