पहली बार हुआ ऐसा जब बंगाल में एक सीट भी नहीं जीत पाई कांग्रेस, केरल-असम में भी लगा झटका  

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 3, 2021, 09:24 AM IST

बंगाल में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद दयनीय रहा है। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वह टीएमसी के बाद दूसरे स्थान पर रही लेकिन इस बार राज्य में उसका सफाया हो गया है।

पहली बार हुआ ऐसा जब बंगाल में एक सीट भी नहीं जीत पाई कांग्रेस, केरल-असम में भी लगा झटका  
Photo Credit: PTI

नई दिल्ली : चार राज्यों बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के चुनाव नतीजे रविवार को घोषित हुए। इन पांचों राज्यों में सबसे ज्यादा अगर किसी पार्टी को नुकसान पहुंचा तो वह कांग्रेस पार्टी है। देश की सबसे पुरानी पार्टी को असम और केरल में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस बंगाल चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई। तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को जीत जरूर मिली है लेकिन यहां जीत का श्रेय राहुल गांधी को नहीं बल्कि स्टालिन को जाता है। पार्टी ने केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में भी खराब प्रदर्शन किया है। गत नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत दयनीय रहा।

केरल में मिला बड़ा झटका
कांग्रेस को बड़ा झटका केरल में मिला है। पिछले चार दशकों से इस राज्य की परंपरा रही है कि लोग यहां बारी-बारी लेफ्ट और कांग्रेस को मौका देता आए हैं लेकिन इस बार यह परंपरा टूट गई। पिनरई विजयन ने पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की है। यही नहीं, पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था। उसने लोकसभा की 20 सीटों में से 19 पर जीत दर्ज की। राहुल गांधी यहां के वायनाड से सांसद भी चुने गए। कांग्रेस को विश्वास था कि वह इस बार राज्य की सत्ता में वापसी करेगी। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जमकर चुनाव प्रचार किया। राहुल ने कई बार केरल का दौरा किया। एक तरह से उन्होंने अपना ध्यान अन्य राज्यों से हटाकर यहीं के चुनाव पर केंद्रित किया था। केरल में इस बार कांग्रेस ने 21 सीटे जीती हैं। यह पिछली बार से एक सीट कम है। 

बदरूद्दीन का साथ भी असम में सफल नहीं हुआ
कांग्रेस असम में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है। इस बार चुनाव में उसने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। उसे उम्मीद थी कि बदरूद्दीन अजमल की पार्टी से उसे लाभ मिलेगा। राज्य में गौरव गोगोई जैसे वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ा। यहां पार्टी ने इस बार 31 सीटें जीती हैं। 2016 के चुनाव में उसने 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, एआईयूडीएफ के खाते में 16 सीटें गई हैं। राज्य में सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में भाजपा ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। 

बंगाल में एक भी सीट नहीं जीत पाई
बंगाल में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद दयनीय रहा है। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वह टीएमसी के बाद दूसरे स्थान पर रही लेकिन इस बार राज्य में उसका सफाया हो गया है। यह बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार हुआ है जब कांग्रेस यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई है। खास बात यह है कि अपनी हार पर आत्ममंथन करने की जगह कांग्रेस नेता राज्य में भाजपा की हार से से ज्यादा खुश नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने एक ट्वीट में कहा, 'भाजपा को बुरी तरह पराजित करने के लिए मैं ममता जी और बंगाल की जनता को धन्यवाद देता हूं।'

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