Abide with Me: महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन एक बार फिर बीटिंग रिट्रीट से हटाया गया

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 22, 2022, 08:34 PM IST

Abide with Me: ईसाई भजन 'अबाइड विद मी' 1950 से बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान हर साल बजाया जाता था, लेकिन 2020 में इसे हटा दिया गया था, लेकिन पिछले साल इसे बहाल कर दिया गया था।

Abide with Me: महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन एक बार फिर बीटिंग रिट्रीट से हटाया गया

महात्मा गांधी के पसंदीदा पारंपरिक ईसाई भजन 'अबाइड विद मी' को इस साल के बीटिंग द रिट्रीट समारोह की धुनों की सूची से हटा दिया गया है। यह धुन 1950 से हर साल वार्षिक समारोह में बजाई जाती थी। समारोह के अंत में बैंड द्वारा 'एबाइड विद मी' बजाया जाता है और इस वर्ष इसके भजन के बिना पिछले साल बजाई गईं चार धुनों की बजाय तीन धुनें हैं। इस साल बजाई जाने वाले तीन धुनें हैं- 'कदम कदम बढ़ाए जा', 'ड्रमर्स कॉल' और 'ऐ मेरे वतन के लोगों'।

वहीं पिछले साल जो चार धुनें बजाई गईं थीं, वो थीं- 'भारत के जवान' (पिछले साल नई रचना), कदम कदम बढ़ाए जा, ड्रमर्स कॉल और अबाइड विद मी। 2020 में भी इस धुन को शुरू में सूची से हटा दिया गया था, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर लोगों के विरोध के बाद अंतिम सूची में शामिल कर दिया गया था। इसके अलावा 2020 में पहली बार 'वंदे मातरम' बजाया गया था।

'एबाइड विद मी' 19वीं शताब्दी में स्कॉटिश कवि हेनरी फ्रांसिस लिटे द्वारा लिखा गया था और 1950 से बीटिंग रिट्रीट समारोह का हिस्सा रहा है। दिल्ली के विजय चौक पर हर साल 29 जनवरी की शाम को बीटिंग रिट्रीट किया जाता है।

बीटिंग रिट्रीट सदियों पुरानी एक सैन्य परंपरा है जो उन दिनों से चली आ रही है जब सैनिक सूर्यास्त के समय युद्ध करना बंद करते थे। जैसे ही बिगुलवाला 'पीछे हटने' की आवाज देता था, सैनिक लड़ना बंद कर दिया करते थे और युद्ध के मैदान से हट जाया करते थे। बीटिंग द रिट्रीट गणतंत्र दिवस समारोह के अंत के रूप में होता है।

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