Indo-China:चीन का नया दांव कहा- हम 1959 वाली LAC पर कायम, भारत का दो टूक जवाब

देश
रवि वैश्य
Updated Sep 29, 2020 | 19:08 IST

चीन की तरफ से सोमवार को कहा गया था कि वह लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) के लिए सन् 1959 वाली स्थिति को स्‍वीकार करता है वहीं भारत ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए जबाव दिया है।

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चीन के बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है 

मुख्य बातें

  • चीन ने कहा- वह लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल के लिए सन् 1959 वाली स्थिति को स्‍वीकार करता है
  • भारत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 1959 की LAC की परिभाषा को हम नहीं मानते

भारत का पड़ोसी देश चीन भारत के साथ चालबाजियां खेलने से बाज नहीं आता है और अक्सर ही कोई ना कोई नया विवाद खड़ा करता रहता है एक बार फिर चीन ने एलएसी (LAC) के मसले पर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। चीन की तरफ से कहा गया था कि वह लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल  के लिए सन् 1959 वाली स्थिति को स्‍वीकार करता है वहीं भारत ने इस मामले का पुरजोर विरोध करते हुए इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि 1959 की LAC की परिभाषा को हम नहीं मानते।

भारत ने मंगलवार को चीन के इस दृष्टिकोण को खारिज किया कि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा की अवधारणा पर 1959 के अपने रुख को मानता है। भारत ने साथ ही कहा कि पड़ोसी देश तथाकथित सीमा की 'अपुष्ट एकतरफा' व्याख्या करने से बचे।पूर्वी लद्दाख में लगभग पांच महीने से चले आ रहे गतिरोध के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग एलएसी की अवधारणा के बारे में 1959 के अपने रुख को मानता है।

चीन के बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा, 'भारत ने कभी भी 1959 में एकतरफा रूप से परिभाषित तथाकथित वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार नहीं किया है। यह स्थिति बरकरार रही है और चीनी पक्ष सहित सभी इस बारे में जानते हैं।'


विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष 2003 तक एलएसी को स्पष्ट करने और पुष्टि करने की कवायद में लगे थे, लेकिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि चीनी ने इच्छा ही नहीं दिखाई। इसलिए अब चीन इस बात पर अड़ा है कि केवल एक एलएसी उनके द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के विपरीत है। भारत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष पूरी ईमानदारी और विश्वासपूर्वक सभी समझौतों और समझ का पालन करेगा और एलएसी की एकतरफा व्याख्या को आगे बढ़ने से चीन को बचना चाहिए।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी 1959 में चीन की ओर एलएसी की एकतरफा दी गई परिभाषा को स्वीकार नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1993, 1996 और 2005 में चीन के साथ दोपक्षीय बातचीत में सहमति बनी थी कि एलएसी पर दोनों देशों के बीच जिन बिन्दुओं पर गतिरोध है उसे बातचीत के रास्ते सुलझाते रहेंगे और किसी तरह की एकतरफा कार्रवाई से बचेंगे।

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