Chardham Yatra 2020: आज से शुरू हो रही है चारधाम यात्रा, फिलहाल उत्तराखंड के लोगों को ही इजाजत

chardham yatra starts from today: कोरोना महामारी की वजह से रूकी हुई चारधाम यात्रा आज से शुरू हो रही है। लेकिन अभी उत्तराखंड के लोगों को ही यात्रा की इजाजत दी गई है।

1 जुलाई से चारधाम यात्रा, फिलहाल उत्तराखंड के लोगों को ही इजाजत
आज से चारधाम यात्रा शुरू 

मुख्य बातें

  • आज से चारधाम यात्रा हो रही है शुरू, फिलहाल उत्तराखंड के लोगों को अनुमति
  • 65 साल से अधिकऔर 10 साल से कम उम्र के लोगों को यात्रा की इजाजत नहीं
  • तीर्थ पुरोहितों कर रहे हैं विरोध, व्यवस्था की कमी का दिया हवाला

देहरादून। बुधवार से चारधाम यात्रा को इजाजत दे दी गई है। लेकिन इस यात्रा में अभी उत्तराखंड के लोग ही शामिल हो सकेंगे। देवस्थानम मैनेजमेंट बोर्ड ने 1 जुलाई से ही 'चारधाम यात्रा' शुरू करने का फैसला लिया। सोमवार को बैठक में तय किया गया कि कोरोना महामारी को देखते हुए दूसरे राज्यों केश्रद्धालुओं को अनुमति नहीं देनी चाहिए। यहां यह समझना जरूरी है कि चार धामों बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा 'चारधाम' यात्रा  के नाम से जाना जाता है। ।

सोमवार को जारी हुआ था आदेश
सीईओ रविनाथ रमण ने चारधाम यात्रा के संदर्भ में सोमवार को एक आदेश जारी किया था। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड के लोग ही यात्रा का हिस्सा बनेंगे और उन्हें भी तमाम तरह के ऐहतियात बरतने होंगे। जो लोग यात्रा पर जाने के इच्छुक हैं उन्हें कुछ सावधानियों के साथ साथ पाबंदियों का भी पालन करना होगा। मंदिरों में सीमित संख्या में ही लोग दर्शन कर सकेंगे।

   

बोर्ड की वेबसाइट पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन
श्रद्धालुओं को उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पंजीकरण के आधार पर  ई-पास जारी किया जाएगा। चारों धामों में श्रद्धालु को एक रात से ज्यादा रुकने की अनुमति नहीं होगी। इस नियम का भी सख्ती से पालन कराया जाएगा। बड़ी बात यह है कि 65 साल से ज्यादा और 10 साल से कम उम्र के बच्चों को पास जारी नहीं होगा। इसके साथ गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी यात्रा की अनुमति नहीं होगी। कंटेनमेंट जोन में रहने वाले लोगों और क्वारंटीन किए गए लोगों को भी यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

तीर्थ पुरोहित कर रहे हैं विरोध
तीर्थ पुरोहित 1 जुलाई से यात्रा शुरू किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि चारों धामों में श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बोर्ड को इजाजत नहीं देनी चाहिए थी। बोर्ड को व्यवहारिक परेशानियों पर ध्यान देना चाहिये। सिर्फ वाहवाही बटोरने के लिए इस तरह के कदम नहीं उठाना चाहिए था। 

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