भारत के लिए क्यों अहम है चंद्रयान-3 मिशन, सफलता से मिलेगी इसरो के अभियानों को पंख

चंद्रयान-3 की सफलता दूसरे ग्रहों के लिए इसरो के मिशन का आधार बनेगी। सिवन का कहना है कि इस मिशन के बाद मानवरहित मिशन की शुरुआत होगी। एजेंसी का उद्देश्य दिसंबर में गगनयान के मानवरहित मिशन को लॉन्च करने की है।

Chandrayaan-3 is critical for ISRO it will give boost to interplanetary missions
भारत के लिए काफी अहम है चंद्रयान-3 मिशन की सफलता। तस्वीर-इसरो। 

मुख्य बातें

  • साल 2019 मे लॉन्च हुआ था चंद्रयान-2 लेकिन लैंडिंग से पहले यह क्रैश हो गया
  • कोरोना महामारी की वजह से इसरो के चंद्रयान-3 मिशन में हुई है देरी
  • चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर आज भी सफलता पूर्वक अपना काम कर रहा है

नई दिल्ली : भारत का महात्वाकांक्षी चंद्र मिशन चंद्रयान-3 अब 2022 में रवाना होगा। पहले इस मिशन की रवानगी 2021 में होनी थी लेकिन कोरोना संकट के चलते इस अभियान में देरी हुई।  कोरोना महामारी ने चंद्रयान-3 सहित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) के कई अन्य परियोजनाओं को प्रभावित किया है। देश के लिए चंद्रयान-3 मिशन को काफी अहम माना जा रहा है। इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए इसरो के चेयरमैन के सिवन ने सोमवार को कहा कि इस मिशन को 2022 में लॉन्च किया जा सकता है और इसमें चंद्रयान-2 की तरह ऑर्बिटर नहीं होगा। 

चंद्रयान-3 में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का होगा इस्तेमाल
उन्होंने कहा, 'हम इस पर काम कर रहे हैं। चंद्रयान-3 की बनावट भी चंद्रयान-2 की तरह होगी लेकिन इसमें ऑर्बिटर नहीं होगा। चंद्रयान-2 में जिस ऑर्बिटर का इस्तेमाल हुआ, उसका उपयोग चंद्रयान-3 में किया जाएगा। इसे ध्यान में रखते हुए हम एक सिस्टम पर काम कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं इस मिशन को 2022 में लॉन्च कर दिया जाएगा।' इसके पहले इसरो के प्रमुख ने कहा था कि चंद्रयान-3 को चंद्रमा पर उसी जगह लैंड कराने की योजना बन रही है जहां पर चंद्रयान-2 की असफल लैंडिंग हुई थी। बता दें कि चंद्रमा पर अपनी लैंडिंग से चंद सेकेंड पहले चंद्रयान-2 का पृथ्वी से संपर्क टूट गया और इसकी क्रैश लैंडिंग हुई। 

लैंडिंग से चंद सेकेंड पहले चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग हुई थी
इसरो की योजना चंद्रयान-2 के रोवर को चंद्रमा के दक्षिणी पोल उतारने की थी। इसके लिए इस मिशन को 22 जुलाई को लॉन्च किया गया। सात सिंतबर को चंद्रयान-2 का लैंडर चंद्रमा की सतह से जब कुछ सेकेंड की दूरी पर था तो उसकी क्रैश लैंडिंग हो गई। विक्रम की लैंडिंग यदि सफलतापूर्वक हो गई होती तो भारत अपने पहले प्रयास में ऐसा करना वाला दुनिया का पहले देश बन गया होता। चंद्रयान-2 की असफलता को पीछे छोड़ इसरो अपने अगले मिशन की सफलता के लिए दिन रात काम कर रहा है। इसरो के लिए चंद्रयान मिशन काफी महत्वपूर्ण है।    

गगनयान मिशन की तैयारी में है भारत
चंद्रयान-3 की सफलता दूसरे ग्रहों के लिए इसरो के मिशन का आधार बनेगी। सिवन का कहना है कि इस मिशन के बाद मानवरहित मिशन की शुरुआत होगी। एजेंसी का उद्देश्य दिसंबर में गगनयान के मानवरहित मिशन को लॉन्च करने की है। गगनयान मिशन के तहत साल 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इस मिशन के लिए चयनति चार पायलटों को रूस में प्रशिक्षित किया जा रहा है। गगनयान के तीसरे मॉड्यूल मानव मिशन के बारे में सिवन ने कहा, 'इसके लिए बहुत सारी तकनीकी को परखे जाने की जरूरत है। इसके बारे में हम बाद में फैसला करेंगे।'

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