UP: 75 दिनों तक मुर्दाघर में पड़ा रहा शव, महिला का आरोप- शव देने के लिए मांगे थे 15000

Meerut News: उत्तर प्रदेश से सामने आए एक चौंकाने वाले मामले में एक कोविड​​-19 रोगी के शव का उसकी मृत्यु के ढाई महीने से अधिक समय बाद अंतिम संस्कार किया गया।

Dead body
मेरठ की है ये खबर 

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश से एक परेशान कर देने वाली खबर आई है। 28 साल के व्यक्ति ढाई महीने पहले मेरठ के एक अस्पताल में कोविड​​-19 के कारण मौत हो गई थी, लेकिन उसका अंतिम संस्कार हापुड़ प्रशासन द्वारा अब किया गया है। मृतक की पत्नी ने कथित तौर पर कहा कि डॉक्टरों ने उसके पति के शव को देने के लिए 15,000 रुपए की मांग की, लेकिन वह पैसे नहीं दे सकी। शव को मुर्दाघर में रखा गया था। शुक्रवार को अंतिम संस्कार करने से पहले शव 75 दिनों तक रहा यहां रहा।

पत्नी को नहीं सौंपा शव!

नरेश जो कि अब मृतक है उसे 10 अप्रैल को कोरोना वायरस होने का पता चला था। इसके बाद उसे इलाज के लिए हापुड़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे मेरठ के लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां 15 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उसकी पत्नी (27) ने दो बच्चों के साथ उनका पार्थिव शरीर लेने के लिए बस्ती से मेरठ तक 700 किमी लंबी यात्रा की। अस्पताल के डॉक्टरों ने कथित तौर पर शव सौंपने के लिए 15,000 रुपए की मांग की। महिला ने कहा, 'लेकिन वहां के डॉक्टरों ने मना कर दिया, 15,000 रुपए मांगे और कहा कि अगर आपने भुगतान नहीं किया तो वे खुद शव का अंतिम संस्कार करेंगे। मेरे पास पैसा नहीं था। मैं क्या कर सकती थी? मैं वापस चली गई।'

हालांकि अस्पताल ने मृतक की पत्नी के आरोपों को खारिज किया है। मेरठ के अस्पताल में शवों के निस्तारण की देखभाल करने वाले डॉ. विदित दीक्षित ने कहा कि शव को छोड़ने के लिए पैसे की मांग करने का आरोप सही नहीं है। दीक्षित ने कहा कि जब किसी ने कोविड​​-19 पीड़ित के शव पर दावा नहीं किया, तो उसे हापुड़ भेज दिया गया क्योंकि अस्पताल में वायरस की महामारी की दूसरी लहर के दौरान उच्च मृत्यु दर के बीच इसे रखने के लिए जगह नहीं थी।

पत्नी के दावे पर सवाल

हापुड़ में पीएचसी प्रमुख डॉ दिनेश खत्री ने कहा कि तब से मृतक के परिवार का पता लगाने के प्रयास चल रहे थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सूचित किया गया कि किसी ने भी शव पर दावा नहीं किया है और इसे यहां लाया गया और जीएस कॉलेज के मुर्दाघर में रखा गया। उसके बाद हमने परिवार का पता लगाने की कोशिश की। बाद में हमने पुलिस से मदद मांगी और जो फोन नंबर दिया गया था उसे निगरानी में रखा गया था।

जांच के आदेश

इस बीच, बस्ती लौट आई विधवा ने मान लिया था कि उसके पति के शव का अंतिम संस्कार किया गया होगा। हाल ही में कुछ पुलिसकर्मियों ने उससे संपर्क किया, जिसके बाद वह हापुड़ आई और पति की मृत्यु के ढाई महीने बाद शुक्रवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मेरठ के जिलाधिकारी के बालाजी ने मृतक मरीज की पत्नी द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोप की जांच के आदेश दिए हैं।

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