भाजपा राज्य सभा चुनाव से साध रही है कई समीकरण, जानें रणनीति

Rajya Sabha 2022 Election BJP List: भाजपा के लिए 2023 में होने वाले राजस्थान और मध्य प्रदेश के विधान सभा चुनाव बेहद अहम हैं और उसकी छाप उनकी राज्य सभा की लिस्ट में भी दिखती है।

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भाजपा अध्यक्ष जे.पी.नड्डा   |  तस्वीर साभार: BCCL
मुख्य बातें
  • भाजपा राज्य सभा उम्मीदवारों के जरिए 2024 पर भी निशाना साध रही है।
  • सोशल इंजीनियरिंग के जरिए ओबीसी और दलित वोटर को लुभाने की कोशिश है।
  • अतिरिक्त उम्मीदवार उतार कर कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है।

Rajya Sabha 2022 Election BJP List: राज्य सभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई है और अब 10 जून को होने वाली वोटिंग का इंतजार है। नामांकन की आखिरी तारीख खत्म होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के जैसे प्रमुख दलों की रणनीति भी साफ हो गई है। अगर भाजपा के उम्मीदवारों के चयन को देखा जाय तो उसने जहां स्थानीय नेताओं को तरजीह दी है। वहीं उसके निशाने पर 2024 के लोक सभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। और इसके लिए उसने एक बार फिर अपने हिट फॉर्मूले सोशल इंजीनियरिंग को अपनाया है। जिसमें दलित, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को खास तौर से तवज्जो दी गई है।

क्या है भाजपा की प्लानिंग

भाजपा ने जिन 22 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, उसमें ओबीसी उम्मीदवारों को खास तौर से तवज्जो मिली है। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने 6 उम्मीदवार ओबीसी कैटेगरी से उतारे हैं। जिसमें सुरेंद्र सिंह नागर,मिथिलेश कुमार, बाबूराम निषाद, के लक्ष्मण,दर्शन सिंह,और संगीता यादव का नाम शामिल हैं। इसी तरह बिहार से शंभू शरण पटेल को मौका दिया गया है। और बिहार के पड़ोसी राज्य  झारखंड में ओबीसी नेता आदित्य साहू को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।

इसी  तरह उत्तराखंड से कल्पना सैनी को मैदान में उतारा है। जबकि मध्य प्रदेश से कविता पाटीदार को मौका दिया है। जो निर्विरोध विजयी भी घोषित हो गई हैं।  वहीं महाराष्ट्र से ओबीसी उम्मीदवार के रूप में अनिल सुखदेवराव बोंडे मैदान में हैं। सवर्ण वोटरों को साधने के लिए पार्टी ने प्रमुख रुप से यूपी से लक्ष्मीकांत बाजपेयी और डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल और राजस्थान से घनश्याम तिवाड़ी को टिकट दिया है। इसी तरह हरियाणा से दलित नेता कृष्ण पाल तंवर को टिकट दिया गया है।

6 महिलाओं को टिकट

ओबीसी उम्मीदवार के साथ-साथ भाजपा ने महिलाओं को भी लुभाने की कोशिश की है। मसलन मध्य प्रदेश से उसने कविता पाटीदार और सुनीता बाल्मिकी को मैदान में उतारा है। 2023 के चुनावों को देखते हुए एक तरफ महिलाओं को लुभाया गया है। वहीं ओबीसी और दलित वोट भी साधे गए हैं। कविता पाटीदार की तरह सुनीत बाल्मिकी भी निर्विरोध चुनाव जीत गई है। इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उत्तराखंड से कल्पना सैनी और यूपी से संगीता यादव महिला उम्मीदवार के रुप में हैं।

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सोशल इंजीनियरिंग हिट दांव

असल में भाजपा ने जिस तरह उत्तर प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग के जरिए सत्ता में दोबारा वापसी की है, वह उसी हिट फॉर्मूले को राज्य सभा चुनाव में अपना रही है। खास तौर से उसके लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्य सभा चुनाव बेहद अहम हैं। क्योंकि इन दोनों राज्यों में 2023 में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। और वह किसी तरह का कोई मौका नहीं खोना चाहती है। उसे उम्मीद है कि ओबीसी, दलित और महिला उम्मीदवारों को तरजीह देकर विधान सभा चुनाव की राह आसान हो सकती है। और इसका फायदा 2024 के लोकसभा चुनावों में भी मिल सकता है।

भाजपा ने कांग्रेस का फंसाया पेंच

भाजपा इन चुनावों में अपने जातिगत समीकरण साधने के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन कर कांग्रेस ने मुश्किलें खड़ी कर दी है। इसके लिए उन दो निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन की घोषणा कर दी है। तथा महाराष्ट्र, कर्नाटक में अतिरक्त उम्मीदवार उतार, हर सीट के लिए चुनौती खड़ कर दी है।  भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में राजस्थान से सुभाष चंद्रा और हरियाणा से कार्तिकेय शर्मा का समर्थन कर दिया है। ऐसे में इन चुनावों रोचक नतीजे देखने को मिल सकते हैं।
 

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