सबरीमला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास रचने वाली बिंदु अम्‍म‍िनी पर हमला, दो बार हो चुका है अटैक

केरल के सबरीमला मंदिर में भारी विरोध के बावजूद 2019 में प्रवेश करने वाली कार्यकर्ता बिंदु अम्मिनी पर दूसरी बार हमला हुआ है। वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 10-50 साल के आयु वर्ग में इस मंदिर में प्रवेश करने वाली पहली महिला हैं।

सबरीमला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास रचने वाली बिंदु अम्‍म‍िनी पर हमला
सबरीमला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास रचने वाली बिंदु अम्‍म‍िनी पर हमला (फाइल फोटो)  |  तस्वीर साभार: PTI

कोझिकोड : केरल के सबरीमला मंदिर में 10 से 50 साल के आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर इतिहास बनाने वालीं बिंदू अम्मिनी पर एक बार फिर हमला हुआ है। बिंदू अम्मिनी 10 साल से अधिक और 50 साल से कम उम्र की पहली महिला हैं, जिन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारी विरोध के बावजूद 2019 में सबरीमला मंदिर में प्रवेश किया था और वहां प्रार्थना भी की थी। उन पर बुधवार को कोझीकोड समुद्र तट पर एक अज्ञात व्यक्ति ने हमला किया।

दलित कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब वह एक अदालती मामले के सिलसिले में कोझीकोड उत्तरी समुद्र तट पर पहुंचीं तो उन पर अज्ञात व्यक्ति ने हमला किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें अम्मिनी पर उस व्यक्ति को हमला करते देखा जा सकता है। कार्यकर्ता का आरोप है कि उन पर बिना किसी उकसावे के हमला किया गया है। उन्‍होंने घटना की शिकायत पुलिस में दी है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दिए जाने की बात कही है।

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बिंदू अम्मिनी पर पहले भी हो चुका है हमला

बिंदू अम्मिनी पर यह हमले की दूसरी घटना है। इससे पहले दो अज्ञात लोगों ने महिला कार्यकर्ता पर एक बस में हमला किया था। हमलावरों ने उनके चेहरे पर चिली-पेपर स्‍प्रे किया था।

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यहां उल्‍लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में एक फैसले के तहत सभी आयुवर्ग की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में पूजा की अनुमति दी थी। इसके बाद भी हालांकि मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश आसान नहीं हो पाया। भारी विरोध के बीच दो महिलाओं ने 2019 में सबरीमला मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की थी, जिनमें अम्मिनी भी शामिल रही थीं। ये 10 से 50 साल के आयुवर्ग की महिलाओं में शामिल थीं।

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अम्मिनी और कनक दुर्गा के मंदिर में प्रवेश के बाद पूरे केरल में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुआ था, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने केरल सरकार को दोनों महिलाओं को उचित व पर्याप्‍त सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश भी दिए थे।

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