Bihar : ग्रामीण बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत खास्ता, स्वास्थ्य केंद्र में लोग बांध रहे मवेशी, Video

मधुबनी के ही सुक्की गांव का सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की हालत तो और भी बुरी है। यहां स्वास्थ्य केंद्र पिछले 30 सालों से चल रहा है लेकिन अभी यहां किसी डॉक्टर और नर्स की तैनाती नहीं है।

Bihar's Madhubani deals with COVID-19 amid almost non-existent healthcare facilities
ग्रामीण बिहार में स्वास्थ्य सुविधाएं की हालत खास्ता।  |  तस्वीर साभार: ANI

पटना : कोरोना संकट के दौर में बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही की वजह से स्वास्थ्य केंद्रों पर एंबुलेंस जर्जर हो गए हैं और उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। एक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर और नर्स की तैनाती नहीं है। चिकित्सा केंद्र पर लोग अपने मवेशियों को पालने लगे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा के अभाव के चलते लोग दूसरे सरकारी एवं निजी अस्पतालों में अपना इलाज कराने के लिए मजबूर हैं।   

रखरखाव के अभाव में जर्जर हुईं एंबुलेंस 
मधुबनी के सदर अस्पताल की हालत जर्जर हो चुकी है। यहां पांच से छह एंबुलेंस रखरखाव के अभाव में सड़ गई हैं। खास बात ये है कि ये सभी एंबुलेंस आधुनिक सुविधाओं से लैसे थीं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से ये सभी कबाड़ में तब्दील हो गई हैं। जाहिर है कि ये तस्वीरें बताती हैं कि ग्रामीण बिहार में स्वास्थ्य सुविधाएं किस तरह से चरमरा गई हैं। इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।  

गांव के अस्पताल में डॉक्टर और नर्स नहीं
मधुबनी जिले के ही सुक्की गांव का सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की हालत तो और भी बुरी है। यहां स्वास्थ्य केंद्र पिछले 30 सालों से चल रहा है लेकिन अभी यहां किसी डॉक्टर और नर्स की तैनाती नहीं है। यहां के स्वास्थ्य केंद्र में गांव के लोग अपनी गायों को पालन करते हैं। स्वास्थ्य केंद्र के चारों तरफ गंदगी फैली हुई है और घास उगी हुई है। एक ग्रामीण का कहना है कि पिछले एक साल से यहां कोई भी डॉक्टर या नर्स नहीं आए हैं। गांव के लोग खजौली जाकर अपना इलाज कराते हैं। 

केवल झंडा फहराने आते हैं अस्पताल के कर्मी
स्थानीय निवासी मोहम्मद कयून का कहना है, 'यह अस्पताल केवल सरकार के दस्तावेजों में चल रहा है। पिछले 25 साल से यहां कोई उपचार नहीं हो रहा है। यहां तक कि डॉक्टरों, नर्स और अन्य कर्मियों की तैनाती केवल कागजों पर हुई है। वे कभी यहां नहीं आते। इस चिकित्सा केंद्र के कर्मी 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन झंडा फहराने के लिए आते है।' कयून का कहना है कि इस बारे में कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई है लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला है।

स्वास्थ्य अधिकारी ने दिया जवाब
सदर अस्पताल में भर्ती एक मरीज के परिजन ने कहा कि यहां सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता। अस्पताल का परिसर पूरी तरह गंदा है। वहीं, अस्पताल के प्रभारी डॉ. डीएस मिश्रा ने समाचार एजेंसी एएनआई से फोन पर कहा कि यहां कोविड-19 समर्पित केंद्र को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। मधुबनी जिले के सिविल सर्जन स्वास्थ्य सुविधाओं पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। बिहार के स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में कोरोना के अभी 40,692 एक्टिव केस हैं। राज्य में इस महामारी से अब तक 4,549 लोगों की मौत हो चुकी है। जबिक कोरोना केस की संख्या 6,44,335 है।   

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