JDU-BJP के बीच सीटों का बंटवारा, जेडीयू को 122 तो बीजेपी के हिस्से में आईं 121 सीटें

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 6, 2020, 05:28 PM IST

Jdu-BJP Alliance: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू और बीजेपी के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीटों का ऐलान किया।

JDU-BJP के बीच सीटों का बंटवारा, जेडीयू को 122 तो बीजेपी के हिस्से में आईं 121 सीटें

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए जेडीयू और बीजेपी के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है। जेडीयू ने 122 सीटें अपने पास रखी हैं, जबकि बीजेपी के हिस्से में 121 सीटें आई हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि जेडीयू अपने हिस्से से 7 सीटें हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (HAM) को देगी, जबकि बीजेपी विकासशील इंसान पार्टी को अपने हिस्से से सीटें देगी। इसका मतलब हुआ कि जेडीयू 243 सीटों में से 115 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।  

वहीं इससे पहले भाजपा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता हैं और उन्हीं के नेतृत्व में बिहार में गठबंधन आगे बढ़ रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा, 'भाजपा बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व को पूरी तरह से स्वीकार करती है । राजग गठबंधन में वही रहेगा जो नीतीश कुमार के नेतृत्व को बिहार में स्वीकर करेगा।'

जायसवाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रविवार को लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) ने स्पष्ट कर दिया था कि वह बिहार में विधानसभा चुनाव जदयू के साथ नहीं लड़ेगी। लोजपा नेता चिराग पासवान ने कहा था कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में नहीं लड़ेगी। चिराग ने साथ ही यह भी कहा था कि लोजपा की भाजपा से कोई कटुता नहीं है और बिहार चुनाव के बाद भाजपा के साथ लोजपा खड़ी रहेगी। 

चिराग का नीतीश पर निशाना

एनडीए से अलग हुए चिराग पासवान ने जेडीयू और नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार राज्य के इतिहास का ये बड़ा निर्णायक क्षण है। करोड़ों बिहारियों के जीवन मरण का प्रश्न है क्योंकि अब हमारे पास खोने के लिए और समय नहीं है। जेडीयू के प्रत्याशी को दिया गया एक भी वोट कल आपके बच्चे को पलायन करने पर मजबूर करेगा। पासवान ने कहा कि हमें आज के मौजूदा मुख्यमंत्री से उम्मीदें बहुत थी। अगर आप उनका कार्यकाल देखें तो मुझे नहीं लगता कि जितनी उम्मीदें एक बिहारी होने के नाते और बिहार की जनता को उनसे थीं वो उनपर खरा उतर पाए हैं। अगर आप मूलभूत जरूरतों की बात करते हैं तो आज भी वो धरातल पर उतरती नहीं दिखती।

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