आम की मिठास से दूर होगी TMC-भाजपा के रिश्तों की खटास! ममता ने PM मोदी को भेजे आम

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 1, 2021, 11:11 AM IST

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश भर में अपनी स्वाद के लिए मशहूर आमों को प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं के लिए भेजा है। ममता साल 2011 से नेताओं को राज्य के आम भेजती रही हैं।

आम की मिठास से दूर होगी TMC-भाजपा के रिश्तों की खटास! ममता ने PM मोदी को भेजे आम
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नई दिल्ली : बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बदली-बदली नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री बनर्जी ने पीएम मोदी के लिए बंगाल के स्वादिष्ट आम भेजे हैं। राजनीतिक कड़वाहट दूर करने के लिए नेताओं की तरफ से आम भेजने की एक परंपरा रही है। बंगाल चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री और ममता के बीच जुबानी जंग काफी तेज रही और दोनों ने एक-दूसरे पर जमकर हमले किए। चुनाव के बाद बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंधोपाध्याय के मसले पर भी केंद्र और बंगाल सरकार के बीच गंभीर टकराव देखने को मिला।  

कई दलों के नेताओं को भी भेजे आम
रिपोर्टों के मुताबिक अब पीएम को आम भेजकर ममता ने इस राजनीतिक कड़वाहट को दूर करने की एक कोशिश की है। ममता बनर्जी की ओर से प्रधानमंत्री के लिए हिमसागर, मालदा और लक्ष्मनभोग आम भेजे गए हैं। पीएम के अलावा ममता की तरफ से इन आमों की टोकरी  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी भेजी गई है। 

भाजपा और टीएमसी के बीच जारी है तनातनी
बंगाल की सीएम की ओर से सत्तारूढ़ दल के नेताओं को आम भेजने के बाद भाजपा और टीएमसी के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट कितनी कम होती है यह देखने वाली बात होगी। बंगाल चुनाव के बाद राज्य की राजनीतिक हिंसा और नारदा घोटाले को लेकर दोनों ही पार्टियां एक दूसरे पर हमलावर एवं आक्रामक हैं। कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश पर चुनाव के बाद की हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच की है। एनएचआरसी ने अपनी यह रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है। संसद के मानसून संत्र में बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर भाजपा टीएमसी को घेरने की कोशिश कर सकती है। 

2011 से आम भेजती रही हैं ममता
राजनीतिक मतभेदों के बावजूद ममता ने सियासी दलों के नेताओं को आम भेजकर एक 'सद्भावना' का परिचय दिया है। ममता साल 20111 से की ओर से आम भेजने की परंपरा निभा रही हैं।  

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