बाल गंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद की जयंती आज, पीएम मोदी, गृह मंत्री ने दी श्रद्धांजलि

Bal Gangadhar Tilak, Chandra Shekhar Azad Jayanti: स्‍वतंत्रता संग्राम के पुरोधाओं बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की आज जयंती है। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने उन्‍हें श्रद्धांजलि दी है।

बाल गंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद की जयंती आज, पीएम मोदी, गृह मंत्री ने दी श्रद्धांजलि
बाल गंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद की जयंती आज, पीएम मोदी, गृह मंत्री ने दी श्रद्धांजलि 

मुख्य बातें

  • लोकमान्‍य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की आज जयंती है
  • पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर उन्‍हें श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं
  • तिलक और आजाद का स्‍वतंत्रता संग्राम में अमूल्‍य योगदान रहा

नई दिल्‍ली : 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा', यह नारा देकर लाखों लोगों को जोश व उत्‍साह से भर देने वाले बाल गंगाधर तिलक की आज (23 जुलाई) जयंती है। उनका जन्‍म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र में रत्नागिरी जिले के गांव चिखली में हुआ था। उनकी गिनती ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसे पहले और मजबूत पैरोकारों में होती है। राष्ट्र के प्रखर नेता, शिक्षक, समाज सुधारक और वकील बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लोकप्रिय नेताओं में रहे। आज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक कहे जाने वाले शहीद चंद्रशेखर आजाद की भी जयंती है। उनकी जयंती पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्‍य नेताओं ने भी उन्‍हें श्रद्धांजल‍ि दी है।

पीएम ने किया ट्वीट

पीएम मोद ने ट्वीट कर बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को नमन किया। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा, 'भारत मां के दो वीर सपूत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को उनकी जन्म-जयंती पर शत-शत नमन।'

अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्‍हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया, 'लोकमान्य तिलक जी ने स्वदेशी का उपयोग, शिक्षा और स्वराज जैसे महत्वपूर्ण विषयों को आधार बनाया। उनका आदर्शपूर्ण जीवन, संघर्ष और देशप्रेम आज भी सभी भारतीयों के मन में राष्ट्रवाद की भावना जागृत करता है। ऐसे स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।'

चंद्रशेखर आजाद को नमन

चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्‍होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'चंद्रशेखर आजाद जी से अंग्रेजी हुकूमत थर-थर कांपती थी, उन्होंने कहा था कि 'मैं आजाद था, आजाद हूं, आजाद रहूंगा और वो सच में अपनी अंतिम सांसों तक आजाद रहे। उनके राष्ट्रप्रेम ने देश के लाखों युवाओं के हृदय में स्वाधीनता की लौ जलाई। ऐसे अमर बलिदानी के चरणों में कोटि-कोटि वंदन।'

स्‍वतंत्रता संग्राम में अमूल्‍य योगदान

यहां उल्‍लेखनीय है कि चंद्रशेखर आजाद का जन्‍म 23 जुलाई 1906 को मध्‍य प्रदेश के झाबुआ जिले में हुआ था। 15 साल की उम्र में ही उन्‍होंने असहयोग आंदोलन में हिस्‍सा लिया था। इसके बाद से राष्ट्र भक्त चंद्रशेखर आजाद ने स्वतंत्रता संग्राम में उतरने का फैसला किया। बनारस में पढ़ाई के दौरान उन्हें मन्मथनाथ गुप्ता, शचीन्द्रनाथ सान्याल, बटुकेश्वर दत्त, भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, बिस्मिल, अशफाक, जयदेव जैसे क्रांतिकारियों का साथ मिला। उनका निधन 27 फरवरी, 1931 को उत्‍तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ।

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