क्या आयशा की मौत बनेगी बड़े बदलाव का कारण? नेताओं से लेकर मुस्लिम संगठनों तक ने की समाज से ये मांग

देश
लव रघुवंशी
Updated Mar 09, 2021 | 17:30 IST

Ayesha suicide case: अहमदाबाद में दहेज प्रताड़ना को लेकर आत्महत्या करने वाली आयशा की मौत को लेकर मुस्लिम समाज में चिंता बढ़ गई है। मुसलमानों से दहेज को लेकर आवाज उठाने की अपील की गई है।

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फाइल फोटो 

मुख्य बातें

  • आयशा ने साबरमती नदी में कूदकर जान दे दी थी
  • सुसाइड लेटर में आयशा ने बताया कि कैसे पति ने किया था उसे टॉर्चर
  • साबरमती नदी में कूदने से पहले आयशा ने बनाया था वीडियो

नई दिल्ली: हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी में 23 साल की आयशा ने कूदकर अपनी जान दे दी। उसके पति पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। साबरमती नदी में कूदने से पहले आयशा ने वीडियो बनाया। इस पूरे मामले ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। आयशा की आत्महत्या के बाद दहेज को लेकर लोगों की चिंता एक बार फिर सामने आई है। कई मुस्लिम संगठनों से लेकर नेताओं तक ने दहेज के खिलाफ लोगों से आग्रह किया है। अब सवाल है कि क्या आयशा की ये कुर्बानी किसी बड़े बदलाव का कारण बनेगी?

आयशा की मौत पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने चिंता जाहिर करते हुए इस सिलसिले में सभी मस्जिदों के इमामों से जागरूकता फैलाने की अपील की। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि कुछ दिन पहले गुजरात के अहमदाबाद में कथित रूप से दहेज प्रताड़ना से परेशान आयशा आरिफ खान नामक विवाहिता ने साबरमती नदी में कूदकर जिस तरह खुदकुशी की, उसने पूरे मुस्लिम समाज को चिंता में डाल दिया है।

'दहेज न लेने और देने का वादा करें मुसलमान'

उन्होंने कहा, 'मस्जिदों के इमामों से अपील है कि वे जुमे की नमाज से पहले किए जाने वाले खुतबे (भाषण) में निकाह के सिलसिले में लागू इस्लामी आदेशों और अल्लाह तथा रसूल द्वारा निर्धारित शौहर तथा बीवी के अधिकारों एवं कर्तव्यों के बारे में साफ तौर पर आसान भाषा में नमाजियों के सामने बयान करें। ताकि आयशा द्वारा आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं रोकी जा सकें। निकाह जैसे नेक काम के दौरान दहेज की जो मांग की जाती है वह गैर शरई और हराम है। मुसलमानों का एक समूह ऐसा है जिसमें यह गैर इस्लामी और गैर इंसानी रिवाज कायम है।' उन्होंने अपील की कि तमाम मुसलमान इस बात का वादा करें कि वह अपने बच्चों की शादियों में ना तो दहेज लेंगे और ना ही देंगे तभी लोगों को इस बड़े जुर्म से छुटकारा मिलेगा। 

ओवैसी की बात की हुई खूब तारीफ

इस पर एआईएमआईएएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दहेज के लालच को खत्म करनो, बीबी पर जुल्म करना मर्दानगी नहीं है। उनका ये वीडियो खूब वायरल हुआ और लोगों ने इसकी जमकर तारीफ की। इस वीडियो में ओवैसी ने कहा, 'अहमदाबाद में जो मुसलमान बच्ची का दर्दनाक वीडियो आया है जिसने खुदकुशी कर ली। मैं आप तमाम से अपील कर रहा हूं चाहे आप कोई भी मजहब से हों दहेज की लालच को खत्म करो। अगर तुम मर्द हो तो बीवी पर जुल्म करना मर्दानगी नहीं है। बीवी को मारना मर्दानगी नहीं है। बीवी से पैसों मुतालबा (मांग) करना मर्दानगी नहीं है। तुम मर्द कहलाने के लायक नहीं हो अगर ऐसी हरकत करोगे। वो मासूम बच्ची पर जुल्म किया गया। वो तंग आ गई, दहेज की मांग से। उस व्यक्ति के मारने और पीटने पर इतना बड़ा इकदाम (कदम) कर लिया। शर्म आना चाहिए उन लोगों को जिसने इस बेटी ऐसा करने के लिए मजबूर किया। मैं अल्लाह से दुआ करूंगा कि अल्लाह तुमको गारत (बर्बाद) करे।' 

'जो बीबी से अच्छा बर्ताव करे उसका चरित्र अच्छा'

वे आगे कहते कि हर बाप की तकलीफ तुम नहीं समझ सकते, अगर कोई बाप कब्र में जाता है। मैं कई ऐसे बाप को जानता हूं जो जिंदगी की आखिरी सासें लेते और मेरा हाथ पकड़कर कहते हैं असद साहब बच्ची की शादी है कुछ इंतजाम करवा दो। मरने से पहले कुछ हो जाए। क्या हो रहा है इन लोगों को, कितनी औरतों को तुम मारोगे। कैसे तुम मर्द हो जो तुम बच्चियों को मार रहे हो, उनकी जानें ले रहे हो। क्या तुम में इंसानियत मर चुकी है? ऐसे कितने लोग हैं जो अपनी बीवियों पर जुल्म करते हैं, थप्पड़ मारते हैं। दहेज का मुतालबा करते हैं। हामेला (प्रेग्नेंट) बीवियों को धकेलते हैं और बाहर निकल कर अपने आप को बड़ा फरिश्ता कहलाते हैं। अरे तुम याद रखो दुनिया को धोखा दे सकते हो अल्लाह को नहीं। अल्लाह देख रहा है, अल्लाह समझ रहा है और अल्लाह जरूर मजलूम (पीड़ित) का साथ देगा। अल्ला मजलूम का साथ देगा। मैं उन मुसलमानों से अपील कर रहा हूं, अल्ला के रसूल ने फरमाया था कि तुम में सबसे बेहतरीन वो है जो अपने घर वालों से अच्छा है। बेहतरीन अखलाक (चरित्र) उसके हैं जो अपनी बीबियों से अच्छा बर्ताव करेगा। 

दहेज न लेने और देने की अपील

आगरा के मुस्लिम संगठनों ने भी लोगों से मुस्लिम विवाह में दहेज का आदान-प्रदान रोकने का आग्रह किया। अखिल भारतीय जमीयतुल कुरेश के जिला प्रमुख सरीफ कुरैशी ने कहा कि आयशा द्वारा आत्महत्या करने के बाद हमने मुसलमानों से दहेज लेने या न देने की अपील की है। दहेज एक आपराधिक कृत्य है और शरिया कानून में भी निषिद्ध है। 

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