Firecrackers:हरियाणा वाले दिवाली पर 2 घंटे जला सकेंगे पटाखे, बैन पर सीएम खट्टर का फैसला

देश
रवि वैश्य
Updated Nov 08, 2020 | 19:52 IST

Diwali firecrackers in Haryana: कोरोना वायरस महामारी और बढ़ते प्रदूषण के बीच अब हरियाणा में दिवाली के दिन 2 घंटों के लिए पटाखे बेचे जाने के साथ फोड़े जा सकते हैं।

 Haryana Diwali firecrackers
हरियाणा सरकार ने भी शुक्रवार को दिवाली पर पटाखों पर बैन लगाने का फैसला किया था 

दिल्ली और आस पास के राज्यों में बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्ली में पटाखों पर बैन लगा दिया गया है वहीं बात अगर दिल्ली के पड़ोसी राज्य की हरियाणा (Haryana) की करें तो हरियाणा सरकार ने भी शुक्रवार को दिवाली पर पटाखों पर बैन लगाने का फैसला किया था लेकिन इसमें अब कुछ संशोधन की बात कही जा रही है।

बताया जा रहा है कि खट्टर सरकार ने इस मामले पर यू टर्न लेते हुए कहा है कि राज्य के लोग अब लोग दो घंटे तक पटाखे जला सकते हैं। सीएम ने कहा कि 'हमने बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर राज्य में दिवाली के दिन पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था लेकिन हम उन लोगों के लिए 2 घंटे की छूट दे रहे हैं जो पटाखे बेचना और उन्हें फोड़ना चाहते हैं। 

दिल्ली में पटाखों पर लगा है बैन

दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए अरविंद केजरीवाल की सरकार ने ग्रीन पटाखे चलाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है,सीएम केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे कोरोना काल में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए इस बार दीपावली पर किसी भी तरह के पटाखे नहीं जलाएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में अपना योगदान दें वहीं राजस्थान, ओडिशा, दिल्ली सहित कई राज्यों ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

7 से 30 नवंबर तक पटाखे पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र और 4 राज्यों को NGT का नोटिस

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरण और वन मंत्रालय और चार राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया कि क्या लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के हित में पटाखों के उपयोग को 7-30 नवंबर से प्रतिबंधित किया जाए। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस ए के गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों से जवाब मांगा है।

ट्रिबूनल संतोष गुप्ता के माध्यम से दायर इंडियन सोशल रिस्पॉन्सिविलिटी नेटवर्क की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एनसीआर में पटाखों के उपयोग से प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, क्योंकि वायु गुणवत्ता खराब है, साथ ही कोरोना का भी प्रकोप है। 

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