'जब देश में सांप,बाघ,बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं'

देश
ललित राय
Updated Jul 24, 2021 | 23:28 IST

सीएम नीतीश कुमार के बाद पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने जातिगत आधारित जनगणना की मांग दोहराई है आखिर इसके पीछे वजह क्या है।

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जब देश में सांप,बाघ,बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं' 

मुख्य बातें

  • 1931 में पहली बार हुई थी जाति आधारित जनगणना, बाद में नहीं हुई
  • 2021 में एससी एसटी छोड़कर जाति आधारित जनगणना नहीं
  • नीतीश कुमार के बाद जीतन राम मांझी ने भी जाति आधारित जनगणना की मांग की

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एक बार जाति आधारित जनगणना की मांग की थी और उस मांग को एक बार फिर एनडीए सरकार में सहयोगी हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने दोहराई है। लेकिन उन्होंने इस समय को क्यों चुना है यह बड़ा मुद्दा है। जीतन राम मांझी कहते हैं कि जब देश में सांपस बाघ, बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं। देश के विकास के लिए जाति आधारित जनगणना जरूरी है। पता तो लगे कि किसकी कितनी आबादी है और उसे सत्ता में कितनी भागीदारी मिली है। 

बिहार के सीएम ने फिर जाति आधारित जनगणना की मांग की
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी शनिवार को जाति आधारित जनगणना की अपनी मांग की पुष्टि की और कहा कि इस कवायद से दलितों के अलावा अन्य गरीबों के लिए भी कल्याणकारी योजनाओं की योजना बनाने में मदद मिलेगी।नीतीश कुमार ने पीटीआई के हवाले से कहा, "जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार होनी चाहिए। सरकार के लिए दलितों के अलावा अन्य गरीबों की पहचान करना और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाने में मदद करना आसान होगा।"

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार विधानसभा ने 2019 और 2020 में दो बार जाति-आधारित जनगणना के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है और केंद्र सरकार से "इसके बारे में सोचने" का आग्रह किया है।"हमने 2019 और 2020 में जाति-आधारित जनगणना के पक्ष में विधानसभा में पहले ही प्रस्ताव पारित कर दिया है। हमने इसे केंद्र सरकार को भी भेजा है। हम 1990 से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार होनी चाहिए। एससी और एसटी के अलावा अन्य लोगों के विकास और कल्याण। केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।

जीतन राम मांझी का ट्वीट

सिर्फ 1931 में हुई थी जाति आधारित जनगणना
जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार दोनों की टिप्पणी केंद्र द्वारा संसद को सूचित किए जाने के कुछ दिनों बाद आई है कि वह जनगणना में एससी और एसटी के अलावा अन्य जाति के आधार पर आबादी की गणना नहीं करेगी।मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, 'सरकार ने नीति के तहत फैसला किया है कि जनगणना में एससी और एसटी के अलावा अन्य जाति के आधार पर आबादी की गणना नहीं की जाएगी।भारत में जाति की जनगणना 1931 की पिछली जनगणना के बाद से नहीं हुई है।

सोशल मीडिया ने ऐसे किया रिएक्ट
जीतन राम मांझी जी आपको भी पता है बीजेपी या कांग्रेस कभी ये कर नही सकती और आप ये गिदर भापकी दे रहे हैं ये सभी को पता है। नीतीश कुमार भी यही कर रहा है । यदि हिम्मत है और सच मुच में यदि आप करवाना चाहते है तो आप सरकार से अलग होने की घोषणा कीजिए । हैं हिम्मत ? किसे बेवकूफ बना रहे हैं।जीतन राम मांझी जी बिल्कुल सही बोले आप 7th

चरण में प्राथमिक शिक्षक बहाली का नोटीफिकेशन जल्द जारी हो और इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

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