BRICS Summit 2026 (13 सितंबर की ताजा खबरें): ब्रिक्स नेताओं के रात्रिभोज में जिनपिंग नहीं हुए शामिल, इंडोनेशिया में 240 लोगों को ले जा रहे यात्री पोत से संपर्क टूटा
आज की ताजा खबर 13 सितंबर 2026: देश-दुनिया की सभी बड़ी खबरें, पढ़ें Live Updates: भारत दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन के पहले दिन ब्रिक्स ने आम सहमति से नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दी, जो भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।
BRICS Summit 2026 (13 सितंबर की ताजा खबरें): ब्रिक्स नेताओं के रात्रिभोज में जिनपिंग नहीं हुए शामिल, इंडोनेशिया में 240 लोगों को ले जा रहे यात्री पोत से संपर्क टूटा
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन व्यस्त कार्यक्रम के बाद 'डिनर डिप्लोमेसी' देखने को मिली, जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए।
जिनपिंग क्यों नहीं हुए शामिल?
चीन के राष्ट्रपति के रात्रिभोज में शामिल नहीं होने का कारण तत्काल पता नहीं चल सका है। हालांकि, एक सूत्र ने बताया कि शी आराम करने के लिए अपने होटल लौट गए थे। जिनपिंग शनिवार की दोपहर नई दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ ही मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की।
नई दिल्ली घोषणापत्र
भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर, ब्रिक्स समूह ने शनिवार को आम सहमति से एक साझा घोषणापत्र को अपनाया। यह सहमति पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर यूएई और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने के बाद बनी। हालांकि, घोषणापत्र में ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका या ईरानी सेना द्वारा कई खाड़ी देशों पर किए गए हमले का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया।
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सऊदी पाइपलाइन पर हमले इराकी क्षेत्र से किए गए: इराक
इराक सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने ईरान की सीमा से लगे मैसान प्रांत की अभियान कमान की जांच के आदेश दिए और उसके कमांडर को पद से हटा दिया। अधिकारियों ने जांच में पाया कि सऊदी पाइपलाइन पर हमले इसी प्रांत से किए गए थे।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने हमलों के लिए इराक से आए ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वह जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को ’’आवश्यक कदम उठाने का अवसर’’ मिल सके। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से पोतों की आवाजाही बाधित होने के बाद से ’ईस्ट-वेस्ट’ पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, पाइपलाइन के अंतिम छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह से सऊदी अरब का तेल निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है।
