26/11 Terror Attacks: महाराष्ट्र के मुंबई में साल 2008 में 26 नवंबर को हुए बड़े आतंकी हमलों में मां-बाप को खो देने वाले इजराइल के मोशे होल्ट्जबर्ग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद से निपटने के रास्ते तलाशने की गुजारिश की है। मोशे का कहना है कि वह चाहते हैं कि “जो उन पर गुजरी है, वह किसी और पर न गुजरे।” समाचार एजेंसी पीटीआई को शेयर किए रिकॉर्डेड मैसेज में मोशे के परिवार की ओर से मोशे की आया सैंड्रा के साहस के बारे में बताते हुए सुना गया। वह उन्हीं की वजह से जिंदा बच पाए थे। मोशे ने कहा कि उनकी जान बचाने के लिए उसने खुद अपनी जान जोखिम में डाल दी थी।
मैसेज के आखिर में मोशे ने अपील की कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कदम उठाने चाहिए ताकि “उनपर जो गुजरी है, वह किसी पर न गुजरे।” इस बीच, बालक मोशे के चाचा (33) ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए पीटीआई से कहा कि अच्छाई और दया की रोशनी ही आतंक के अंधेरे का जवाब है। 26/11 आतंकी हमले के 14 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन होल्ट्जबर्ग परिवार प्यार और दया के अपने मिशन के जरिए कई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना है।
दरअसल, 26 नवंबर 2008 को महाराष्ट्र के मुंबई शहर में कई जगह हुए आतंकी हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी। बेबी मोशे होल्ट्जबर्ग 26/11 हमलों के समय दो साल के थे, जबकि फिलहाल वह 16 बरस के हैं। खास बात है कि वह इस हमले में बचे सबसे युवा व्यक्ति हैं। हमले के दौरान वह और उनकी भारतीय आया सैंड्रा मुंबई में नरीमन हाउस में घिर गए थे, जिसे चाबाड़ हाउस के नाम से भी जाना जाता है।
मोशे को तब सीने से लगाए हुए सैंड्रा के फोटो ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के इन हमलों में मोशे के पिता रब्बी गैब्रिएल होल्ट्जबर्ग और रिवका होल्ट्जबर्ग की मौत हो गई थी। मोशे के माता-पिता मुंबई में चाबाड़ आंदोलन के दूत थे। परिवार ने इससे पहले गुरुवार को हिब्रू कैलेंडर के अनुसार यरूशलम में एक कब्रिस्तान में अपने प्रियजन की याद में प्रार्थना की थी।
