देश के कुछ पूर्व न्यायाधीशों ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में जारी बयानों पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। दरअसल विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के सलवा जुडूम से जुड़े फैसले को लेकर गृह मंत्री ने बयान दिया था। जिसके बाद 13 पूर्व जजों ने रेड्डी के समर्थन में गृह मंत्री के बयान को न्यायपालिका पर हमला बताया था। उसी बयान के बाद अब 56 रिटायर्ड जजों ने गृह मंत्री के बयान और इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखी है।
अमित शाह के विरोध वाले बयान पर इन 56 पूर्व जजों ने कहा है कि राजनीतिक घटनाक्रमों पर बार-बार टिप्पणी करना भी एक तरह से न्यायिक स्वतंत्रता का आवरण ओढ़कर राजनीति करने जैसा ही है। जिससे पूरी न्यायपालिका की तटस्थता, निष्पक्षता और गरिमा पर असर पड़ता है। पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के फैसलों की आलोचना पर पूर्व जजों का कहना है कि जब कोई खुद राजनीति के मैदान में उतर चुका है, तो उसे राजनीतिक बहस और विरोध का सामना करना ही होगा। लेकिन इसे न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला बताना लोकतांत्रिक चर्चा को दबाने जैसा है।
पूर्व जजों के समूह जिसमें सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व चीफ जस्टिस भी शामिल हैं। उन्होंने अपने बयान में ये भी कहा है कि अब यह एक पैटर्न सा बन गया है कि हर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर कुछ रिटायर्ड जज और एक्टिविस्ट बयान जारी कर देते हैं। अप्रत्यक्ष तौर से गृह मंत्री अमित शाह के समर्थन में आए इस समूह ने आरोप लगाते हुए कहा कि ज्यादातर बयान राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित होते हैं, जिन्हें न्यायपालिका की आजादी का चोला ओढ़कर पेश किया जाता है।
पूर्व जजों ने आगाह किया कि बार-बार ऐसे राजनीति से प्रेरित बयानों से यह छवि बनती है कि न्यायपालिका भी राजनीतिक खेमेबाज़ी में शामिल है। आम लोगों के मन में ये धारणा बनना न्यायपालिका के लिए ज्यादा नुकसानदेह है।
गृह मंत्री के किस बयान को लेकर हुआ विरोध?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सलवा जुडूम पर सुप्रीम कोर्ट में दिए गए फैसले को लेकर पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी पर आरोप लगाए थे। अमित शाह ने कहा था कि यदि सुदर्शन रेड्डी ने सलवा जुडूम के खिलाफ फैसला नहीं सुनाया होता, तो नक्सलवाद की समस्या 2020 से पहले ही खत्म हो गई होती। उनके इस बयान के बाद एक दर्जन से ज्यादा न्यायविदों ने रेड्डी के समर्थन में पत्र लिखते हुए गृह मंत्री की आलोचना की थी। कोर्ट के फैसलों से किसी जज के व्यक्तिगत विचार को जोड़ने को गलत बताया था।
