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बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं साइनस और माइग्रेन के अटैक? जानिए बचाव के आयुर्वेदिक उपाय

Sinus Migraine In Rainy Season Ayurvedic Tips: आपने अक्सर देखा होगा कि बरसात के मौसम में कुछ लोगों को सिरदर्द का सामना करना पड़ता है। वहीं, जिन लोगों को पहले से साइनस या माइग्रेन सिरदर्द जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए यह मौसम और भी परेशानी भरा हो सकता है। लोग अक्सर पूछते हैं आखिर क्यों बारिश के मौसम में साइनस और माइग्रेन अटैक बढ़ते हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

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Sinus Migraine In Rainy Season Ayurvedic Tips

Sinus Migraine In Rainy Season Ayurvedic Tips: बारिश का मौसम जैसे ही आता है, कुछ लोगों के लिए तो यह रोमांटिक माहौल बन जाता है, लेकिन वहीं कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी परेशानी शुरू हो जाती है साइनस और माइग्रेन अटैक की। हर बार मौसम बदलते ही सिर भारी लगना, आंखों और नाक में दबाव महसूस होना, या तेज सिरदर्द होना आम बात है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बारिश में ही ये दिक्कतें क्यों बढ़ जाती हैं? और क्या कोई नेचुरल तरीका है जिससे इससे बचा जा सके? इस लेख में हम यही बात करेंगे कि आखिर साइनस और माइग्रेन बढ़ते क्यों हैं, और आयुर्वेद से इसमें कैसे राहत पाई जा सकती है।

बरसात में क्यों बढ़ जाता है साइनस और माइग्रेन - Why Do Sinus And Migraine Attack Increasing In Rains

मौसम में नमी से बढ़ती है साइनस की दिक्कत

बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे हमारे साइनस कैविटी यानी नाक और सिर के अंदर की जगह में फ्लूइड जमने लगता है। जब ये ड्रेनेज नहीं हो पाता, तो नाक बंद हो जाती है, सिर भारी लगता है और कई बार हल्का बुखार भी आने लगता है। यही साइनस की शुरुआत होती है, जो बारिश में ज्यादा उभर कर आती है।

हवा का दबाव बदलते ही माइग्रेन होता है ट्रिगर

बारिश शुरू होने से पहले या उसके दौरान वायुमंडलीय दबाव (atmospheric pressure) तेजी से बदलता है। कुछ लोगों के दिमाग की नसें इस बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं, जिससे माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है। सिर के एक तरफ़ तेज़ दर्द, मतली, चक्कर जैसे लक्षण इसी कारण होते हैं।

एलर्जी और फंगल इंफेक्शन भी है एक वजह

मानसून में नमी के कारण घरों में फंगस या फफूंद पनपने लगती है। ये एलर्जी पैदा करती हैं, जो साइनस और माइग्रेन को और ज़्यादा बढ़ा सकती हैं। खासकर वो लोग जिन्हें पहले से धूल या नमी से एलर्जी है, उन्हें इस मौसम में खास ध्यान रखने की ज़रूरत होती है।

आयुर्वेद में साइनस के लिए नेति और भाप बेहद असरदार

अगर आप आयुर्वेद में भरोसा करते हैं, तो “नेति क्रिया” और हल्के गर्म पानी की भाप लेना सबसे असरदार उपाय है। इससे नाक के रास्ते साफ होते हैं और साइनस का फ्लो रुकता नहीं। साथ ही तुलसी, अदरक और काली मिर्च से बना काढ़ा नाक और सिर की सूजन को कम करता है।

माइग्रेन में ब्राह्मी, तिल तेल और शांत वातावरण मददगार

माइग्रेन में सबसे जरूरी है दिमाग को शांत करना। आयुर्वेद में ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसे हर्ब्स मानसिक तनाव को कम करते हैं। तिल के तेल से सिर की मालिश भी बहुत फायदा देती है। कोशिश करें कि मोबाइल और स्क्रीन से थोड़ा ब्रेक लें और हल्का खाना खाएं ताकि माइग्रेन कम हो।

अच्छी नींद और संतुलित दिनचर्या भी है जरूरी

चाहे साइनस हो या माइग्रेन, नींद की कमी इन दोनों को और बढ़ा देती है। इसलिए कोशिश करें कि रोज समय पर सोएं और सुबह जल्दी उठें। शरीर की इम्युनिटी जितनी अच्छी होगी, मानसून में होने वाली ये दोनों परेशानियां उतनी ही कम होंगी।

निष्कर्ष

बारिश के मौसम में साइनस और माइग्रेन होना आम बात है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आप इन समस्याओं से जूझते हैं, तो आयुर्वेद के ये आसान उपाय आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं। नाक की सफाई, ब्राह्मी जैसे हर्ब्स और नींद का ख्याल रखकर आप इस मौसम को भी एन्जॉय कर सकते हैं बिना दर्द के।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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