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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की थोड़ी मात्रा भी सेहत के लिए खतरनाक, डायबिटीज से कैंसर, बढ़ाते हैं इन बीमारियों का रिस्क

Ultra Processed Foods Can Be Dangerous: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की थोड़ी मात्रा भी सेहत पर भारी पड़ सकती है। नए शोध में सामने आया है कि प्रोसेस्ड मीट, मीठे पेय और ट्रांस फैट वाली चीजें डायबिटीज, कैंसर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाती हैं भले ही आप इन्हें कम मात्रा में ही क्यों न खाएं।

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Ultra Processed Foods Can Be Dangerous

Ultra Processed Foods Can Be Dangerous: अक्सर हम सोचते हैं कि हफ्ते में एक-दो बार चिप्स खा लेने या कोल्ड ड्रिंक पीने से क्या फर्क पड़ता है। लेकिन एक नई रिसर्च कहती है कि फर्क पड़ता है और वो भी बहुत बड़ा। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की थोड़ी मात्रा भी डायबिटीज, कैंसर और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। ये फूड्स दिखने में तो आसान और टेस्टी लगते हैं, लेकिन इनके अंदर छिपा जहर धीरे-धीरे हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। रिसर्च कहती है, खतरा तब भी रहता है जब आप इन्हें बहुत कम खाते हैं।

रोज थोड़ा-थोड़ा खाना भी खतरनाक

हममें से कई लोग सोचते हैं कि अगर हम सिर्फ हफ्ते में एक बार या बहुत कम मात्रा में प्रोसेस्ड फूड खाते हैं तो कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन ये गलतफहमी है। रिसर्च में साफ बताया गया है कि प्रोसेस्ड मीट को रोजाना सिर्फ 0.6 ग्राम से 57 ग्राम तक खाने से भी डायबिटीज का खतरा 11 फीसदी तक बढ़ सकता है। यानी थोड़ी सी मात्रा भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर जब ये रोज के खानपान में शामिल हो जाए।

प्रोसेस्ड मीट से बढ़ रहा कैंसर का रिस्क

रिसर्च में ये भी सामने आया है कि प्रोसेस्ड मीट का रोजाना 0.78 से 55 ग्राम सेवन करने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा करीब 7 फीसदी बढ़ जाता है। इन फूड्स को स्वाद और लंबे समय तक चलाने के लिए खास तरह से प्रोसेस किया जाता है, जिसमें कई हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं जो शरीर में कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। ये एक तरह का धीमा जहर है जो स्वाद के चक्कर में हम खुद खाते रहते हैं।

मीठे पेय भी नुकसान से भरे

शुगर-स्वीटन्ड बेवरेजेस यानी मीठे पेय जैसे कोल्ड ड्रिंक, पैकेटेड जूस आदि को कम मात्रा में पीने पर भी खतरा बढ़ता है। रिसर्च के अनुसार, इनका रोजाना 1.5 से 390 ग्राम तक सेवन डायबिटीज का खतरा 8 फीसदी और दिल की बीमारी का खतरा 2 फीसदी तक बढ़ा देता है। ये आंकड़े हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि सिर्फ स्वाद के लिए ली गई एक सिप भी हमारे शरीर को कितनी बड़ी बीमारी की ओर ले जा सकती है।

प्रोसेसिंग में छिपा है सेहत का दुश्मन

प्रोसेस्ड मीट और दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को लंबे समय तक चलाने और सुरक्षित रखने के लिए कई तरह की प्रोसेसिंग की जाती है। इसमें स्मोकिंग, केमिकल क्योरिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं, जिनसे नाइट्रोसो एजेंट्स और दूसरे जहरीले तत्व बनते हैं। ये शरीर में जाकर ट्यूमर बनने की संभावना को बढ़ाते हैं। यानी जो फूड पैकिंग में सुंदर दिखता है, वो अंदर से हमारी सेहत को धीरे-धीरे खोखला करता है।

रिसर्च ने दी साफ चेतावनी

‘नेचर मेडिसिन’ में प्रकाशित इस स्टडी में रिसर्चर्स ने साफ कहा है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स के लिए अब हेल्थ पॉलिसी में कड़े नियम बनाने की जरूरत है। साथ ही, लोगों को भी यह समझना जरूरी है कि सेहत सिर्फ कैलोरी गिनने से नहीं बनती, बल्कि ये जानना भी ज़रूरी है कि हम जो खा रहे हैं वो हमारे शरीर में जाकर क्या कर रहा है। इसीलिए ज़रूरी है कि प्रोसेस्ड फूड्स से दूरी बनाएं भले ही आप इसे कम मात्रा में ही क्यों न खा रहे हों।

Source : IANS

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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