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गठिया से मिलेगा जल्द छुटकारा, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला तरीका, बनाई घुटने फिर से स्वस्थ करने की दवा

Drug To Regrow Knee Cartilage And Treat Arthritis: गठिया या घुटनों की परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए अच्छी खबर आई है। हाल ही में स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका खोजा है, जिससे घुटने की कार्टिलेज बिना सर्जरी के फिर से बढ़ सकती है। यह दवा गठिया के दर्द और आगे बढ़ने को रोक सकती है और भविष्य में जोड़ बदलवाने की जरूरत भी कम कर सकती है। जानें कैसे काम करती है यह दवा और कब तक मिल सकती है लोगों को राहत।

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घुटनों के दर्द का अब जल्दी होगा इलाज

Drug To Regrow Knee Cartilage And Treat Arthritis: अगर आपने भी अपने घुटनों में दर्द महसूस किया है, खासकर सीढ़ियां चढ़ते-उतरते या रोज़मर्रा के चलने-फिरने में, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा खोजी है जो घुटने की कार्टिलेज यानी गद्देदार ऊतक को खुद से फिर से बढ़ा सकती है, वो भी बिना किसी बड़े ऑपरेशन या सर्जरी के। इससे गठिया (arthritis) के दर्द को रोकने और आगे बढ़ने से बचाने की उम्मीद बंधी है। इस खोज से लाखों लोगों को कम उम्र में जोड़ बदलवाने से बचने का मौका मिल सकता है।

घुटने की कार्टिलेज क्या होती है और क्यों होती है खराब?

हमारे घुटने के जोड़ों के हड्डियों के सिरों पर एक चिकना टिशू होता है जिसे कार्टिलेज कहते हैं। यह “कुशन” की तरह काम करता है ताकि हम आसानी से घूम-फिर सकें। उम्र बढ़ने के साथ, यह टिशू धीरे-धीरे पतला हो जाता है और टूटने लगता है। एक बार जब यह खराब हो जाता है, तो शरीर इसे खुद से ठीक नहीं कर पाता। इसी वजह से गठिया और घुटने की तकलीफ बढ़ जाती है।

वैज्ञानिकों ने क्या खोजा?

स्टैनफॉर्ड के शोधकर्ताओं ने एक खास दवा पर काम किया है जो 15-PGDH नाम के प्रोटीन को ब्लॉक करती है। उम्र के साथ यह प्रोटीन बढ़ता है और वह शरीर में एक जरूरी तत्व Prostaglandin E2 को तोड़ देता है, जो कार्टिलेज को स्वस्थ रखने और उसे खुद से ठीक करने में मदद करता है। जब शोधकर्ताओं ने इस प्रोटीन को रोक दिया, तो परिणाम चौंकाने वाले रहे।

माइसेजा में दिखा असर

पुराने चूहों के घुटनों पर इस दवा का असर देखने पर पाया गया कि कार्टिलेज न सिर्फ पतला होना बंद हुआ, बल्कि यह फिर से बढ़ने लगा। उनके जोड़ों की सतह मोटी हुई और वे आसानी से चल-फिर पाए। खास बात यह थी कि यह सुधार बिना सर्जरी या स्टेम सेल के हुआ और पुराने कार्टिलेज सेल्स ने जवानी जैसे व्यवहार करना शुरू किया। India Today

मानव टीशू पर भी दिखी उम्मीद

शोधकर्ताओं ने इंसानों के घुटने के ऊतक पर भी यही तरीका आजमाया, जो उन मरीजों से लिया गया था जो जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए आए थे। सिर्फ एक हफ़्ते के इलाज के बाद ऊतक में नई कार्टिलेज बनने के संकेत मिले और नुकसान भी कम हुआ। यह शोध अब तक की किसी भी दवा की तुलना में ज्यादा सकारात्मक दिखा।

भविष्य में क्या हैं संभावनाएं

एक और प्रयोग में, जिन चूहों को ACL जैसे चोट मिली थी, उन्हें यह दवा दी गई तो वे आगे गठिया विकसित नहीं हुए, जबकि जिनको इलाज नहीं मिला, उनमें गठिया शुरू हो गया। हालांकि यह दवा अभी मरीजों को उपलब्ध नहीं है और फिलहाल प्रारंभिक क्लिनिकल ट्रायल्स दूसरे उपयोगों जैसे उम्र-संबंधी मांसपेशी कमजोरी के लिए चल रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि आगे इसे गठिया और कार्टिलेज पुनर्जीवन के लिए टेस्ट किया जाएगा। अगर यह सफल हुआ, तो यह लाखों लोगों को दर्द से राहत और सर्जरी से बचने में मदद करेगा।

इस तरह की खोज से देखने को मिलता है कि कैसे वैज्ञानिक शरीर के प्राकृतिक मरम्मत सिस्टम का फायदा उठाकर गंभीर समस्याओं का समाधान ढूँढ रहे हैं। जल्द ही गठिया से मरीजों को बिना सर्जरी के भी राहत मिल सकती है, और यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है जो रोज़ के लिए दर्द से जूझते हैं।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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