हेल्थ

20 साल से कोमा में थे सऊदी अरब के 'स्लीपिंग प्रिंस', क्या होता है Coma, क्या इसमें जान बचने की संभावना होती है

Coma Kya Hota Hai: हाल ही में साउदी अरब के 'स्लीपिंग प्रिंस' के निधन की खबर सामने आई है। आपको बता दें कि वह 20 साल से कोमा में थे। इस घटना के बाद लोगों के मन में कोमो को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आज के इस लेख में हम आपको कोमा से जुड़ी हर जरूरी जानाकारी और आपके सवालों का जवाब लेकर आए हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

Image

कोमा क्या होता है? (फोटो: Istock)

Coma Kya Hota Hai: हाल ही में सऊदी अरब के 'स्लीपिंग प्रिंस' अल वलीद बिन खालिद अल सऊद के निधन की खबर आई। इसी के साथ ही ये जानने के लिए भी सभी उत्सुक हैं कि आखिर उनको 'स्लीपिंग प्रिंस' क्यों कहा जा रहा है। दरअसल, साल 2005 में एक कार एक्सीडेंट के बाद अल वलीद कोमा में चले गए और फिर पूरे 20 साल तक नहीं जागे। उनके पिता हर दिन उनके पास बैठते, उनसे बात करते, यह मानकर कि उनका बेटा सब सुन रहा है। अब उनके निधन के बाद ये जानकर भी हैरानी है कि क्या इतने समय तक कोई कोमा में रहते हुए भी जीवित हो सकता है।

यह घटना हमें कोमा को फिर से समझने को मजबूर करती है। क्या कोमा मौत के करीब है? क्या इसमें वापस आना संभव है? क्या इस दौरान दिमाग कुछ सुन और समझ सकता है?

कोमा क्या होता है (What is a coma In Hindi)

डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, अमृता अस्पताल फरीदाबाद में वरिष्ठ सलाहकार (न्यूरोसाइंसेस, न्यूरोलॉजी व स्ट्रोक मेडिसिन) बताते हैं कि कोमा एक ऐसी अचेतन अवस्था होती है जिसमें मरीज जीवित होता है लेकिन पूरी तरह बेहोश रहता है। वह आंखें नहीं खोल सकता, बोल नहीं सकता और न ही किसी आवाज या छूने पर प्रतिक्रिया देता है। यह नींद जैसी स्थिति नहीं है, बल्कि इसमें दिमाग की सक्रियता बेहद कम हो जाती है।

वहीं, मारेंगो एशिया हॉस्पिटल फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. कुणाल बहारनी इस स्थिति को गंभीर न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी मानते हैं। उनके अनुसार, यह दिमाग की गहरी चोट या गंभीर बीमारी का परिणाम होता है, जिसमें इंसान की सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता पूरी तरह ठप हो जाती है।

कोमा क्यों आता है (Why does a coma occur in hindi)

डॉक्टर की मानें तो जब मस्तिष्क के इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल्स में भारी गड़बड़ी हो जाती है, तो वह खुद को एक तरह से शट डाउन कर देता है। यह तब होता है जब उसे महसूस होता है कि उसे खुद को और शरीर को बचाने की जरूरत है।

सिर की चोट, ब्रेन स्ट्रोक, ऑक्सीजन की कमी, मिर्गी, दिमागी संक्रमण, डायबिटिक कोमा, ड्रग या शराब ओवरडोज जैसी स्थितियां कोमा का कारण बन सकती हैं। ये सभी दिमाग को गहरी क्षति पहुंचाते हैं, जिससे व्यक्ति चेतना खो बैठता है।

कोमा के लक्षण  (फोटो: Istock)

कोमा के लक्षण (फोटो: Istock)

कैसे पता चले कि कोई कोमा में है (What are the symptoms of coma in hindi)

कोमा के लक्षण (Symptoms Of Coma) आमतौर पर बहुत स्पष्ट होते हैं। मरीज किसी भी आवाज, छूने या दर्द पर प्रतिक्रिया नहीं देता, उसकी आंखें बंद रहती हैं और सांसों का पैटर्न भी अनियमित हो सकता है। कभी-कभी शरीर का कोई हिस्सा अकड़ सकता है, जिसे 'अबनॉर्मल पोस्ट्योरिंग' कहते हैं।

कोमा और ब्रेन डेड में क्या फर्क है (What is the difference between brain death and coma)

यह एक बहुत अहम सवाल है जिसे आम लोग अक्सर नहीं समझते। अमूमन कोमा और ब्रेन डेड को आम लोग एक ही मानते हैं जबकि मेडिकल टर्म्स में दोनों स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है।

डॉ. अमित कुमार बताते हैं कि कोमा में दिमाग की कुछ न्यूनतम गतिविधि बाकी रहती है, जिससे इलाज और जागने की संभावना रहती है। जबकि ब्रेन डेड की स्थिति में दिमाग पूरी तरह काम करना बंद कर देता है और मरीज को मेडिकल रूप से मृत मान लिया जाता है।

ब्रेन डेड और कोमा में अंतर (फोटो: Istock)

ब्रेन डेड और कोमा में अंतर (फोटो: Istock)

कोमा से बाहर आने में कितना समय लगता है (How long does it take to come out of a coma)

कोई मरीज अगर कोमा में चला जाता है तो उसे इससे बाहर आने में कुछ दिन लग सकते हैं या फिर कई महीने और यहां तक कि साल भी। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि दिमाग को कितना नुकसान हुआ है और इलाज कितना जल्दी शुरू हुआ। सऊदी के प्रिंस अल वलीद का मामला इसका अनोखा उदाहरण है, जो 20 साल तक कोमा में रहे। यह दुर्लभ है, लेकिन इस बात का सबूत है कि कोमा हमेशा अंत नहीं होता।

क्या कोमा से कोई पूरी तरह ठीक हो सकता है (Can someone fully recover from a coma)

हां, लेकिन हर मामला अलग होता है। डॉ. अमित कुमार अग्रवाल बताते हैं कि अगर कारण हल्का हो और तुरंत इलाज मिल जाए, तो मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकता है। हालांकि कुछ मामलों में व्यक्ति को बाद में बोलने, सोचने या चलने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मरीजों के लिए लॉन्ग-टर्म फिजियोथेरेपी और रिहैब की जरूरत होती है।

कोमा कितने समय तक रह सकता है (How long can a person remain in a coma)

डॉ. कुणाल बहारनी बताते हैं कि कोमा कुछ घंटों से लेकर सालों तक रह सकता है। अगर कोमा 4 हफ्ते से ज्यादा लंबा चलता है, तो उसे परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट (Persistent Vegetative State) कहा जाता है। हालांकि उसके आम जीवन में वापस लौटने उम्मीद की लौ तब भी जली रहती है, क्योंकि विज्ञान में कई उदाहरण हैं जहां मरीज महीनों या सालों बाद होश में आए हैं।

कोमा कितने समय तक रहता है? (फोटो: Istock)

कोमा कितने समय तक रहता है? (फोटो: Istock)

क्या कोमा में दिमाग एक्टिव रहता है (Is the brain active during coma)

कोमा में दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता। EEG और MRI जैसे टेस्ट ये दिखाते हैं कि दिमाग के कुछ हिस्से सीमित रूप से सक्रिय रहते हैं। यही न्यूनतम सक्रियता मरीज को वापस लाने की उम्मीद बनाए रखती है।

क्या मरीज कोमा में रहते हुए सुन सकता है (Can a person in coma hear)

डॉक्टर्स की राय में सुनना वह इंद्री है जो सबसे आखिर में बंद होती है। रिसर्च और FMRI स्कैन यह दिखाते हैं कि कुछ कोमा मरीज अपने प्रियजनों की आवाज को पहचानते हैं या संगीत से हल्की प्रतिक्रिया देते हैं। इसलिए डॉक्टर हमेशा परिवार को सलाह देते हैं कि वो मरीज से बात करते रहें।

क्या मरीज को आसपास की बातों का अहसास होता है (Is the patient aware of their surroundings in coma)

कुछ कोमा मरीज न्यूनतम चेतना अवस्था (Minimally Conscious State) में हो सकते हैं, जिसमें वे अपने आस-पास की हल्की ध्वनियों या छूने की अनुभूति रखते हैं, भले ही वे उसका कोई जवाब न दें। यह वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुका है कि परिवार की मौजूदगी और बातचीत दिमाग को एक्टिव करने में मदद कर सकती है।

परिवार वालों के लिए क्या जरूरी है (What should families know or do)

दोनों डॉक्टरों की सलाह है कि परिवार को धैर्य और भावनात्मक मजबूती रखनी चाहिए। उन्हें नियमित रूप से डॉक्टर से संपर्क में रहना चाहिए, मेडिकल रिपोर्ट समझनी चाहिए और लॉन्ग-टर्म देखभाल के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही यह भी जरूरी है कि मरीज के पास बैठकर उससे बात की जाए, क्योंकि वह कभी भी सुन सकता है या जाग सकता है।

कोमा पेशेंट के परिवारजनों के लिए टिप्स (फोटो: Istock)

कोमा पेशेंट के परिवारजनों के लिए टिप्स (फोटो: Istock)

कोमा को लेकर आम भ्रांतियां (Common Myths About Coma In Hindi)

कोमा को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां होती हैं। डॉ. कुणाल बहारनी बताते हैं कि अक्सर लोग कोमा को मौत जैसा मान लेते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। कोमा एक अलग स्थिति है जिसमें दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि सीमित स्तर पर काम कर रहा होता है। इसलिए ठीक होने की संभावना बनी रहती है।

एक आम भ्रम यह भी होता है कि कोमा में गया इंसान कुछ नहीं सुन सकता - जबकि डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के मुताबिक, सुनना आखिरी इंद्रिय होती है जो बंद होती है। इसलिए डॉक्टर और परिवारजनों को मरीज से बात करने की सलाह दी जाती है।

कुछ लोग मानते हैं कि कोमा में जाने वाला कभी वापस नहीं आता- लेकिन कई मामलों में, खासतौर पर अगर शुरुआती इलाज समय पर हो, तो मरीज ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकता है। सऊदी प्रिंस की तरह लंबे कोमा वाले मामले दुर्लभ हैं, लेकिन विज्ञान में डॉक्यूमेंटेड हैं।

एक और मिथ है कि ब्रेन डेड और कोमा एक जैसे होते हैं - जबकि यह पूरी तरह गलत है। ब्रेन डेड मतलब दिमाग की मौत, जहां से वापसी नहीं होती। लेकिन कोमा में रिकवरी मुमकिन होती है। इसलिए जरूरी है कि हम कोमा को लेकर सही जानकारी रखें और अफवाहों या फिल्मों व शोज में दिखाए जाने वाले दृश्यों के आधार पर राय न बनाएं।

निष्कर्ष

कोमा को सिर्फ एक गहरी नींद या अंत समझना गलत होगा। यह एक लंबी, जटिल और भावनात्मक यात्रा है - मरीज के लिए भी और उसके परिवार के लिए भी। सऊदी के 'स्लीपिंग प्रिंस' की कहानी हमें सिखाती है कि प्यार और उम्मीद कभी हार नहीं मानते। और विज्ञान भी हमेशा नई संभावनाओं के रास्ते खोलता है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

और पढ़ें
End of Article