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National Youth Day: तनाव और नींद की कमी से युवाओं पर मंडरा रहा खतरा, ICMR ने दी चेतावनी, जान लें बचाव

National Youth Day: ICMR ने भारत के युवाओं की सेहत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। बढ़ता तनाव, नींद की कमी और बिगड़ती लाइफस्टाइल युवाओं को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है। आज के लेख में हम जानेंगे कि क्यों अब रोकथाम जरूरी है, किन वजहों से खतरा बढ़ रहा है और समय रहते क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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युवाओं में बढ़ता तनाव बना बड़ी समस्या

National Youth Day: राष्ट्रीय यूथ डे पर आमतौर पर हम युवाओं की ताकत, सपनों और भविष्य की बात करते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी चिंता बढ़ाने वाली है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) का कहना है कि आज के युवा तेजी से तनाव, नींद की कमी और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पढ़ाई, नौकरी का दबाव, मोबाइल की लत और अनहेल्दी रूटीन मिलकर युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। ICMR के मुताबिक अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले सालों में यह खतरा और बड़ा हो सकता है।

युवाओं में बढ़ता तनाव बना बड़ी समस्या

ICMR की रिपोर्ट बताती है कि आज का युवा पहले से कहीं ज्यादा तनाव में है। पढ़ाई में कंपटीशन, करियर को लेकर अनिश्चितता और सोशल मीडिया की तुलना वाली दुनिया युवाओं को मानसिक दबाव में डाल रही है। लगातार तनाव सिर्फ मन को ही नहीं, बल्कि शरीर को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं कम उम्र में ही दिखने लगी हैं।

नींद की कमी से बिगड़ रहा शरीर का संतुलन

रात देर तक मोबाइल चलाना, ओटीटी देखना या काम का प्रेशर, नींद को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। ICMR के अनुसार नींद की कमी युवाओं में हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ रही है। इसका असर इम्युनिटी, याददाश्त और मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। लंबे समय तक सही नींद न लेने से मोटापा और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।

लाइफस्टाइल डिसऑर्डर अब सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं

एक समय था जब डायबिटीज, हार्ट डिजीज या फैटी लिवर को उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन ICMR के मुताबिक अब ये बीमारियां युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही हैं। जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और बैठकर काम करने की आदत इसकी बड़ी वजह है। खराब लाइफस्टाइल धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है।

मेंटल हेल्थ और फिजिकल हेल्थ का गहरा रिश्ता

ICMR यह भी मानता है कि मानसिक और शारीरिक सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। जब दिमाग लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर भी बीमारियों का शिकार होने लगता है। नींद की कमी और तनाव मिलकर इम्युन सिस्टम को कमजोर कर देते हैं, जिससे युवा जल्दी थकान और बीमारियों को महसूस करने लगते हैं।

रोकथाम क्यों है सबसे जरूरी कदम

ICMR की सबसे बड़ी चेतावनी यही है कि इलाज से ज्यादा जरूरी है रोकथाम। समय पर सोना, रोज थोड़ा चलना, मोबाइल से ब्रेक लेना और तनाव को पहचानकर उसे संभालना बेहद जरूरी है। युवावस्था में डाली गई हेल्दी आदतें आगे चलकर गंभीर बीमारियों से बचा सकती हैं। यूथ डे पर यही संदेश है कि सेहत को नजरअंदाज न करें, क्योंकि मजबूत युवा ही मजबूत देश की नींव होते हैं।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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