Doctor Advice On Daily Water Intake: हम में से ज्यादातर लोगों ने यह बात जरूर सुनी होगी कि हर घंटे पानी पीना चाहिए या जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर उतना डिटॉक्स होगा। सोशल मीडिया और फिटनेस ट्रेंड्स ने इस बात को लगभग नियम बना दिया है। लेकिन क्या सच में ऐसा है? क्या ज्यादा पानी पीने से शरीर की गंदगी जल्दी निकल जाती है? डॉक्टरों के मुताबिक, यह पूरी तरह सही धारणा नहीं है।
शरीर में पहले से ही मजबूत डिटॉक्स सिस्टम मौजूद होता है, जो अपना काम खुद करता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए हमने यशोदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन डॉ. के. सेषी किरण और अमृता हॉस्पिटल की डाइट एक्सपर्ट और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. चारू दुआ से बात की। चलिए डॉक्टर्स से ही जानते हैं आखिर क्या है बॉडी हाइड्रेट रखने का सही तरीका।
शरीर खुद करता है बॉडी डिटॉक्स
डॉ. के. सेषी किरण बताते हैं कि हमारे शरीर में लिवर और किडनी जैसे अंग पहले से मौजूद हैं, जो प्राकृतिक तरीके से शरीर को डिटॉक्स करते हैं। लीवर खून को साफ करता है और किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी व अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालती है। सिर्फ ज्यादा पानी पी लेने से यह प्रक्रिया तेज नहीं हो जाती। शरीर की अपनी एक क्षमता होती है। अगर सिस्टम ठीक से काम कर रहा है तो सामान्य मात्रा में पानी ही पर्याप्त है। डिटॉक्स के नाम पर जरूरत से ज्यादा पानी पीना कोई जादुई उपाय नहीं है।
पानी की जरूरत हर व्यक्ति की अलग होती है
हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है
डॉ. चारू दुआ समझाते हैं कि पानी की जरूरत सबकी एक जैसी नहीं होती। शरीर को कितने पानी की जरूर है यह कई बातों पर निर्भर करता है जैसे - मौसम कैसा है, आप कितना शारीरिक काम करते हैं, आपका वजन कितना है और आपका खानपान कैसा है।
अगर कोई व्यक्ति ठंडे मौसम में है और ज्यादा शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहा, तो उसे कम पानी की जरूरत होगी। वहीं अगर कोई गर्म और उमस भरे मौसम में एक्सरसाइज कर रहा है, तो उसे ज्यादा पानी चाहिए होगा। इसलिए हर घंटे पानी वाला नियम सब पर लागू नहीं होता।
जरूरत से ज्यादा पानी भी बन सकता है खतरा
यह बात कम लोग जानते हैं कि बहुत कम समय में ज्यादा पानी पीना खतरनाक हो सकता है। डॉ. किरण के अनुसार, किडनी एक घंटे में लगभग 0.5 से 1 लीटर पानी ही बाहर निकाल सकती है। अगर इससे ज्यादा पानी जल्दी-जल्दी पिया जाए, तो खून में सोडियम का स्तर कम हो सकता है।
इस स्थिति को डाइल्यूशनल हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को उल्टी, चक्कर, कन्फ्यूजन जैसी समस्या हो सकती है। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। इसलिए पानी भी संतुलन में ही पीना चाहिए।
शरीर के लिए सही हाइड्रेशन क्या है?
डॉ. चारू दुआ साफ कहते हैं कि हाइड्रेशन का मतलब जबरदस्ती पानी पीना नहीं है, बल्कि शरीर में सही फ्लूड बैलेंस बनाए रखना है। इसका एक आसान तरीका है कि जब प्यास लगे तब पानी पिएं। इसके अलावा अपने यूरिन के रंग पर ध्यान दें। अगर पेशाब का रंग हल्का है, तो इसका मतलब है कि शरीर में पानी का स्तर ठीक है। अगर बहुत गहरा है, तो पानी की जरूरत हो सकती है।
हाइड्रेशन का मतलब नहीं ज्यादा पानी पीना
सिर्फ पानी नहीं बॉडी हाइड्रेट रकने का एकमात्र तरीका
डॉ. किरण के अनुसार, शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए जरूरी नहीं है कि सिर्फ सादा पानी ही पिया जाए। बल्कि पानी से भरपूर फल-सब्जियां, दूध, नारियल पानी और ज्यादा पसीना आने की स्थिति में इलेक्ट्रोलाइट वाले तरल पदार्थ ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं।
गर्मी में या वर्कआउट के दौरान शरीर से सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि नमक और मिनरल्स भी निकलते हैं। ऐसे में केवल सादा पानी ज्यादा मात्रा में पीना हमेशा सही विकल्प नहीं होता।
संतुलन ही है असली कुंजी
डॉक्टर्स का कहना है कि पानी हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन हर चीज की तरह इसकी भी एक सही मात्रा होती है। हर घंटे पानी पीना कोई मेडिकल नियम नहीं है। शरीर की जरूरत को समझकर, प्यास के संकेतों को पहचानकर और संतुलित तरीके से पानी पीना ही सही हाइड्रेशन है। ज्यादा पानी हमेशा ज्यादा फायदा नहीं देता। इसलिए ट्रेंड्स से ज्यादा जरूरी है डॉक्टर की सलाह और वैज्ञानिक समझ।
Expert Views By: डॉ. के. सेषी किरण, यशोदा हॉस्पिटल हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन डॉक्टर हैं। उनके पास इस क्षेत्र में 20 साल से अधिक अनुभव है। वहीं, डॉ. चारू दुआ, अमृता अस्पताल फरीदाबाद में डाइट एक्सपर्ट और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट हैं। उनको इस फील्ड में लगभग 26 साल का अनुभव है।
