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दिखने में करेले जैसी, पर नहीं होती कड़वी, चिकन-मटन जितनी ताकत रखती है ये कांटेदार सब्जी

पोषक तत्वों से भरपूर ककोड़े या मीठे करेले में विटामिन बी12, विटामिन डी, कैल्शियम, जिंक, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम कैलोरी और उच्च फाइबर युक्त होने के कारण यह वजन घटाने में मददगार है।

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Spinny Gourd Benefits

करेला का नाम लेते ही कड़वा स्वाद तुरंत ध्यान में आ जाता है। लेकिन, आपने कभी मीठे करेले के बारे में सुना है? स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद ककोड़ा, जिसे कंटोला या मीठा करेला भी कहते हैं, एक ऐसी सब्जी है, जो बड़ी आसानी से कहीं भी उग जाती है।

वाराणसी के एक्यूप्रेशर एक्सपर्ट और आयुर्वेदाचार्य अनिरुद्ध पांडेय के अनुसार, ककोड़ा न सिर्फ स्वादिष्ट, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान है। यह दो प्रकार का होता है, मीठा और कड़वा, जिसमें कड़वे ककोड़े की सब्जी ज्यादा स्वादिष्ट मानी जाती है, हालांकि यह कम मिलता है।

पोषक तत्वों से भरपूर ककोड़े या मीठे करेले में विटामिन बी12, विटामिन डी, कैल्शियम, जिंक, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम कैलोरी और उच्च फाइबर युक्त होने के कारण यह वजन घटाने में मददगार है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।

अनिरुद्ध पांडेय बताते हैं कि यह कई बीमारियों से बचाव और इलाज में कारगर है और आयुर्वेद में ककोड़े को औषधि माना जाता है। ककोड़ा कई समस्याओं में लाभप्रद है। यह सिरदर्द, बालों के झड़ने और कान दर्द में राहत देता है। पेट के इंफेक्शन, बवासीर और पीलिया जैसी समस्याओं को भी दूर करता है। इसका निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स मधुमेह को नियंत्रित रखता है, जो मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद है।

बारिश में होने वाले दाद, खाज और खुजली में भी यह लाभकारी है। यह लकवा, सूजन, बेहोशी, आंखों की समस्याओं, बुखार, रक्तचाप जैसी समस्याओं से भी बचाव में मदद करता है।

ककोड़े की बाहरी सतह छीलकर सब्जी, करी या भजिए बनाए जा सकते हैं। यह स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान रखता है। डॉ. पांडेय सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाओं और दवाएं ले रहे लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

इनपुट - आईएएनएस

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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