कोल्ड वेव में जरा सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा, दिल और फेफड़ों पर होगा सीधा असर - AIIMS एक्सपर्ट की चेतावनी
- Authored by: भावना किशोरEdited by: Vineet
- Updated Jan 12, 2026, 02:28 PM IST
How Cold Wave Affect Heart And Lungs: कड़ाके की ठंड सिर्फ ठिठुरन नहीं बढ़ाती, बल्कि दिल, फेफड़े, डायबिटीज और किडनी के मरीजों के लिए जानलेवा बन सकती है। ऐसे में AIIMS के वरिष्ठ डॉक्टरों ने कोल्ड वेव के दौरान नमक कम रखने, पानी भरपूर पीने, सही समय पर वॉक और दवाइयों में लापरवाही न करने की सख्त सलाह दी है। जानिए ठंड में कैसे रखें खुद को और परिवार को सुरक्षित।
शीतलहर कहीं आपको भी न बना दे बीमार (PC_-AI)
How Cold Wave Affect Heart And Lungs: कड़ाके की ठंड आते ही हम अक्सर यही सोचते हैं कि बस गर्म कपड़े पहन लिए, अब सब ठीक है। लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है। कोल्ड वेव यानी शीत लहर का असर सिर्फ ठिठुरन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिल, फेफड़े, दिमाग और इम्यून सिस्टम पर सीधा वार कर सकती है। AIIMS, नई दिल्ली के वरिष्ठ डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि ठंड में जरा सी लापरवाही हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सांस की गंभीर दिक्कत और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है। खासकर हार्ट, फेफड़े, डायबिटीज, किडनी के मरीज, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम ठंड को हल्के में न लें और डॉक्टरों की सलाह को रोजमर्रा की आदतों में शामिल करें।
ठंड में दिल के मरीज क्यों रहें सबसे ज्यादा सतर्क
AIIMS के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव नारंग बताते हैं कि ठंड में शरीर की रक्त नलियां सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना हो जाता है। अगर सीने में जकड़न, सांस फूलना, अचानक थकान या पैरों में सूजन दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें। ठंड में नमक, अचार, पापड़ और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बेहद जरूरी है। पानी कम पीना भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे खून गाढ़ा होता है और दिल पर दबाव बढ़ता है।
सही समय पर वॉक और दवाइयों में लापरवाही न करें
अक्सर लोग ठंड में सुबह-सुबह या देर शाम टहलने निकल जाते हैं, जो जोखिम भरा हो सकता है। डॉक्टरों की मानें तो दोपहर में, लंच से पहले हल्की वॉक सबसे सुरक्षित रहती है। अगर प्रदूषण ज्यादा हो, तो बाहर निकलने से बचें। सबसे जरूरी बात, बीपी की दवाइयां और दूसरी नियमित दवाएं किसी भी हालत में न छोड़ें।
फेफड़े, दमा और COPD के मरीजों के लिए ठंड क्यों खतरनाक
AIIMS के डॉ. संदीप सिन्हा के अनुसार, ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। इससे दमा और COPD के मरीजों की तकलीफ बढ़ सकती है। खांसी, बलगम, सांस लेने में परेशानी या बार-बार इंफेक्शन होने लगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं। बाहर निकलते समय नाक और मुंह ढककर रखें, मल्टी-लेयर कपड़े पहनें और गर्म तरल जैसे सूप या चाय लेते रहें।
डायबिटीज और किडनी मरीज ठंड में क्या न भूलें
AIIMS के प्रो. राजेश खड़गावत कहते हैं कि ठंड आलस्य का बहाना नहीं बननी चाहिए। हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग रोज जरूरी है। तला-भुना और ज्यादा नमक वाला खाना नुकसानदेह हो सकता है। ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन की नियमित जांच ठंड में और भी जरूरी हो जाती है।
बच्चों और बुजुर्गों को दें एक्स्ट्रा केयर
AIIMS के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश लोढ़ा बताते हैं कि छोटे बच्चों और कम वजन वाले बच्चों पर ठंड का असर जल्दी होता है। सिर, कान और छाती ढककर रखें। अगर बच्चा सुस्त लगे या सांस लेने में दिक्कत हो, तो देर न करें। बुजुर्गों और दमा के मरीजों के लिए ठंड और प्रदूषण डबल खतरा है, इसलिए दवाइयों और फॉलो-अप में बिल्कुल ढील न दें।
कम नमक, ज्यादा पानी, सही समय पर वॉक और नियमित दवाइयां, यही कोल्ड वेव में सबसे बड़ा कवच है। ठंड को कभी हल्के में न लें, क्योंकि जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।