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बांहें पतली, पेट मोटा? AIIMS की रिसर्च कहती है - कम हो सकती है आपकी याददाश्त, किया चौंकाने वाला खुलासा

Belly Fat and Thin Arms Linked to Higher Risk of Dementia AIIMS Study: एम्स की एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिन बुजुर्गों की बांहें पतली और पेट मोटा होता है, उनमें डिमेंशिया यानी याददाश्त कमजोर होने का खतरा ज्यादा होता है। यह संकेत सिर्फ शरीर के बदलाव नहीं, बल्कि दिमागी सेहत से जुड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट में जानिए कैसे पतली बांह और मोटा पेट आपकी ब्रेन हेल्थ पर असर डाल सकते हैं।

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Belly Fat and Thin Arms Linked to Higher Risk of Dementia AIIMS Study

Belly Fat and Thin Arms Linked to Higher Risk of Dementia AIIMS Study: क्या आपको लगता है कि बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ थोड़ा पेट निकल आना और बांहें पतली होना आम बात है? अगर हां, तो अब आपको सतर्क हो जाना चाहिए। एम्स (AIIMS) की एक नई रिसर्च में सामने आया है कि यह कॉम्बिनेशन यानी पतली बांहें और मोटा पेट, सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि दिमागी बीमारी डिमेंशिया की तरफ इशारा कर सकता है। रिसर्च में साफ बताया गया है कि जिन बुजुर्गों में यह लक्षण देखे गए, उनमें याददाश्त कमजोर होने का खतरा काफी ज्यादा था। तो चलिए, आसान भाषा में जानते हैं इस रिपोर्ट की पूरी बात।

AIIMS की रिपोर्ट में क्या निकला?

एम्स ने 60 साल से ऊपर के कई बुजुर्गों पर रिसर्च की और पाया कि जिन लोगों की मांसपेशियां कमजोर थीं लेकिन पेट पर चर्बी ज्यादा थी, उनमें डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा दोगुना था। इसका मतलब है कि शरीर में फैट का असंतुलन सिर्फ हार्ट या शुगर की नहीं, दिमाग की भी बड़ी वजह बन सकता है।

पतली बांह और मोटा पेट क्यों है खतरनाक?

दरअसल, जब बांहें पतली होती हैं तो वो मसल लॉस का संकेत होता है और जब पेट निकलने लगता है तो वह बढ़ते फैट का। ये दोनों चीजें मिलकर शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ती हैं और ब्रेन तक सही पोषण नहीं पहुंचता, जिससे दिमाग कमजोर होने लगता है।

याददाश्त पर कैसे पड़ता है असर?

शरीर का असंतुलन खासतौर पर ब्रेन के उस हिस्से पर असर डालता है जिसे हिप्पोकैम्पस कहते हैं। यही हिस्सा हमारी याददाश्त कंट्रोल करता है। जब मांसपेशियां कम और फैट ज्यादा होता है, तो ये हिस्सा सिकुड़ने लगता है, जिससे डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है।

दिमाग का भी मामला है

अक्सर लोग सोचते हैं कि पतली बांह और पेट थोड़ा बढ़ा हुआ तो आम बात है। लेकिन एम्स की स्टडी कहती है कि ये संकेत नजरअंदाज नहीं करने चाहिए। ये बदलाव धीरे-धीरे दिमागी सेहत पर असर डाल सकते हैं, खासकर उम्र बढ़ने पर।

कैसे बचा जा सकता है इससे?

अगर आप या आपके घर में कोई बुजुर्ग इस स्थिति में हैं, तो अब समय है कि रोज थोड़ा वॉक करें, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज शुरू करें और हाई प्रोटीन डाइट लें। मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखें और पेट की चर्बी कंट्रोल में रखें ताकि दिमाग भी स्वस्थ बना रहे।

समय रहते जांच करवाएं

अगर किसी बुजुर्ग में पतली बांहें और मोटा पेट लगातार बना हुआ है, तो इसे हल्के में न लें। डॉक्टर से मिलें, शरीर की जांच करवाएं और डाइट व एक्सरसाइज की सही प्लानिंग करें। समय रहते किया गया छोटा बदलाव आगे चलकर बड़ी परेशानी से बचा सकता है।

एम्स की रिपोर्ट एक जरूरी चेतावनी है कि शरीर का असंतुलन सीधे हमारे दिमाग की सेहत को प्रभावित कर सकता है। पतली बांह और पेट पर चर्बी सिर्फ फिजिकल बदलाव नहीं, बल्कि दिमागी खतरे का भी संकेत हो सकता है। इसलिए अब से बॉडी बैलेंस पर भी ध्यान देना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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