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Autistic Pride Day: ऑटिज्म को समझने का समय, क्यों तेजी से बढ़े मामले और जानें कुछ प्रेरणादायी कहानियां

Autistic Pride Day: हर साल 18 जून को मनाया जाने वाला Autistic Pride Day ऑटिज्म के बारे में जागरूकता के साथ उन लोगों के बारे में जानने का भी दिन है। आइए आज आपको इसके बारे में विस्तार बताते हैं।

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ऑटिज्म क्या है
Authored by: gulshan kumar
Updated Jun 17, 2026, 14:23 IST
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Autistic Pride Day: हर बच्चा दुनिया को एक जैसा नहीं देखता। कोई रंगों में खो जाता है, कोई संख्याओं से दोस्ती कर लेता है, तो कोई ऐसी बारीकियां देख लेता है जिन्हें दूसरे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ बच्चों की दुनिया थोड़ी अलग होती है और यही अलगपन उनकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। हर साल 18 जून को मनाया जाने वाला Autistic Pride Day हमें इसी सच्चाई की याद दिलाता है। यह दिन केवल ऑटिज्म के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए सम्मान जाहिर करने का दिन है जो दुनिया को अपने अनोखे नजरिए से देखते और समझते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं ऑटिज्म (Autism) के बारे में।

एक अलग नजरिए से देखते हैं दुनिया

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) को अक्सर केवल चुनौतियों के चश्मे से देखा गया है। लेकिन आज एक्सपर्ट और समाज की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। अब ऑटिज्म को बीमारी नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की विविधता का एक हिस्सा माना जा रहा है।

फोर्टिस हॉस्पिटल फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. विनीत बंगा की मानें तो, ऑटिज्म किसी व्यक्ति के बातचीत करने, सोशल रिलेशन बनाने और सीखने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि हर ऑटिस्टिक व्यक्ति का अनुभव अलग होता है। जैसे ऑटिज्म में कोई व्यक्ति बोलने में देर कर सकता है, तो कोई किसी खास विषय में इतनी गहरी रुचि विकसित कर लेता है कि उसमें एक्सपर्ट बन जाता है। यही कारण है कि इसे रोग न कहकर 'स्पेक्ट्रम' कहा जाता है। जैसे एक स्पेक्ट्रम में अलग-अलग रंग दिखाई देते है, वैसे ही ऑटिज्म वाले लोगों की भी अलग-अलग कहानी सुनने को मिलती हैं।

दुनिया देखने का अलग नजरिया

दुनिया देखने का अलग नजरिया

ऑटिज्म क्या है - What is Autism

कल्पना कीजिए कि एक बच्चा दुनिया को आपसे बिल्कुल अलग तरीके से देखता और समझता है। यही ऑटिज्म की सबसे बड़ी पहचान है। डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक न्यूरो डेवलपमेंट स्थिति है, जो व्यक्ति के संवाद करने और उसके व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। कुछ बच्चे बोलने में देर करते हैं, कुछ आंखों से संपर्क बनाने में झिझकते हैं, जबकि कुछ किसी खास विषय में असाधारण रुचि और प्रतिभा दिखाते हैं।

क्यों तेजी से बढ़े ऑटिज्म के आंकड़े

डॉ. विनीत बंगा कहते हैं कि, पिछले कुछ सालों में ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुनियाभर में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के मामले लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। बीते दिनों सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर 125 में से 1 बच्चा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से प्रभावित है। यह एक न्यूरो डेवलपमेंट स्थिति है, जो बच्चे के संवाद करने, सामाजिक संबंध बनाने और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

पहली नजर में तेजी से बढ़ती संख्या चिंता का विषय लग सकता है, लेकिन इसके पीछे कुछ सकारात्मक पहलू भी छिपे हैं। आज पहले की तुलना में बेहतर स्क्रीनिंग, जागरूकता और इलाज के मानक उपलब्ध हैं। माता-पिता बच्चों के विकास संबंधी संकेतों को अधिक गंभीरता से समझ रहे हैं और डॉक्टर भी इस समस्या की शुरुआती पहचान पर जोर दे रहे हैं।

यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि कई मामलों में ऑटिज्म बढ़ नहीं रहा, बल्कि उसे पहले से बेहतर तरीके से पहचाना जा रहा है। इस समस्या की समय पर पहचान ही बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी बनती है।

ऑटिज्म के संकेत

डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, ऑटिज्म को कुछ छोटे-छोटे संकेतों को पकड़कर पहचाना जा सकता है। हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो एक्स्पर्ट्स का ध्यान आकर्षित करते हैं। जैसे नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया कम देना, आंखों से संपर्क बनाने में कठिनाई, बोलने में देरी, किसी एक्टिविटी को बार-बार दोहराना या बदलाव से असहज होना ऐसे ही कुछ संकेत हैं। हालांकि इन संकेतों का मतलब हमेशा ऑटिज्म नहीं होता, लेकिन ऐसे लक्षण दिखें तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना बच्चे के विकास के लिए मददगार साबित हो सकता है।

ऑटिज्म के संकेत

ऑटिज्म के संकेत

चुनौती के बीच छिपी हुई प्रतिभा

ऑटिज्म की चर्चा अक्सर जीवन में आने वाली कठिनाइयों के संदर्भ में होती है, लेकिन इसकी दूसरी तस्वीर कहीं ज्यादा प्रेरणादायक है। दुनिया में कई ऑटिस्टिक व्यक्तियों में गहरी एकाग्रता, असाधारण स्मरण शक्ति, पैटर्न पहचानने की क्षमता और रचनात्मक सोच जैसी खूबियां पाई जाती हैं। यही गुण विज्ञान, गणित, तकनीक, कला और संगीत जैसे क्षेत्रों में उन्हें अलग पहचान दिला सकते हैं।

ऑटिज्म वाले किसी बच्चे का घंटों तक एक विषय में डूबे रहना कई बार उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। इनकी वही रुचि आगे चलकर उपलब्धि की कहानी लिख सकती है। आइए जानते हैं ऑटिज्म वाले ऐसी ही फेमस लोगों के बारे में...

एलन मस्क

दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपति और सबसे अमीर इंसान एलन मस्क ने साल 2021 में एक टीवी शो के दौरान बताया था कि उन्हें Asperger Syndrome है। ये भी ऑटिज्म का एक हल्का रूप है। मस्क को बचपन से ही विज्ञान, तकनीक और जटिल समस्याओं को सुलझाने में गहरी रुचि थी। यही जुनून आगे चलकर इलेक्ट्रिक वाहनों, अंतरिक्ष तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में उनके बड़े शोधों का आधार बना। उनकी कहानी यह दिखाती है कि अलग तरीके से सोचने की क्षमता दुनिया बदलने वाले विचारों को जन्म दे सकती है।

अल्बर्ट आइंस्टीन

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में कुछ एक्सपर्ट्स और लेखकों का मानना है कि उनमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम से जुड़े कुछ गुण दिखाई देते थे, हालांकि इसका कोई आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि शुरुआती 4-5 साल तक उन्हें कुछ साधारण काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। यह भी कहा जाता है कि बचपन में वे अपेक्षाकृत देर से बोलने लगे थे और जटिल वैज्ञानिक विचारों पर असाधारण रूप से केंद्रित रहते थे। उनकी खोजों ने आधुनिक भौतिकी की दिशा बदल दी और वे आज भी प्रतिभा के सबसे बड़े प्रतीकों में गिने जाते हैं।

ग्रेटा थनबर्ग

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ दुनिया भर में आंदोलन की पहचान बन चुकी ग्रेटा थनबर्ग ने खुलकर बताया है कि वे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर हैं। इतना ही नहीं वह इसे अपनी 'सुपरपावर' कहती हैं क्योंकि इससे उन्हें किसी मुद्दे पर गहराई से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। उनकी पहल ने लाखों युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया है।

Autistic Pride Day का खास संदेश

Autistic Pride Day का खास दिन हमें यह सिखाता है कि अलग होना कोई कमी नहीं है। हर व्यक्ति अपनी क्षमताओं, सपनों और संभावनाओं के साथ दुनिया में आता है। ऑटिज्म के साथ जीवन जीने वाले लोग केवल प्रेरणा की कहानियां नहीं हैं, बल्कि वे इस बात का प्रमाण हैं कि प्रतिभा किसी एक खास ढांचे में सीमित नहीं होती है। इसलिए जब समाज स्वीकार्यता, सम्मान और सहयोग का हाथ बढ़ाता है, तब ये बच्चे और वयस्क अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ते हैं और दुनिया को एक नई दिशा भी दे सकते हैं।

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