Periods Pain Relief Habits: हर महीने पीरियड्स के दौरान दर्द, ऐंठन, थकान और मूड स्विंग जैसी परेशानियां कई महिलाओं की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। कुछ महिलाओं को तो दर्द इतना ज्यादा होता है कि उन्हें दर्द की दवा लेनी पड़ती है या काम से छुट्टी तक लेनी पड़ जाती है। लेकिन क्या पीरियड्स शुरू होने से पहले कुछ आसान बदलाव करके इस परेशानी को कम किया जा सकता है? आयुर्वेदिक डॉक्टर और हेल्थ इन्फ्लुएंसर डॉ. दीक्षा भावसार का कहना है कि कई मामलों में जवाब 'हां' हो सकता है। उनके अनुसार, शरीर को पहले से सही पोषण, पर्याप्त पानी और बेहतर पाचन का साथ मिले तो पीरियड्स अधिक आरामदायक हो सकते हैं। हालांकि, यह हर महिला के लिए इलाज नहीं है। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, हर महीने बढ़ता जाए या ब्लीडिंग असामान्य हो, तो इसकी जांच कराना जरूरी है।
पीरियड पेन से राहत के लिए 4 सिंपल आदतें
दर्द को हल्के में न लें
डॉ. दीक्षा भावसार बताती हैं कि आयुर्वेद में दर्द वाले पीरियड्स को केवल एक सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाता। इसे शरीर में वात असंतुलन, सूजन, कमजोर पाचन या पोषण की कमी से जोड़कर देखा जाता है। वहीं आधुनिक चिकित्सा भी मानती है कि पोषण, तनाव, नींद, सूजन और हार्मोनल बदलाव पीरियड्स के अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए केवल दर्द शुरू होने के बाद पेनकिलर लेने के बजाय शरीर को पहले से तैयार करना भी एक उपयोगी रणनीति हो सकती है।
डॉ. दीक्षा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक मरीज का अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, उनकी एक मरीज को लगभग हर महीने तेज दर्द की वजह से ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ती थी। उन्होंने पीरियड्स से एक सप्ताह पहले केवल चार आसान आदतें शुरू कीं। अगले मासिक चक्र में उन्हें न दर्द की दवा की जरूरत पड़ी और न ही छुट्टी लेनी पड़ी। हालांकि, डॉक्टर स्पष्ट करती हैं कि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए सभी को एक जैसे परिणाम मिलना जरूरी नहीं है।
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1. दिन की शुरुआत खजूर और अंजीर से करें
डॉ. दीक्षा सलाह देती हैं कि पीरियड्स शुरू होने से करीब सात दिन पहले रोज सुबह एक भीगा हुआ खजूर और एक भीगा हुआ अंजीर अपने नियमित ड्राई फ्रूट्स और बीजों के साथ लें। उनके अनुसार, ये आयरन, मैग्नीशियम और दूसरे जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो आयरन शरीर में खून बनने की प्रक्रिया के लिए जरूरी है, जबकि मैग्नीशियम मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। कुछ शोध बताते हैं कि पर्याप्त मैग्नीशियम कुछ महिलाओं में मासिक धर्म की ऐंठन की तीव्रता कम होने से जुड़ा हो सकता है। वहीं आयुर्वेद में खजूर और अंजीर को शरीर के पोषण और रक्त धातु को मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थों में माना जाता है।
अगर किसी महिला को डायबिटीज है या ब्लड शुगर नियंत्रित रखने की सलाह दी गई है, तो खजूर और अंजीर की मात्रा तय करने के लिए अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
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2. रोज खाएं एक पौष्टिक फूड
डॉ. दीक्षा के अनुसार, पीरियड्स से पहले वाले सप्ताह में रोजाना शकरकंद, अनार, एवोकाडो, हरा सेब, उबला हुआ सेब या उबली हुई नाशपाती में से कोई एक चीज जरूर खानी चाहिए।
इन फूड्स में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। फाइबर पाचन को बेहतर रखने में मदद करता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को संतुलित रखने में भूमिका निभा सकते हैं। बेहतर पाचन और संतुलित आहार कई महिलाओं में पीएमएस के दौरान होने वाली थकान, भारीपन और कब्ज जैसी परेशानियों को कम करने में मदद कर सकता है।
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3. सत्तू वाली छाछ क्यों
डॉ. दीक्षा भावसार रोजाना एक गिलास सत्तू वाली छाछ पीने की सलाह देती हैं। इसे बनाने के लिए एक भाग दही में छह भाग पानी मिलाकर दो चम्मच सत्तू, काला नमक, भुना जीरा, धनिया पाउडर और चाहें तो थोड़ा पुदीना पाउडर मिलाया जा सकता है।
उनके अनुसार, यह प्रोटीन और तरल पदार्थ दोनों उपलब्ध कराता है। आयुर्वेद में सत्तू और छाछ को पाचन का सहयोगी माना जाता है। पीरियड्स से पहले कई महिलाओं को पेट फूलना, भारीपन या एसिडिटी की शिकायत होती है। ऐसे में यह पेय पाचन को बेहतर रखने और शरीर में पानी की कमी न होने देने में मदद कर सकता है। यदि आपको बार-बार ब्लोटिंग की समस्या रहती है, तो इसे दोपहर के समय लेना ज्यादा आरामदायक हो सकता है।
4. चिया और सब्जा सीड्स की आदत
डॉ. दीक्षा के अनुसार, आधा चम्मच चिया सीड्स और आधा चम्मच सब्जा सीड्स को आधे गिलास पानी में भिगोकर शाम 5 बजे से पहले पी सकते हैं। इन दोनों बीजों में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जबकि चिया सीड्स ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी स्रोत हैं। इससे शरीर को हाइड्रेशन बनाए रखने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
आयुर्वेद में सब्जा की तासीर ठंडी मानी जाती है। हालांकि, सीधे तौर पर पीरियड्स के दर्द को कम करने पर इसके प्रभाव के वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। अगर किसी महिला को बार-बार ठंड लगती है या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो इसे नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा।
कब डॉक्टर से मिलें
डॉ. दीक्षा भावसार कहती हैं कि ये चार आदतें शरीर को पीरियड्स के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने का एक तरीका हैं। इनका उद्देश्य दर्द शुरू होने के बाद राहत देना नहीं, बल्कि पहले से शरीर को पोषण, हाइड्रेशन और बेहतर पाचन का सहयोग देना है।
लेकिन अगर हर महीने दर्द इतना ज्यादा हो कि सामान्य काम करना मुश्किल हो जाए, हर बार दर्द निवारक दवा लेनी पड़े, ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो, सात दिन से अधिक चले या पहले की तुलना में दर्द अचानक बढ़ जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस, यूटेराइन फाइब्रॉयड या पीसीओएस जैसी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे जरूरी कदम है।
पीरियड पेन से जूझने वाली महिलाओं के लिए इंस्टेंट गाइड
| क्या करें | कब शुरू करें | क्या मदद मिल सकती है |
|---|---|---|
| भीगा खजूर और अंजीर | पीरियड्स से 7 दिन पहले | आयरन, मैग्नीशियम और पोषण की पूर्ति में मदद |
| एक पौष्टिक फल/सब्जी | रोजाना | फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन मिलते हैं |
| सत्तू वाली छाछ | रोज, बेहतर हो तो दोपहर में | हाइड्रेशन, प्रोटीन और पाचन को सहयोग |
| चिया और सब्जा | शाम 5 बजे से पहले | फाइबर, ओमेगा-3 और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद |
