Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Explained: अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा का अदृश्य कवच US Secret Service; जानें ट्रंप को बचाने वाली 'अभेद दीवार' कैसे करती है काम

व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर चर्चा में आई US Secret Service आखिर क्या है। 1865 में जालसाजी रोकने के लिए बनी एजेंसी आज अमेरिकी राष्ट्रपति की सबसे मजबूत सुरक्षा ढाल कैसे बन गई। जानिए इसका इतिहास, जिम्मेदारियां और सुरक्षा तंत्र की पूरी कहानी।

Image
Photo : Times Now Digital
FBI और CIA से कितनी अलग है USSS
Authored by: Nishant Tiwari
Updated Apr 26, 2026, 09:25 IST
Follow on Google News

US Secret Service: वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में आयोजित 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर' के दौरान जब अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी, तो पूरी दुनिया की सांसें थम गईं। लेकिन वहां मौजूद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस (USSS) के एजेंट्स के लिए यह वह पल था जिसके लिए वे बरसों से ट्रेनिंग लेते हैं। पलक झपकते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया ट्रंप को सुरक्षित घेरे में लेकर मंच से बाहर निकाला गया और हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना न केवल इस एजेंसी की मुस्तैदी को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अमेरिकी लोकतंत्र में सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी आखिर कैसे काम करती है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस क्या है, इसका इतिहास कितना अनोखा है और यह दुनिया की सबसे खास सुरक्षा एजेंसी कैसे बनी।

क्या है US Secret Service?

यूएस सीक्रेट सर्विस अमेरिका की एक संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसी (Federal Law Enforcement Agency) है, जो वर्तमान में होमलैंड सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security) के अधीन काम करती है। इसके पास दोहरी जिम्मेदारी है। पहली तो सुरक्षा और दूसरी जांच। ये एजेंसी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उनके परिवारों, पूर्व राष्ट्रपतियों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की रक्षा करती है साथ ही वित्तीय अपराधों, जैसे मुद्रा जालसाजी और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए भी काम करती है।

US Secret Service दिलचस्प इतिहास: जाली नोटों से राष्ट्रपति की सुरक्षा तक

सीक्रेट सर्विस का इतिहास किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। इसकी स्थापना 1865 में हुई थी, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शुरुआत में इसका काम राष्ट्रपति को बचाना था ही नहीं। 1865 में, जब Abraham Lincoln अमेरिका के राष्ट्रपति थे, तब देश में नकली नोट एक बहुत बड़ी समस्या बन चुके थे। उस समय अनुमान था कि देश में चल रही लगभग एक-तिहाई करेंसी नकली थी। इससे देश की अर्थव्यवस्था ढहने के कगार पर थी। इसी संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने सीक्रेट सर्विस को ट्रेजरी विभाग (Treasury Department) के तहत बनाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। विडंबना यह रही कि जिस दिन लिंकन ने इस एजेंसी की स्थापना पर हस्ताक्षर किए, उसी दिन उनकी हत्या कर दी गई। उस समय तक राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती 30 सालों तक इनका एकमात्र काम नकली नोट छापने वालों को पकड़ना था। तो सवाल यह है कि आखिर सुरक्षा की जरूरत कैसे पड़ी? बता दें कि राष्ट्रपति लिंकन, जेम्स गारफील्ड और विलियम मैककिनले की हत्याओं ने अमेरिका को हिलाकर रख दिया। इन घटनाओं के बाद अमेरिका को अहसास हुआ कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए एक समर्पित फोर्स चाहिए। 1901 में मैककिनले की हत्या के बाद ही सीक्रेट सर्विस को औपचारिक रूप से राष्ट्रपति की स्थायी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई।

सीक्रेट सर्विस के एजेंट राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की सुरक्षा में (Library of Congress)

सीक्रेट सर्विस के एजेंट राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की सुरक्षा में (Library of Congress)

कैसे काम करती है सीक्रेट सर्विस?

सीक्रेट सर्विस के काम करने का तरीका 'साये की तरह' साथ चलने से कहीं अधिक जटिल है।इसे समझने के लिए इसे तीन हिस्सों में देखा जा सकता है:

1. पूर्वानुमान और एडवांस रेकी (Advance Operations)

राष्ट्रपति के किसी भी स्थान पर पहुंचने से कई दिन पहले ही सीक्रेट सर्विस की टीम वहां पहुंच जाती है। वे उस स्थान के हर एक्जिट गेट्स, वेंटिलेशन सिस्टम, छतों और यहां तक कि स्थानीय अस्पतालों की क्षमता का भी आकलन करते हैं।

2. सुरक्षा घेरा (Protective Detail)

जब राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से कहीं मौजूद होते हैं, तो सुरक्षा की कई परतें होती हैं। एजेंट्स हर समय 'इंसानी ढाल' की तरह तैनात रहते हैं और उन्हें सेकंडों में प्रतिक्रिया देने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। उनका कम्युनिकेशन सिस्टम बेहद हाई‑टेक होता है, जिससे किसी भी स्थिति में तुरंत और सटीक कार्रवाई संभव हो पाती है।

इनर सर्कल में मौजूद एजेंट्स, राष्ट्रपति के सबसे करीब होते हैं और हमला होने पर उनके लिए ढाल (Human Shield) बन जाते हैं। इसके अलावा काउंटर स्नाइपर टीम भी इनका हिस्सा होती है, ये छतों पर तैनात होते हैं और दूर से आने वाले खतरों पर नजर रखते हैं। व्हाइट हाउस और विदेशी दूतावासों के परिसर की सुरक्षा संभालने के लिए यूनिफॉर्मड डिवीजन भी सीक्रेट सर्विस का हिस्सा होता है।

3. आधुनिक तकनीक और हथियार

इन एजेंट्स के पास अत्याधुनिक हथियार और संचार उपकरण होते हैं। वे न केवल शारीरिक रूप से फिट होते हैं, बल्कि उन्हें आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Medical Emergency) की भी विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। राष्ट्रपति की कार, जिसे 'द बीस्ट' (The Beast) कहा जाता है, अपने आप में एक अभेद्य किला है जो बम और रासायनिक हमलों को झेल सकता है।

व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर; सबसे ताजा मिसाल

26 अप्रैल 2026 की रात वॉशिंगटन डीसी में जो हुआ, उसने सीक्रेट सर्विस की काम करने के तरीके को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा। पत्रकार, राजनेता और सेलिब्रिटी समेत इस हाई-प्रोफाइल इवेंट में लगभग 2,600 लोग मौजूद थे। मेंटलिस्ट ऑज पर्लमैन अपनी परफॉर्मेंस दे रहे थे कि अचानक करीब 7-8 गोलियों की आवाज सुनाई दी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप भाषण देने की तैयारी में थे। इस समय USSS के रिस्पॉन्स टाइम की झलक मिली। जारी हुए विडियो में देखा गया कि गोलियां चलते ही एक सेकंड के भीतर एजेंट्स ने राष्ट्रपति को चारों ओर से घेर लिया। यह एक 'कोड रेड' स्थिति थी। सुरक्षा घेरा इतना मजबूत था कि भीड़ में अफरा-तफरी के बावजूद राष्ट्रपति को एक खरोंच तक नहीं आई। फिर सुरक्षाबलों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और हमलावर को मौके पर ही काबू में कर लिया।

इतिहास के पन्नों से... चुनौतियां और विफलताएं

हालांकि सीक्रेट सर्विस को दुनिया की सबसे चौकस एजेंसी माना जाता है, लेकिन इसका इतिहास चुनौतियों से भरा रहा है। 2024 का ट्रंप पर हुआ बहुचर्चित हमला सबको याद होगा। जुलाई 2024 में बटलर, पेंसिल्वेनिया में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले को एजेंसी की दशकों की सबसे बड़ी विफलता माना गया, जिसके बाद तत्कालीन निदेशक किमबर्ली चीटल को इस्तीफा देना पड़ा था। अप्रैल 2022 और 2026 में भी व्हाइट हाउस की दीवार फांदने की कोशिशें हुईं, जिन्होंने सुरक्षा पर सवाल उठाए।

गोली चलने के बाद सुरक्षाकर्मियों से घिरे ट्रंप (AP)

गोली चलने के बाद सुरक्षाकर्मियों से घिरे ट्रंप (AP)

सीक्रेट सर्विस बनाम अन्य एजेंसियां (FBI और CIA)

अक्सर लोग सीक्रेट सर्विस को FBI या CIA के जैसा समझते हैं, लेकिन इनमें बुनियादी अंतर है। FBI (Federal Bureau of Investigation) घरेलू अपराधों की जांच करती है जैसे आतंकवाद या भ्रष्टाचार। वहीं CIA (Central Intelligence Agency) विदेशों में जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने का काम करती है लेकिन सीक्रेट सर्विस का एकमात्र मिशन राष्ट्रपति की 'व्यक्तिगत सुरक्षा' और 'वित्तीय धोखाधड़ी' से जुड़े मामले देखना है।

कुल मिलाकर देखें तो अमेरिकी सीक्रेट सर्विस केवल एक सुरक्षा दस्ता नहीं है; यह अमेरिकी सत्ता के प्रतीक की सुरक्षा की गारंटी है। जैसा कि व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर की घटना ने दिखाया, इन एजेंट्स के लिए विफलता का कोई विकल्प नहीं है। चाहे वह नकली नोटों का गिरोह हो या सिरफिरा हमलावर, यह एजेंसी हर उस खतरे के सामने खड़ी है जो अमेरिका की स्थिरता को चुनौती दे सकता है।

End of Article