Harvard University Dispute: अमेरिका से एक बड़ी खबर उस वक्त सामने आई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) की विदेशी छात्रों को दाखिला देने की अर्हता रद्द कर दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने आंतरिक सुरक्षा विभाग (DHS) की सचिव द्वारा हार्वर्ड विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्र के हवाले से यह खबर दी नोएम ने पत्र में लिखा, 'मैं आपको यह सूचित करने के लिए लिख रही हूं कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्र और शैक्षणिक आदान-प्रदान के प्रवेश कार्यक्रम का प्रमाणन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।' यह घटनाक्रम, विश्वविद्यालय पर राष्ट्रपति के एजेंडे के अनुरूप चलने के लिए दबाव डालने के प्रशासन के प्रयासों के तहत उठाया गया एक बड़ा कदम है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से कहा गया था कि यह निर्णय तुरंत प्रभावी होता है। यह कदम वर्तमान में यूनिवर्सिटी में नामांकित लगभग 6800 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भी प्रभावित करता है। डीएचएस ने इन छात्रों को अमेरिका में अपनी कानूनी आव्रजन स्थिति बनाए रखने के लिए अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका के मैसाचुसैट्स शहर के कैंब्रिज में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय है, जो इवी लीग का सदस्य है। इसकी स्थापना 1636 में औपनिवेशिक मैसाचुसैट्स कानून के तहत हुआ, हार्वर्ड अमेरिका में उच्च शिक्षा का सबसे पुराना संस्थान है।
ये कदम करीब 6800 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भी प्रभावित करता है
प्रशासन ने कहा कि हार्वर्ड को 2025-26 शैक्षणिक साल के लिए F-1 या J-1 वीजा पर किसी भी विदेशी नागरिक को प्रवेश देने से रोकता है।
यह कदम वर्तमान में यूनिवर्सिटी में नामांकित करीब 6800 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भी प्रभावित करता है।

Harvard vs Trump
क्या है ये विवाद है, चीन से कनेक्शन?
ट्रंप सरकार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समन्वय करने का आरोप लगाया था और कहा कि हार्वर्ड ने 2024 में चीन के एक अर्धसैनिक संगठन के सदस्यों की मेजबानी और प्रशिक्षण दिया था, जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समन्वय में था वहीं ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में हार्वर्ड पर आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी ने 'अमेरिका विरोधी और आतंकवादी विचारधारा वाले छात्रों' को यहूदी छात्रों पर हमला करने की छूट दी और सुरक्षा में चूक की इसे लेकर ट्रंप प्रशासन खासा संजीदा है।
चीन के स्टूडेंट्स पर पड़ेगा इसका सीधा असर!
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में काफी तादाद में चीनी स्टूडेंटस पढ़ाई करते हैं ट्रंप सरकार के इस कदम से उन तमाम चीन के छात्रों पर असर पड़ेगा ऐसा कहा जा रहा है जो हार्वर्ड के अंतर्राष्ट्रीय ग्रुप का एक बड़ा और अहम हिस्सा हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे के तहत अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों की सख्त संघीय निगरानी के तहत इस तरीके के कदम उठाए जा रहे हैं उधर हार्वर्ड के अध्यक्ष एलन ने कहा है कि यूनिवर्सिटी ने यहूदी विरोधी घटनाओं से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं और वह संविधान में दिए गए अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी।

Harvard University Dispute News
हार्वर्ड ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा किया
वहीं इस कार्रवाई के दौरान हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने ट्रंप प्रशासन के उस निर्णय को चुनौती दी है जिसमें आइवी लीग स्कूल पर विदेशी छात्रों के नामांकन पर रोक लगाई गई है। विश्वविद्यालय ने इसे व्हाइट हाउस की राजनीतिक मांगों की अवहेलना करने के लिए असंवैधानिक प्रतिशोध बताया है।
ट्रंप प्रशासन के फैसले पर लगाई रोक
वहीं इस केस में ताजा घटनाक्रम उस वक्त सामने आया जब एक संघीय न्यायाधीश ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को दाखिला देने की पात्रता को रद्द करने संबंधी ट्रंप प्रशासन के फैसले पर रोक लगा दी है।इस अस्थायी आदेश ने सरकार को छात्र और विनिमय आगंतुक कार्यक्रम में हार्वर्ड के प्रमाणीकरण को रद्द करने से रोक दिया है। इस कार्यक्रम के तहत स्कूल को अमेरिका में अध्ययन करने के लिए वीजाधारक अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मेजबानी करने की अनुमति दी जाती है। हार्वर्ड ने शुक्रवार को मैसाचुसेट्स में अमेरिकी जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया था।
