Palestinian State Recognition: इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध का असर अब दुनियाभर में दिखाई दे रहा है। फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई देशों ने फिलिस्तीन को आजाद मुल्क के तौर पर मान्यता दे दी, पर इटली की मेलोनी सरकार ने फिलिस्तीन को मान्यता देने से इनकार कर दिया। उनके इस फैसले का असर देशभर में दिखाई दिया। मिलान, रोम, बोलोनिया, नेपल्स, ट्यूरिन फ्लोरेंस और सिसिली में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें, रेलवे स्टेशन व बंदरगाहों का घेराव किया। सरकारी संस्थानों के बाहर प्रदर्शन किया और 'फ्री फिलिस्तीन' की तख्तियां दिखाईं और नारे लगाए।
देखते ही देखते स्थितियां बिगड़िने लगी। ऐसे में अब प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को अपने फैसले का बचाव करना पड़ा। उन्होंने एक नया बयान जारी करते हुए कहा कि वह फिलिस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता देने का विरोध नहीं कर रही हैं तो चलिए विस्तार से समझते हैं कि आखिर इजरायल के युद्ध का इटली पर क्या असर पड़ा और क्यों इटलीवासी सड़कों पर उतर आए।
इटली में क्यों हो रहे प्रदर्शन?
7 अक्टूबर, 2023 से इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थितियां ऐसी हो गईं कि गाजा से भूख से तड़पते बच्चों की तस्वीरें सामने आ रही हैं जिसे देख हर कोई दुखी है। साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देशों ने फिलिस्तीन को आजाद मुल्क की मान्यता दे दी, लेकिन इटली सरकार ने तात्कालिक मान्यता देने का कोई फैसला नहीं किया इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया और फिलिस्तीन समर्थकों ने जमकर उत्पाद मचाया।
प्रदर्शनकारी गाजा में पैदा हुए मानवीय संकट का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन ट्रेड यूनियन द्वारा बुलाए गए 24 घंटे की हड़ताल का हिस्सा थे। इससे देशभर में ट्रांसपोर्ट, स्कूल, मेट्रो और बंदरगाह सेवाएं प्रभावित हुईं और कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। दरअसल, प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि इटली सरकार इजरायल के साथ रिश्तों को खत्म कर दें और फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश घोषित करें।
Italy Protest
मेलोनी सरकार का क्या है पक्ष
मेलोनी सरकार फिलिस्तीन को आजाद मुल्क घोषित करने से इनकार करती रही है, लेकिन हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार बैकफुट पर नजर आई और उन्होंने शर्तों के साथ फिलिस्तीन को आजाद मुल्क घोषित करने की बात कही। मेलोनी ने मंगलवार को कहा कि इटली फिलिस्तीन को देश की मान्यता तभी देगा जब सभी इजरायली बंधकों को मुक्त किया जाए और हमास आतंकवादी समूह को किसी भी सरकारी भूमिका से बाहर रखा जाए।
मेलोनी दक्षिणपंथी सरकार का नेतृत्व कर रही हैं, जो यूरोपीय संघ में इजरायल की सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक रही है। मेलोनी ने कहा कि मैं फिलिस्तीन की मान्यता के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन हमें सभी प्राथमिकताएं निर्धारित करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने संसद में इस मुद्दे से जुड़ा एक प्रस्ताव पेश करने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि हमास पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डाला जाना चाहिए, न कि इजरायल पर।
कितने देशों ने फिलिस्तीन को दी मान्यता
फिलिस्तीन को अब तक फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया सहित 152 देशों ने राष्ट्र के तौर पर मान्यता दे दी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के कुल सदस्यों में से लगभग 78 फीसदी सदस्यों ने फिलिस्तीन को मान्यता दे दी है, जबकि इजरायल, अमेरिका, इटली जैसे देशों ने अबतक फिलिस्तीन को कोई मान्यता नहीं दी है और मान्यता देने के पक्ष में नजर भी नहीं आ रहे हैं।
