Pakistan Floods: बदहाल पाकिस्तान अब कुदरत की मार झेल रहा है। कुछ वक्त पहले तक पाकिस्तान का गला सूख रहा था। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधुजल समझौते को स्थगित कर दिया था जिसके बाद पाकिस्तान ने भारत से बातचीत करना चाह रहा था ताकि उसकी प्यास मिट सके, लेकिन अब आलम ऐसा है कि पाकिस्तान पानी-पानी हो गया है और वहां की जनता त्राहिमाम कर रही है। चौतरफा मुसीबतों का सामना कर रहे पाकिस्तान का साथ अब कुदरत ने भी छोड़ दिया तभी तो उत्तरी पाकिस्तान की जनता बेहाल है।
700 से अधिक लोगों ने तोड़ा दम
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और राष्ट्रीय प्राधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान में जून के अंत से भारी मानसूनी बारिश और अचानक आई बाढ़ की वजह से कम से कम 739 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोगों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा। खैबर पख्तूनख्वा प्राप्त बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा है और यहां 15 अगस्त से अब तक मरने वालों की संख्या 380 तक पहुंच गई है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के मुताबिक, पूरे पाकिस्तान में 26 जून से 21 अगस्त तक मानसून संबंधी घटनाओं में 457 पुरुषों, 113 महिलाओं और 180 बच्चों की मौत हो चुकी है तथा 978 अन्य लोग घायल हुए हैं और 2400 ज्यादा मकान तबाह हो गए, जबकि हजार से ज्यादा जानवरों की मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पाकिस्तान ने हाल के सालों में विनाशकारी मानसून का सामना किया है। 2022 में बाढ़ की वजह से 1700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और लाखों लोग विस्थापित हुए थे।
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अचानक क्यों आती है बाढ़
पाकिस्तान में मची कुदरती तबाही को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता व्यक्त की है। यहां 1947 के बाद से अब तक 29 बार विनाशकारी बाढ़ आ चुकी है जिसने कई शहरों को तबाह कर दिया, लेकिन पाकिस्तान में अचानक बाढ़ आती क्यों है? यह सवाल हर किसी के ज़हन में बना हुआ है तो चलिए इसके बारे में समझते हैं।
पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में 7,000 से ज्यादा ग्लेशियर हैं और तेजी से बढ़ते तापमान की वजह से यह ग्लेशियर पिघल रहे हैं जिसकी वजह से बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। पिछलते ग्लेशियरों से बनी झीलें बढ़ते तापमान की वजह से अचानक टूट सकती हैं जिसकी वजह से सैलाब आता है।
तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर
वैश्विक तापमान वृद्धि की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिछल रहे हैं जिसकी वजह से नदियों का जलस्तर अचानक से बढ़ जाता है और मानसूनी बारिश के बाद बाढ़ की स्थितियां पैदा हो जाती है। इसके अतिरिक्त ग्लेशियरों के पिघलने से मिट्टी अस्थिर होती है और लैंडस्लाइड की घटनाएं बढ़ती हैं और जब झीलें बढ़ते तापमान की वजह से टूटती हैं तो अस्थिर मिट्टियों को बहा ले जाती हैं।
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20 अरब से ज्यादा स्वाहा
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश, बाढ़ और बादल फटने की वजह से सरकारी बुनियादी ढांचे को 20 अरब रुपये का नुकसान हुआ। संचार एवं निर्माण (C&W) विभाग ने हाल में भारी बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान पर अपनी प्रारंभिक आकलन रिपोर्ट मुख्यमंत्री अमीन अली गंडापुर को सौंपी। बकौल रिपोर्ट, 20 विभागों की कम से कम 603 सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा नुकसान बट्टाग्राम जिले में हुआ जहां 214 संपत्तियां नष्ट हो गई। स्वात में 97, बाजौर में 65 और मनसेहरा में 58 संपत्तियां नष्ट हुईं।
नष्ट हुई संपत्तियों में 37 स्कूल, 83 सड़कें और 10 पुल शामिल हैं। सिंचाई के बुनियादी ढांचे को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ। प्रांत में 226 नहरें और 68 जल आपूर्ति योजनाएं उपयोग के लायक नहीं रह गयी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले सिंचाई विभाग ने 10.3 अरब रुपये से ज़्यादा का नुकसान होने की बात कही है।
