NEET Paper Leak Explained: देश को नीट पेपर लीक ने झकझोर कर रख दिया है। 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अंधकार में डालने वाले इस कांड के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पेपर रद्द कर दिया है। सीबीआई इस मामले की जांच करेगी। लेकिन सवाल अभी भी वहीं अटका हुआ है, आखिर नीट का पेपर इतनी सुरक्षा के बाद भी दलालों तक पहुंचा कैसे? नीट का पेपर इसी साल विवादों में नहीं है, 2024 में भी यह, लीक को लेकर विवादों में था, सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था, बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसके बाद एनटीए में कई बदलाव हुए थे, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इस बार पेपर न केवल लीक हुआ बल्कि देश के कई राज्यों तक पहुंचा।
नीट पेपर लीक का केस कैसे खुला?
यह मामला राजस्थान से खुला। दरअसल एक गेस पेपर हाथ लगा, जिसमें नीट एग्जाम के लगभग सभी सवाल मौजूद थे, यहीं से पेपर लीक का शक हुआ। गेस पेपर जयपुर के एक प्रेस से छपी थी, लिहाजा राजस्थान SOG सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी।
नीट पेपर लीक का केरल कनेक्शन
नीट पेपर लीक का जो ये मामला सामने आया है, उसकी शुरुआत केरल से हुई। केरल में डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले एक छात्र ने अपने पिता को मोबाइल पर गेस पेपर भेजा जो पीजी चलाते हैं। छात्र ने अपने पिता से कहा कि ये गेस पेपर सीकर से एक दोस्त ने भेजा है, इस गेस पेपर को हॉस्टल के छात्रों को दे दें। पिता ने छात्रों को गेस पेपर दे दिया और परीक्षा के बाद एक टीचर से इस गेस पेपर पर बात की। तब पता चला कि इसमें NEET में पूछे गए बॉयोलॉजी के सभी 90 सवाल लिखे थे, केमेस्ट्री के सभी 45 सवाल मौजूद थे।
कहां से लीक हुआ पेपर?
नीट पेपर लीक की इस खेल की शुरुआत होती है, नासिक से। नासिक की प्रिटिंग प्रेस से नीट का पेपर कॉपी किया गया था। नासिक से पेपर हरियाणा के गुरुग्राम में एक डॉक्टर के पास पहुंचा। डॉक्टर ने यह पेपर जयपुर भेजा। जयपुर से पेपर जमवारामगढ़ पहुंचा। जमवारामगढ़ से सीकर और फिर सीकर से देश के कई राज्यों में, जिसमें केरल, जम्मू कश्मीर, बिहार शामिल है।
नीट पेपर लीक के लिए बनाया हुआ वाट्सअप ग्रुप
नीट पेपर लीक का मास्टरमाइंड कौन?
नीट पेपर लीक मामले में दो अहम नाम सामने आए हैं। मनीष यादव को कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जबकि राकेश मंडावरिया पर पेपर डिस्ट्रीब्यूट करने का आरोप है। SOG ने दोनों को हिरासत में लिया है। मनीष यादव को जयपुर से पकड़ा गया बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस मामले में आधिकारिक FIR दर्ज नहीं हुई है।
राजस्थान SOG के हाथ क्या-क्या लगा?
राजस्थान SOG ने इस मामले की जांच काफी तेजी से की है और कई लोगों को हिरासत में लिया है।जांच एजेंसियों को “Private Mafia” नाम का एक व्हाट्सऐप ग्रुप भी मिला है। इस ग्रुप में करीब 400 सदस्य बताए जा रहे हैं। ग्रुप के कैप्शन में लिखा था कि यह ग्रुप सिर्फ लीक एग्जाम पेपर अपलोड करने के लिए बनाया गया है और पेपर्स को ग्रुप से बाहर फॉरवर्ड न करने की चेतावनी भी दी गई थी। SOG सूत्रों का दावा है कि एजेंसी ने मामले को लगभग सुलझा लिया है और CBI को हैंडओवर करने से पहले केस दर्ज करने की तैयारी चल रही है।
विवाद बढ़ने पर रद्द हुआ पेपर
NEET पेपर लीक केस से NTA सवालों के घेरे में है। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे का दावा है कि नीट के अब तक कम से कम 4 पेपर लीक हो चुके हैं - 2026, 2024, 2021, 2016। जब विवाद बढ़ा, तब एनटीए 12 मई को बैकफुट पर आई और परीक्षा को कैंसिल करने का ऐलान कर दिया। साथ ही जांच को सीबीआई के हवाले कर दिया गया। एजेंसी ने कहा कि प्राप्त सूचनाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा साझा किए गए निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि ’वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं है।’ उसने कहा, ’’पुनः होने वाली परीक्षा की तिथियां और उनके लिए जारी किये जाने वाले प्रवेश पत्र की समय-सारणी अगले कुछ दिनों में एजेंसी के आधिकारिक माध्यमों से सूचित की जाएगी।’’
सवालों के घेरे में NTA
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की स्थापना 2017 में देशभर की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को पारदर्शी और तकनीकी रूप से बेहतर तरीके से आयोजित कर ने के उद्देश्य से की गई थी। NTA फिलहाल NEET, JEE Main, CUET, UGC-NET समेत कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी लगातार विवादों और आरोपों के केंद्र में रही है। UGC-NET परीक्षा भी विवादों में रही। प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी थी। NTA पर कई बार रिजल्ट प्रोसेसिंग में पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे। कई परीक्षाओं में पुलिस ने ऐसे गिरोह पकड़े जो पैसे लेकर दूसरे उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाते थे। इससे NTA की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
