एक्सप्लेनर्स

एक और जंग! क्या इजराइल से बदला ले पाएगा ईरान? दुनिया पर कितना होगा असर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 14, 2024, 04:40 PM IST

Iran Israel War News Hindi: दुनिया में इस समय तीन मोर्चों पर यद्ध छिड़े हुए हैं। पहला यूक्रेन और रूस (Russia Ukraine War) के बीच, जिस कारण दुनिया पर अनाज संकट छाया हुआ है और बड़ी मात्रा में आर्थिक प्रतिबंध भी लगे हुए हैं। दूसरा हमास और इजराइल (Hamas War) के बीच, वहीं अब ईरान और इजराइल (Iran Israel Conflict) के बीच युद्ध की आशंका मात्र से दुनिया पर भीषण महंगाई के बादल घिर आए हैं। आइए जानते हैं ईरान और इजराइल के बीच अभी ताजा हालात क्या हैं? ईरान ने यह हमला क्यों किया? ईरान की सैन्य क्षमता क्या है? तीन मोर्चों पर छिड़े युद्ध का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा...?

Image

इजराइल ने तैनात किया एयर डिफेंस सिस्टम

Photo : AP

Iran Israel War News Hindi: ईरान ने आज सुबह इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया। यह हमला मुख्य रूप से यरूशलेम, नेगेव रेगिस्तान, डेड सी और उत्तर में इजरायली कब्जे वाले गोल हाइट्स व वेस्ट बैंक को निशाना बनाकर किए गए। इजराइल की ओर से कहा गया है कि 300 से अधिक ड्रोन ओर मिसाइल दागी गईं, जिनमें 99 प्रतिशत को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इजराइल पर इस ताजा हमले ने मिडिल ईस्ट में एक और जंग की दस्तक दे दी है।

दरअसल, इजराइल पहले से ही हमास के खिलाफ जंग लड़ रहा है और इसमें दोनों पक्षों को काफी नुकसान हो चुका है। मिडिल ईस्ट में छिड़ी इस जंग का खामियाजा दुनिया पहले से ही भुगत रही है और अब ताजा हमले ने दुनिया पर संकट बढ़ा दिया है। वहीं, यूरोप में यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध भी खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा है। आइए जानते हैं ईरान और इजराइल के बीच अभी ताजा हालात क्या हैं? ईरान ने यह हमला क्यों किया? ईरान की सैन्य क्षमता क्या है? तीन मोर्चों पर छिड़े युद्ध का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा...?

ईरान और इजराइल में ताजा हालात

ईरान के इजराइल पर इस हमले ने पश्चिम एशिया को एक क्षेत्रीय युद्ध की तरफ धकेल दिया है। इजराइल की ओर से कहा गया है कि उनसे 99 प्रतिशत मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था। अमेरिका ने कहा है कि ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों को मार गिराने में उसने इजराइल की मदद की है। हालांकि, हमले के बाद से इजराइल में हर कहीं से साइरन की आवाजें सुनाई दे रही हैं। इजराइली सेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हैगारी ने का कहना है कि ईरान ने बड़ी संख्या में ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलेस्टिक मिसाइल दागीं, जिनमें से अधिकतर को इजराइल की सीमाओं के बाहर नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि युद्धक विमानों ने इजराइली हवाई क्षेत्र के बाहर 10 से अधिक क्रूज मिसाइलों को तबाह कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइल इजराइल में गिरीं। एक हमले में दक्षिणी इजराइल के बदूइन अरब शहर में 10 वर्षीय लड़की गंभीर रूप से घायल हो गई। एक अन्य मिसाइल सैन्य अड्डे पर गिरी जिससे वहां मामूली नुकसान हुआ है।

Iran Israel War

इजराइल पर ईरानी ड्रोन हमला

ईरान ने यह हमला क्यों किया?

इजराइल पर हुए ईरानी हमले की जड़ें हमास युद्ध से जुड़ी हुई हैं। दरअसल, हमास के खिलाफ जंग को लेकर ईरान और इजराइल के बीच तनाव की स्थिति पहले से ही बनी हुई थी। युद्ध शुरू होने के बाद ही लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला आतंकियों ने इजराइल की उत्तरी सीमा पर हमला किया था, इसके बाद से दोनों ओर से हमले शुरू हो गए। इराक, सीरिया और यमन में ईरान समर्थित समूह इजराइल को निशाना बनाते हुए रॉकेट और मिसाइल दाग रहे थे। हालात पहले से ही गंभीर थे कि इसी बीच एक अप्रैल को सीरिया स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हवाई हमला हुआ। इस हमले में एक शीर्ष ईरानी जनरल व छह अन्य सैन अधिकारियों की मौत हो गई थी। ईरान ने इस हमले के लिए इजराइल को दोषी ठहराया था और बदला लेने का ऐलान कर दिया था। बता दें, यह पहली बार है जब ईरान ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शुरू हुई दशकों की दुश्मनी के बाद इजराइल पर सीधे तौर पर हमला किया है।

अब ईरान की सैन्य क्षमता के बारे में जानते हैं...

दुनिया के लिहाज से ईरान दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी मिलिट्री ताकत है। एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल मिडिल ईस्ट में ईरान सैन्य ताकत में सबसे आगे है। उनकी सेना में 580,000 लाख सैनिक हैं, जबकि 2 लाख के आसपास रिजर्व फौज है। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स हाईली ट्रेंड फोर्स मानी जाती है। वहीं, ईरान को दुनिया के सबसे बड़ा और आधुनिक हथियारों से लैस चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला का भी समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा ईरान के पास एक से एक घातक बैलेस्टिक, हाइपरसोनिक मिसाइलें भी हैं। कई पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान ने परमाणु हथियार भी डेवलप कर लिए हैं।

इजराइल-ईरान संघर्ष

इजराइल-ईरान संघर्ष

दुनिया पर कैसे पड़ेगा असर...

दुनिया में इस समय तीन मोर्चों पर यद्ध छिड़े हुए हैं। पहला यूक्रेन ओर रूस के बीच, जिस कारण दुनिया पर अनाज संकट छाया हुआ है और बड़ी मात्रा में आर्थिक प्रतिबंध भी लगे हुए हैं। दूसरा हमास और इजराइल के बीच, वहीं अब ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आशंका मात्र से दुनिया पर भीषण महंगाई के बादल घिर आए हैं। बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। बीते दिनों की ही बात करें तो 12 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत की वद्धि हुई थी और ब्रेंट क्रूड 90.45 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के लिए व्यापारिक मार्ग बंद हो सकता है, ऐसे में कीमतें 120 डॉलर से 130 डॉलर प्रति बैरल भी पहुंच सकती हैं, जिसका असर भारत समेत दुनिया भर के देशों में देखा जा सकता है।

ईरान के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने की बैठक

ईरान के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने की बैठक

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article