Yunus Cites Crisis Amid Pressure: शेख हसीना को देश छोड़ने से मजबूर करने के बाद अब बांग्लादेश दोबारा उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। कार्यवाहक सरकार के प्रमुख मो. यूनुस के खिलाफ लगातार अविश्वास बढ़ रहा है जिसके चलते देश में अराजकता जैसे हालात हैं। भारत को लगातार आंखें दिखाने वाले बांग्लादेश अब ऐसे संकट से गुजर रहा है जिससे इस देश का भविष्य अनिश्चित दिखने लगा है। एक तरफ यूनुस अपनी गद्दी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और छात्रों का संगठन अब जल्द से जल्द चुनाव चाहता है। इसके अलावा सेना ने भी यूनुस पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह पद छोड़ें और जल्द से जल्द चुनाव करवाएं। लेकिन यूनुस ने साफ कर दिया है कि वह सत्ता छोड़ने के मूड में नहीं हैं और अगर दबाव डाला गया तो सड़कों पर फिर विद्रोह हो सकता है। यूनुस के सामने अब भारी मुश्किल पैदा हो गया है और उनके मंसूबों पर पानी फिरता दिख रहा है।
यूनुस ने बयां किया दर्द
बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस भी मौजूदा हालात को लेकर नाउम्मीद हो गए हैं। यूनुस ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जब से सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया है, तब से देश के अंदर और बाहर दोनों जगह युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। यूनुस ने राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक में ये टिप्पणी की। बांग्लादेशी समाचार आउटलेट द डेली स्टार के अनुसार, यूनुस ने बांग्लादेश में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के 20 नेताओं से मुलाकात की। यह बैठक राजकीय अतिथि गृह, जमुना में दो अलग-अलग सत्रों में हुई। बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी के नेताओं ने शनिवार को यूनुस से अलग-अलग मुलाकात की थी।
देश के अंदर और बाहर दोनों जगह युद्ध जैसी स्थिति
मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने बैठक के दौरान प्रोफेसर यूनुस के हवाले से कहा कि देश के अंदर और बाहर दोनों जगह युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसने हमें आगे बढ़ने से रोक दिया है, सब कुछ ध्वस्त कर दिया है। यह बैठकें ऐसी खबरों के बीच हुईं जब यूनुस ने हाल के घटनाक्रमों पर निराशा जताते हुए पद छोड़ने की बात कही थी। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि देश को नुकसान पहुंचाने जैसा कोई काम नहीं करें। उन्होंने कहा, हम सब साथ बैठे तो मुझे विश्वास है। अगर मैं निष्पक्ष चुनाव कराने में विफल रहा तो मैं दोषी माना जाऊंगा। शफीकुल ने कहा कि पार्टी नेताओं ने यूनुस की बात सुनी और अंतरिम सरकार के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।
सेना से बढ़ रहा टकराव
वहीं, बांग्लादेश में पिछले हफ्ते अंतरिम सरकार और सेना के बीच टकराव भी खुलकर सामने आया था। आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमा ने 22 मई को सैन्य मुख्यालय में अपने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि आम चुनाव इस साल दिसंबर से आगे नहीं टलने चाहिए। साथ ही आर्मी चीफ ने साफ कहा कि यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के पास संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर निर्णय लेने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है। वहीं, रखाइन कॉरिडोर के मुद्दे पर भी सेना का यूनुस से मतभेद है। सेना मार्च से ही कह रही है कि उसकी सहमति के बिना इसे बनाना अवैध है।
हसीना ने यूनुस की आलोचना की
वहीं, अपने नए ऑडियो संदेश में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यूनुस की आलोचना की और उन पर देश को अमेरिका के हाथों बेचने का आरोप लगाया। हसीना का गुस्सा यूनुस सरकार के अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के जवाब में फूटा। हसीना ने कहा, मेरे पिता सेंट मार्टिन द्वीप के लिए अमेरिका की मांगों से सहमत नहीं थे। उन्हें इसके लिए अपनी जान देनी पड़ी। और यही मेरी नियति थी क्योंकि मैंने सत्ता में बने रहने के लिए देश को बेचने के बारे में कभी नहीं सोचा था। उन्होंने आतंकवादियों की मदद से सत्ता हथियाई है, यहां तक कि उन आतंकवादियों की भी मदद ली जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं, जिनके खिलाफ मेरी सरकार ने बांग्लादेश के लोगों की रक्षा की। सिर्फ एक आतंकवादी हमले के बाद, हमने सख्त कदम उठाए। कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब जेलें खाली हैं। उन्होंने सभी को रिहा कर दिया। अब बांग्लादेश पर उन आतंकवादियों का राज है।
यूनुस के लिए कई मुश्किलें
बहरहाल, कार्यवाहक सरकार प्रमुख यूनुस के लिए ये दौर मुश्किल भरा है। वह कभी सत्ता छोड़ने की बात कहते हैं तो कभी इससे साफ इनकार कर देते हैं। वहीं, सेना से उनका टकराव बढ़ रहा है जिससे तख्तापलट की आशंका भी बनी हुई है। बांग्लादेश में सेना के तख्तापलट का इतिहास किसी से छुपा नहीं है। इस मामले में ये देश पाकिस्तान से भी अधिक खतरनाक है। वहीं, यूनुस के भारत विरोधी रुख को देखते हुए भारत ने व्यापार रूट को लेकर कुछ ऐसे प्रतिबंध लगाए हैं जिसका बांग्लादेश में दूरगामी असर होना तय है। ऐसे में बांग्लादेश का भविष्य क्या होगा, वह किस दिशा में जाएगा, सब कुछ अनिश्चित बना हुआ है। क्या विपक्ष यूनुस के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा या आर्मी एक और तख्तापलट को अंजाम देगा, ये बड़ा सवाल बना हुआ है।
