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AI Wearables आपको ही नहीं, आसपास के लोगों को भी क्या देख-सुन रहे? समझें Privacy का नया खतरा

AI वियरेबल डिवाइस लोगों की बातचीत सुनकर उसे टेक्स्ट, समरी में बदल सकते हैं। लेकिन चिंता उन लोगों की प्राइवेसी को लेकर है, जिन्होंने रिकॉर्डिंग की सहमति नहीं दी। कैमरा हटाने या रिकॉर्डिंग इंडिकेटर लगाने के बावजूद बायस्टैंडर प्राइवेसी को लेकर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।

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एआई ने कई तरह की सुविधाएं दी है लेकिन अब यह प्राइवेसी के लिए चिंचा का विषय बन चुका है।
Authored by: गौरव तिवारी
Updated Sep 17, 2026, 10:57 IST
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टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। हमारे डेली रूटीन के लगभग हर एक छोटे बड़े काम आज कहीं न कहीं टेक्नोलॉजी की मदद से हो रहे हैं। AI से लैस स्मार्टवॉच, स्मार्ट ग्लास और दूसरे वियरेबल डिवाइस अब सिर्फ कदम गिनने या हार्ट रेट मापने तक सीमित नहीं हैं। ये डिवाइस आसपास की बातचीत सुन सकते हैं, चीजों को पहचान सकते हैं और रिकॉर्ड की गई जानकारी को टेक्स्ट, नोट्स या AI समरी में बदल सकते हैं।

समस्या यह है कि डिवाइस पहनने वाले व्यक्ति को तो पता होता है कि उसकी डिवाइस क्या कर रही है, लेकिन उसके सामने बैठे दूसरे व्यक्ति को इसकी जानकारी हो, यह जरूरी नहीं है। इसी वजह से 'बायस्टैंडर प्राइवेसी', यानी आसपास मौजूद उन लोगों की निजता, जिनके पास खुद ऐसा डिवाइस नहीं है, को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं।

Apple Watch का उदाहरण

Apple की नई Watch Series 12 में बताए गए Live Rewind फीचर से यूजर पिछली 15 सेकंड की बातचीत का टेक्स्ट स्निपेट देख सकता है। वहीं Siri Recap बातचीत का एक सामान्य सारांश तैयार कर सकता है।

Apple के मुताबिक, Live Rewind अपने आप लगातार बातचीत रिकॉर्ड या ट्रांसक्राइब नहीं करता। इसे एक्टिवेट करने के लिए यूजर को Digital Crown को दो बार दबाना होता है। फीचर चालू होने पर एक आवाज सुनाई देती है और स्क्रीन पर माइक्रोफोन इंडिकेटर और फुल-स्क्रीन एनीमेशन दिखाई देता है।

Apple का कहना है कि Live Rewind की प्रोसेसिंग डिवाइस पर होती है, जबकि Siri Recap के कुछ हिस्सों की प्रोसेसिंग Private Cloud Compute के जरिए होती है। कंपनी के अनुसार, सेव किए गए समरी और Live Rewind स्निपेट iCloud के जरिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहते हैं।

लेकिन यहां सवाल सिर्फ Apple Watch पहनने वाले की प्राइवेसी का नहीं है। अगर किसी मीटिंग या डिनर में सामने बैठा व्यक्ति कुछ बोल रहा है और उसकी आवाज AI सिस्टम तक पहुंच रही है, तो क्या उसकी भी सहमति ली जानी चाहिए?

सामने बैठे व्यक्ति को शायद पता ही न हो

मान लीजिए दो लोग आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हैं। उनमें से एक ने AI वियरेबल पहन रखा है। उसे पता है कि डिवाइस बातचीत को सुन सकती है, लेकिन दूसरे व्यक्ति को शायद इसकी जानकारी ही न हो। वह व्यक्ति बातचीत रिकॉर्ड होने से तो शायद परेशान न हो, लेकिन यह नहीं चाहता हो कि उसकी बातों को टेक्स्ट में बदला जाए, AI से समरी तैयार की जाए, लंबे समय तक सेव रखा जाए या फिर किसी व्यक्ति या विषय से जोड़ा जाए। यही अंतर बायस्टैंडर प्राइवेसी की चिंता पैदा करता है।

AI वियरेबल कंपनी NeoSapien के को-फाउंडर और CEO धनंजय यादव का कहना है कि सिर्फ डिवाइस खरीदने वाले व्यक्ति की मंजूरी को उन सभी लोगों की सहमति नहीं माना जा सकता, जिनसे वह आगे बातचीत करेगा।

उनके मुताबिक, किसी मीटिंग को ट्रांसक्राइब करने की अनुमति देना और उसी बातचीत से किसी व्यक्ति की भावनाओं या दूसरे निजी पहलुओं का एनॉलिसिस करने की अनुमति देना दो अलग-अलग बातें हैं।

स्मार्ट ग्लास में सिर्फ कैमरा ही चिंता की वजह नहीं

स्मार्ट ग्लास की प्राइवेसी को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा कैमरे को लेकर हुई है। Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लास को लेकर आयरलैंड के Data Protection Commission ने भी कंपनी से बातचीत की थी। चिंता यह थी कि कैमरे से रिकॉर्ड होने वाले आसपास के लोगों को पर्याप्त जानकारी मिल रही है या नहीं।

इसके बाद Meta ने बाहरी प्राइवेसी LED को बड़ा किया और रिकॉर्डिंग के दौरान उसके ब्लिंक करने का तरीका भी बदला। लेकिन कैमरा हटाने से प्राइवेसी की सारी समस्या खत्म नहीं होती।

Meta के एक कैमरे के बिना वाला स्मार्ट ग्लास का संभावित मॉडल, जिसका कोडनेम Luna बताया जा रहा है, में कैमरा हटाए जाने की खबर है, लेकिन माइक्रोफोन, स्पीकर और AI क्षमताएं बरकरार रहने की बात सामने आई है। इससे एक अहम सवाल उठता है—क्या बिना कैमरे वाला डिवाइस वास्तव में ज्यादा प्राइवेट है, अगर वह आसपास की बातचीत सुन सकता है?

माइक्रोफोन भी जानकारी जुटा सकता है

एक माइक्रोफोन बातचीत को सुन सकता है, भले ही उससे कोई फोटो न ली जा रही हो। AI उस आवाज को सिर्फ रिकॉर्ड ही नहीं कर सकता, बल्कि उसे टेक्स्ट में बदलकर कई तरह की जानकारी निकाल सकता है। उदाहरण के लिए, सिस्टम: बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट बना सकता है, लोगों के नाम पहचान सकता है, मीटिंग में लिए गए फैसले निकाल सकता है, बातचीत का सारांश तैयार कर सकता है, और आवाज या बातचीत के तरीके से दूसरी जानकारी का अनुमान लगाने की कोशिश कर सकता है। यानी यह पूरी तरह से साफ है कि एक छोटी-सी बातचीत से AI कई स्तर की जानकारी तैयार कर सकता है।

टेक्नोलॉजी को लेकर जताई चिंता

यूके के Information Commissioner's Office (ICO) ने भी स्मार्ट ग्लास जैसी इमर्सिव टेक्नोलॉजी को लेकर चिंता जताई है। उसके मुताबिक, ऐसे डिवाइस आसपास मौजूद लोगों की जानकारी को जानबूझकर या अनजाने में रिकॉर्ड कर सकते हैं।

AI Wearables

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रिकॉर्डिंग डिलीट करना ही काफी नहीं

मान लीजिए किसी बातचीत की असली ऑडियो रिकॉर्डिंग बाद में डिलीट कर दी गई। फिर भी उससे तैयार किया गया ट्रांसक्रिप्ट या AI समरी बची रह सकती है। यानी सिर्फ ऑडियो डिलीट करना हमेशा पूरी जानकारी मिटाने के बराबर नहीं है।

धनंजय यादव के मुताबिक, कंपनियों को दो अलग-अलग सवालों पर ध्यान देना चाहिए—पहला, जानकारी रिकॉर्ड होने के बाद उसकी सुरक्षा कैसे की जाए और दूसरा, क्या उस जानकारी को शुरू से रिकॉर्ड करने की अनुमति थी भी या नहीं।

यूके के ICO की 2026 की कंज्यूमर IoT गाइडेंस में भी कहा गया है कि जहां सहमति जरूरी हो, वह वास्तविक, स्पष्ट और स्वतंत्र होनी चाहिए। लोगों को प्राइवेसी की जानकारी आसान भाषा में दी जानी चाहिए और जरूरत से ज्यादा डेटा इकट्ठा नहीं किया जाना चाहिए।

लेकिन AI वियरेबल में दिक्कत यह है कि डेटा का इस्तेमाल करने वाला ग्राहक और डेटा से प्रभावित होने वाला व्यक्ति अलग-अलग हो सकते हैं।

रिकॉर्डिंग की लाइट जरूरी है, लेकिन काफी नहीं

प्राइवेसी के लिए एक आसान तरीका यह है कि डिवाइस रिकॉर्डिंग शुरू होने पर कोई लाइट या आवाज के जरिए संकेत दे। Apple Live Rewind में चाइम और स्क्रीन इंडिकेटर का इस्तेमाल करता है। NeoSapien का Neo1 भी एक्टिव लिसनिंग के दौरान सफेद लाइट दिखाता है और इसमें कैप्चर को रोकने का विकल्प दिया गया है। लेकिन सिर्फ लाइट जलने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होती।

किसी व्यक्ति को पता हो सकता है कि सामने वाला रिकॉर्ड कर रहा है, फिर भी उसके पास रिकॉर्डिंग रोकने का कोई व्यावहारिक तरीका नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, रेस्टोरेंट, ऑफिस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में वहां से उठकर चले जाना हर बार संभव नहीं है। यही वजह है कि प्राइवेसी सिर्फ 'रिकॉर्डिंग हो रही है' बताने तक सीमित नहीं रह सकती।

कंपनियों को क्या करना होगा?

  • AI वियरेबल कंपनियों को यह साफ करना चाहिए कि:
  • क्या रिकॉर्ड किया जा रहा है।
  • उससे क्या जानकारी निकाली जा रही है।
  • डेटा कहां प्रोसेस हो रहा है।
  • कितने समय तक रखा जाएगा।
  • और उसे कौन देख या इस्तेमाल कर सकता है।
इसके साथ ही उनका मानना है कि आसपास मौजूद लोगों के लिए भी शिकायत या डेटा हटाने का कोई आसान तरीका होना चाहिए। इसके लिए यह जरूरी नहीं होना चाहिए कि वह व्यक्ति उसी कंपनी का ग्राहक बने।

असली चुनौती: सुविधा और निजता के बीच संतुलन

AI वियरेबल लोगों के लिए बातचीत याद रखने, मीटिंग का सारांश बनाने और रोजमर्रा की जानकारी को व्यवस्थित करने में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन जैसे-जैसे ये डिवाइस ज्यादा सुनने और समझने लगेंगे, प्राइवेसी का सवाल सिर्फ डिवाइस पहनने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा।

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