Samrat Prithviraj: अपने सामने मूंछों पर ताव देने वाले को चीर देते थे काका कान्हा, इस वजह से आंखों पर बांध कर रखते थे पट्टी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 3, 2022, 11:29 AM IST

Kaka Kanha in Samrat Prithviraj: 'सम्राट पृथ्वीराज' में संजय दत्‍त काका कान्हा का रोल निभाते नजर आ रहे हैं जोकि पृथ्वीराज के चाचा और महान योद्धा थे। कहा जाता है कि उन्होंने प्रण किया था मेरे सामने यदि किसी ने अपनी मूंछ पर हाथ भी रखा तो मैं उसका सिर काट दूंगा।

Samrat Prithviraj: अपने सामने मूंछों पर ताव देने वाले को चीर देते थे काका कान्हा, इस वजह से आंखों पर बांध कर रखते थे पट्टी

Interesting fact of Sanjay Dutt role Kaka Kanha in Samrat Prithviraj: यशराज बनैर तले बनी फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' रिलीज हो चुकी है। पृथ्वीराज चौहान का किरदार अक्षय कुमार निभा रहे हैं, संयोगिता का रोल मानुषी छिल्लर कर रही हैं, काका कान्हा का रोल संजय दत्त और चंदवरदाई के किरदार में नजर आए हैं सोनू सूद। सम्राट पृथ्वीराज चौहान, संयोगिता और चंदवरदाई कौन थे ये तो सब जानते हैं लेकिन लोगों को दिलचस्पी है संजय दत्त के रोल यानि काका कान्हा के बारे में जानने की। 

इस फिल्म में मुख्‍य व‍िलेन मोहम्‍मद गौरी का रोल पहले संजय दत्‍त को ऑफर हुआ था पर संजय दत्‍त काका कान्हा का रोल निभाएंगे जोकि पृथ्वीराज के चाचा और महान योद्धा थे। कहा जाता है कि उन्होंने प्रण किया था मेरे सामने यदि किसी ने अपनी मूंछ पर हाथ भी रखा तो फिर चाहे वो कोई भी व्यक्ति क्यों न हो, मैं उसका सिर काट दूंगा या स्वयं मर जाऊंगा। 

कहा जाता है कि सामंत ​​​​​सारंग देव के सात पुत्र प्रताप, अमर, गोकुल, गोबिंद, हरि, श्याम और भगवान अजमेर महाराज और पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर चौहान की शरण में आए। महाराज सोमेश्वर ने शरणार्थियों का आदर सत्कार किया। दरबार में महाभारत का प्रसंग चल रहा था और योद्धाओं के शौर्य की कहानी सुनाई जा रही थी। तभी सामंत ​​​​​सारंग देव के पुत्र प्रताप सिंह ने अपनी मूंछ पर ताव दिया। वह सोमेश्वर के भाई कन्ह चौहान की प्रतिज्ञा के बारे में नहीं जानते थे। 

अपने प्रण के अनुसार काका कान्हा ने अपनी तलवार से दरबार में ही प्रताप सिंह के दो टुकड़े कर दिए। दरबार रणभूमि बन गया। प्रताप सिंह के अन्य छह भाई काका कान्हा पर वार करने लगे और अंत में छह भाई भी मारे गए। महाराजा सोमेश्वर को इस बात से काफी आघात लगा और उन्होंने काका कन्हा से प्रण लिया कि वे अपनी अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर रखेंगे। 

युद्ध में हटाई थी आंख से पट्टी

घग्घर नदी के युद्ध में काका कन्हा ने पृथ्वीराज चौहान के विशेष आग्रह पर आंख से पट्टी उतारी। युद्ध हुआ और मोहम्मद गौरी के प्रमुख सेनानायक ने अपनी मूंछों को ताव दे दिया। इसके बाद काका कन्ह ने उसको हाथी पर सवार होने से पहले ही चीर दिया था। काका कान्हा ने सिर से पैर तक चीर कर उसके दो टुकड़े कर दिए थे। 

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