Kiran Kumar COVID 19: 'कोरोना को थप्पड़ मारो और उठाकर बाहर फेंको' ठीक होने के बाद बोले किरण कुमार

Kiran Kumar On COVID 19: किरण कुमार ने कोरोना वायरस से जंग जीत ली है। अब ठीक होने के बाद किरण कुमार ने बताया कि किस तरह से उन्होंने इस बीमारी को मात दी। इसके अलावा उन्होंने इससे बचने का मंत्र भी दिया है।

Kiran Kumar
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मुख्य बातें

  • किरण कुमार ने कोरोना वायरस से जंग जीत ली है।
  • किरण ने बताया कि किस तरह से उन्होंने आइसोलेशन में वक्त बिताया।
  • किरण ने कहा कि अब हमें कोरोना के साथ जिंदगी जीना सीख लेना चाहिए।

मुंबई. बॉलीवुड एक्टर किरण कुमार कोरोना वायरस से जंग जीत गए हैं। किरण कुमार की तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आई है। अब किरण कुमार ने बताया है कि किस तरह से उन्होंने इस बीमारी को मात दी है। इसके अलावा उन्होंने क्या-क्या सावधानी बरती है। 

मुंबई मिरर से बातचीत में किरण कुमार ने बताया कि मेरा खाना सीढ़ी पर रख दिया जाता था। मैं सीढ़ी से खाना उठाता, खाता और प्लेट को फेंक दिया करता था। मेरी वाइफ ने मेरी लिए डिस्पोजिबल बर्तन खरीदे थे, ताकि मेरी प्लेट किसी के कॉन्टैक्ट में न आए। 

किरण कुमार ने बताया कि वह रोज सुबह अपना बिस्तर खुद ही तैयार करते और अपना कमरा साफ किया करते थे। बकौल किरण कुमार-'मेरे पास पूरा एक फ्लोर था। मुझे एक कमरे की जरूरत थी जहां मैं खुद को आइसोलेट कर लूं।' 

कोरोना से सीखी ये चीज 
किरण कुमार ने कहा कि- 'मैंने आइसोलेशन में सीखा कि किस तरह से आपका परिवार आप पर जान छिड़कता है। मेरी फैमिली मेरे पास नहीं आ रही, फिर भी मेरा पूरा ध्यान रख रहे थे। रिश्ते ही जिंदगी की नीव होते हैं।'

किरण कुमार कहते हैं- 'आइसोलेशन के दौरान मैंने योगा किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिल्में देखीं। इस दौरान मुझे एहसास हुआ कि हमें कोरोना से घबराने और डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। हम लोगों ने इस बीमारी का हौवा बना दिया है।' 

भूलकर भी न करें ये काम 
किरण कुमार ने एक वीडियो जारी कर बताया कि कोरोना में क्या न करें। किरण ने कहा कि हमें कोरोना के साथ जिंदगी जीने की आदत डालनी होगी। जब तक वैक्सीन नहीं आती तब तक सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करना होगा।  

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Veteran Actor Kiran Kumar Ji’s 3rd Corona Test Report Has Come Negative: Here Is The Statement From Him: Its safe to say that things feel more than a little surreal at the moment. Never in our wildest dreams could we have imagined a dystopia like this would be our everyday reality. But it is. A few weeks ago, I had to undergo a routine medical procedure for which, under the government's guideline at the time, a covid 19 test was mandatory. My daughter accompanied me for the testing and we joked and laughed and generally remained upbeat, certain that this was just a formality and we would get on with our normal lives soon enough. The test results came back positive. Within the hour, we cordoned off a floor at home and turned it into an isolation zone. The amazing doctors at Hinduja khar and Lilavati armed us with enough information to ensure panic would not set in. We informed the BMC of my status and amped up everyones vitamin intake. Today after being retested for Covid19, I am happy to say that I have tested negative. My family is still following strict home isolation. I was totally asymptomatic and apart from the boredom that accompanies isolation had no other complaints. I am continuing to take this forced time out as an opportunity to introspect and focus on life's smaller pleasures. The days are spent meditating, catching up on ample OTT content and reading books I've long forgotten I'd bought. We all held on to our optimism and if theres one take away I have from this, is that there's nothing to fear but fear itself. Corona felt like a looming, distant and scary phantom that we took every precaution to avoid and even then it found a way to enter what we thought was a completely sanitised space. Yet, here we are, dealing with it and getting on with our lives. Its unfair to test peoples loyalty when your world feels like it's caving in on you. It's such a strange time that a seasonal sneeze or cough feels like something more sinister. As hard as it is for the people isolating, it's tougher still for their caregivers. #kirankumar #coronavirusindia #indiafightscorona #viralbhayani @viralbhayani

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किरण ने कहा- 'अगर आपको कोरोना के कुछ लक्षण दिखे तो खुद को बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में न भर्ती करें। यदि आप ऐसे करें तो आप किसी जरूरतमंद के बेड को छीन लेंगे। कोरोना को एक थप्पड़ मारो और उठाकर बाहर फेंको, कुछ नहीं होगा।'

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